उत्तर और मध्य भारत में गर्मी का असर अपने चरम पर था और 25 मई से नौतपा शुरू हो गए हैं जो 2 जून तक चलेंगे. ज्योतिष और विज्ञान दोनों के अनुसार, इन 9 दिनों में सूर्य की किरणें सीधे धरती पर पड़ती हैं जिससे भयंकर लू और हीटवेव का जोखिम और अधिक बढ़ जाता है. ऐसे में इस झुलसाने वाली गर्मी में शरीर का टेम्परेचर मेंटेन रखना और डिहाइड्रेशन से बचना काफी जरूरी होता है. यदि आप दोपहर के लंच में सिर्फ एक देसी ड्रिंक को शामिल कर लें तो आप इस भयंकर तपिश में भी खुद को पूरी तरह बीमार पड़ने से बचा सकते हैं. वह चीज कुछ और नहीं, बल्कि हमारे किचन में मिलने वाली मट्ठा या छाछ (Buttermilk) है.
शरीर का नेचुरल कूलेंट है छाछ
हेल्थलाइन का कहना है, दोपहर के खाने के बाद एक गिलास छाछ पीना आपके शरीर के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. यह सिर्फ एक रिफ्रेशिंग ड्रिंक नहीं है, बल्कि एक बेहतरीन नेचुरल कूलेंट है. दही और छाछ जैसे फर्मेंटेड डेयरी प्रोडक्ट्स में शरीर के तापमान को तुरंत कम करने की शक्ति होती है. जब बाहर का पारा 45 डिग्री पार कर जाता है तब छाछ आपके पेट की गर्मी को शांत करती है और अंदरूनी ऑर्गन को भी कूल रखती है.
इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को करता है पूरा
गर्मी और नौतपा के दौरान सबसे ज्यादा परेशानी पसीने के जरिए शरीर से जरूरी मिनरल्स के निकल जाने की होती है. छाछ में भरपूर मात्रा में पानी, पोटैशियम और सोडियम जैसे जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स होते हैं. दोपहर के समय जब आप इसका सेवन करते हैं तो यह शरीर में पानी की कमी को तुरंत पूरा (रिहाइड्रेट) करता है. इससे लू लगने का खतरा न के बराबर हो जाता है और आप दिनभर एनर्जेटिक महसूस करते हैं.
पाचन तंत्र को रखेगा दुरुस्त
गर्मी के मौसम में डाइजेशन स्लो हो जाती है जिससे गैस, एसिडिटी और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं आम हैं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, छाछ में मौजूद गुड बैक्टीरिया यानी प्रोबायोटिक्स पेट के एसिड को न्यूट्रलाइज करते हैं. भारी या मसालेदार लंच के बाद भुने हुए जीरे और काले नमक के साथ ली गई छाछ खाने को आसानी से पचा देती है, जिससे पेट में भारीपन महसूस नहीं होता.