कन्हैया कुमार (Kanhaiya Kumar) 28 सितंबर 2021 से कांग्रेस के सदस्य हैं. उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ) के नेता के रूप में भी कार्य किया. कन्हैया कुमार ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद के सदस्य भी रहे हैं. 2024 लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली से कन्हैया कुमार को उम्मीदवार बनाया है. वह बीजेपी के मनोज तिवारी के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे.
उनका जन्म जनवरी 1987 को बिहार के बेगुसराय जिले के बिहट गांव में हुआ था. यह गांव तेघरा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा है, जिसे सीपीआई का गढ़ माना जाता है.
कन्हैया कुमार ने पटना कॉलेज ऑफ कॉमर्स में रहते हुए छात्र राजनीति में शामिल हुए. पटना में एक सम्मेलन में एआईएसएफ के एक प्रतिनिधि के रूप में चुने गए. इसके बाद नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी से समाजशास्त्र में एमए के साथ स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी कर, वह दिल्ली चले गए और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में शामिल हो गए, जहां उन्होंने स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज में पीएचडी की. वह सितंबर 2015 में जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष बने. 29 अप्रैल 2018 को, वह भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) की पार्टी राष्ट्रीय परिषद के लिए चुने गए. बाद में 2019 में, उन्हें सीपीआई की राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद में शामिल किया गया.
कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने JNU से प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रशासन में लेटने का कॉम्पिटिशन है. ऐसा नहीं कि नॉर्मल झुककर प्रणाम करना, जमीन को चाट-चाटकर कुआ खोद दे रहे है.
कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने JNU के बारे में बात करते हुए कहा कि जेएनयू में छात्र आंदोलन और प्रशासन का रिश्ता बहुआयामी है. प्रशासन का एक हिस्सा हमेशा छात्र आंदोलन के साथ खड़ा रहता है क्योंकि जेएनयू का प्रशासन पूरी तरह से इस विश्वविद्यालय के अंदरूनी लोगों से बना होता है, जिसमें शिक्षक और कर्मचारी शामिल हैं.
कांग्रेस नेता और जेएनयू के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार की एक वीडियो में नारेबाजी को लेकर विवाद छिड़ गया है. इस वीडियो में कन्हैया कुमार जेडीयू के दौरे पर दिखे जहां उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा चार पदाधिकारियों और पूर्व यूनियन अध्यक्ष नीतीश कुमार को दो सेमेस्टर के लिए निष्कासित करने के फैसले की आलोचना की.
पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार बीते शुक्रवार को जेएनयू पहुंचे थे. इस दौरान उनका पुराना अंदाज देखने को मिला. उन्होंने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला और विवि प्रशासन से रस्टिकेट किए छात्रों को बहाल करने की मांग की.
बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार की समीक्षा के लिए क्षेत्रीय नेतृत्व से लेकर स्थानीय उम्मीदवारों तक, सभी दिल्ली तलब किए गए हैं. सभी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है, उम्मीदवारों से भी - क्या जवाबदेही सिर्फ उनकी ही बनती है?
कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने कहा कि बिहार में पहले चरण में जो बदलाव की शुरुआत हुई थी, वह दूसरे चरण में और भी स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगी. सीसीटीवी, स्ट्रांग रूम जैसे सुरक्षा उपाय और फर्जी पर्चियों के मामले सामने आने के बावजूद बिहार की जनता इन सबका सामना कर रही है और बदलाव के लिए मजबूत जवाब दे रही है.
कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने कहा कि बिहार की अर्थव्यवस्था में बिहार के स्थानीय लोगों और परिवारों का हिस्सेदारी सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है. चाहे वह सरकारी नौकरी हो या अन्य किसी रोजगार का साधन, मूल सवाल यह है कि क्या बिहार के संसाधनों और व्यवस्था पर बिना किसी भेदभाव के, बिहार के साढ़े तीन करोड़ परिवारों का पहला हक होगा या नहीं?
पंचायत आजतक बिहार के मंच से पत्रकार अंजना ओम कश्यप ने कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार को क्या सीख दी. सुनिए.
कन्हैया कुमार का दावा है कि वो बिहार चुनाव में ही काम कर रहे हैं, लेकिन सवाल ये है कि वो कहीं दिखाई क्यों नहीं दे रहे हैं? भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी के बाद सबसे लोकप्रिय चेहरों में गिने जाने वाले कन्हैया कुमार क्या तेजस्वी-लालू के कोपभाजन की कीमत चुका रहे हैं?
कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने धनतेरस पर सोने के बढ़े दाम का जिक्र करते हुए कहा है कि राजनीति में चमचे ज्यादा हो गए हैं. इस बार धनतेरस पर चम्मच ही ले लेंगे.
कांग्रेस नेता और एनएसयूआई प्रभारी कन्हैया कुमार ने पंचायत आजतर बिहार के मंच में शिरकत की. उन्होंने बिहार की राजनीति पर अपनी राय रखी है. उन्होंने नीतीश कुमार और बीजेपी पर हमला बोला. कन्हैया कुमार ने आगामी बिहार चुनाव में उम्मीदवार के तौर पर नहीं उतरने की घोषणा की, लेकिन यह भी कहा कि वे महागठबंधन के लिए सभी 243 सीटों पर प्रचार करेंगे.
2025 के बिहार चुनाव तेजस्वी यादव के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं. बिहार में लालू प्रसाद की सक्रिय मौजूदगी तेजस्वी यादव को बढ़त दिलाती है, लेकिन महागठबंधन में कांग्रेस के साथ टकराव और तेज प्रताप विवाद बड़ी चुनौतियां हैं - जो भारी भी पड़ सकती हैं.
राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा के दौरान बिहार की सियासत में छाए रहे, लेकिन उसकी कीमत भी चुकानी पड़ी है. कन्हैया कुमार और पप्पू यादव दोनों को मंच से दूर रखा गया - आखिर राहुल ने अपने दो बड़े चेहरों को साइडलाइन क्यों किया?
वोटर अधिकार यात्रा में राहुल गांधी की मौजूदगी भारी रही, जबकि तेजस्वी साथ में खड़े नजर आए. यात्रा का तात्कालिक फायदा तो कांग्रेस के हिस्से में जा रहा है, क्या तेजस्वी यादव की आरजेडी के हिस्से में कोई दूरगामी फायदा हो सकता है?
बिहार में महागठबंधन की मजबूती पर सवाल इसलिए उठ रहे हैं, क्योंकि कांग्रेस और तेजस्वी यादव के बीच भरोसे की कमी दिख रही है. चुनाव बहिष्कार से लेकर जातीय जनगणना और गठबंधन के चेहरे तक, तमाम मुद्दों पर राहुल गांधी का रुख तेजस्वी यादव के खिलाफ ही लगता है.
वायरल वीडियो में कन्हैया कहते हैं, “राजा का बेटा राजा नहीं बनेगा. लोकतंत्र में वोट से तय होगा कि हमारा शासक कौन बनेगा. और ये जो लोकतंत्र है, ये लोकतंत्र ही भारत की बुनियाद है.”
महागठबंधन के बिहार बंद के दौरान पप्पू यादव और कन्हैया कुमार को राहुल गांधी के ट्रक पर चढ़ने से रोके जाने का मामला अब ये दोनों नेता बनाम तेजस्वी हो गया है. पप्पू यादव और कन्हैया बनाम तेजस्वी का मुद्दा हर बार क्यों उठ जाता है?
कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने दावा किया कि बिहार में पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार "परिवर्तन की हवा" अधिक तेज है और भाजपा ऑपरेशन सिंदूर को चुनावी मुद्दे के रूप में नहीं उठा रही है क्योंकि उसे पता है कि बिहार के लोग इसका नकारात्मक जवाब देंगे.
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जो कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार का है. इस वीडियो को लेकर तमाम तरह के दावे किए जा रहे हैं. जब हमने वीडियो की पड़ताल की तो हकीकत कुछ और निकली.
राहुल गांधी हर बिहार दौरे में तेजस्वी यादव के लिए मुश्किलें ही खड़ी करते हैं. कांग्रेस ने कहा तो यही है कि महागठबंधन में रह कर ही चुनाव लड़ेंगे, लेकिन राजनीति तो उसके खिलाफ ही जा रही है.
कानूनी दुश्वारियां अपनी जगह हैं, लेकिन राहुल गांधी ने बिहार में आरजेडी नेतृत्व का जीना हराम कर रखा है - बिहार में कांग्रेस हर वो काम कर रही है जो लालू यादव को बिल्कुल भी पंसद नहीं है.