पहाड़
एक पहाड़ (Hill), एक भू-आकृति है जो आसपास के इलाके से ऊपर फैली हुई होती है. अक्सर इसका एक अलग शिखर या चोटी होता है.
भूगोलवेत्ताओं (Geographers) ने ऐतिहासिक रूप से पहाड़ों को समुद्र तल से 1,000 फीट (304.8 मीटर) से अधिक की पहाड़ियों के रूप में माना है. यू.एस. ने भी एक पहाड़ को 1,000 फीट (304.8 मीटर) या उससे अधिक लंबा होने के रूप में परिभाषित किया. इस ऊंचाई से कम किसी भी समान भू-आकृति को पहाड़ी माना जाता था. हालांकि, संयुक्त राज्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने निष्कर्ष निकाला है कि इन शर्तों की वास्तव में यू.एस. में तकनीकी परिभाषाएं नहीं हैं (Definitions of Hill).
पहाड़ियों का निर्माण भू-आकृतिक घटनाओं के माध्यम से हो सकता है. फॉल्टिंग, बड़े भू-आकृतियों का इरोजन जैसे कि पहाड़ और ग्लेशियरों द्वारा सेडिमेंट यानी तलछट का जमाव. साथ ही, एक प्रक्रिया जिसे डाउनहिल क्रीप होती है जिसमें पहाड़ियों की गोल चोटियां, पहाड़ी को ढकने वाली मिट्टी और रेजोलिथ की गति के परिणामस्वरूप भी पहाड़ो की उंचाई बढ़ती है और नए पहाड़ों का निर्माण होता है (Making of a Hill).
पहाड़ो के रूप और निर्माण की विधि के आधार पर इसका वर्णन करने के लिए विभिन्न नामों का उपयोग किया जा सकता है. ऐसे कई नाम भौगोलिक क्षेत्र में इस्तेमाल हुए हैं, जो उस क्षेत्र के लिए एक प्रकार की पहाड़ी संरचना का वर्णन करते हैं. हालांकि यह नाम अक्सर भूवैज्ञानिकों द्वारा अपनाए जाते हैं और भौगोलिक संदर्भ में उपयोग किए जाते हैं (Hills,Various names by Geologists).
बर्फबारी के बाद बद्रीनाथ धाम बर्फ की सफेद चादर में ढक गया है.
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राजधानी और आसपास के इलाकों में बूंदाबांदी की संभावना जताई है. वहीं आज पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और पूर्वी राजस्थान में भी बारिश देखने को मिल सकती है. पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी का अलर्ट जारी किया गया है.
उत्तर भारत में मौसम का मिजाज बदलने वाला है. मौसम विभाग (IMD) के अनुसार आने वाले दिनों में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में फिर बर्फबारी की संभावना है. वहीं, दिल्ली-NCR में 31 जनवरी से 2 फरवरी तक बारिश का पूर्वानुमान जताया गया है. मौसम विभाग ने पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के लिए भी बारिश का अलर्ट जारी किया है.
केदारनाथ धाम में भारी बर्फबारी ने चारों ओर सफेद चादर बिछा दी है. मंदिर प्रांगण में घुटनों तक बर्फ जमी हुई है और धाम के सभी पैदल रास्ते पूरी तरह ढक गए हैं. बाबा केदारनाथ की नगरी मनमोहक हो गई है. वहीं, त्रियुगीनारायण की खूबसूरती भी ताजा बर्फबारी से और निखर गई है.
उत्तराखंड के पहाड़ इस बार बर्फबारी और बारिश के लिए तरस रहे हैं. पिछले साल दिसंबर में भी प्रदेश में खास बारिश या बर्फबारी नहीं हुई. पहाड़ों पर इस कमी के चलते देवभूमि के लोग अब आस्था का सहारा ले रहे हैं. गांव में लोगों ने देवताओं से एक हफ्ते के भीतर बारिश और बर्फबारी की प्रार्थना की है.
वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के असर से पहाड़ों में मौसम जल्द ही करवट लेने वाला है. ऊंचे इलाकों में लगातार बर्फबारी देखने को मिल सकती है, जबकि निचले क्षेत्रों में बारिश की संभावना रहेगी. बदलते मौसम का असर गणतंत्र दिवस के दिन भी देखा जा सकता है.
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के ज्यादातर इलाकों में इस बार बर्फबारी में काफी कमी देखने को मिली है. नए साल पर भी यहां खास बर्फबारी की उम्मीद नहीं है. केदारनाथ में अब तक एक भी बार बर्फ नहीं गिरी है. आइए जानते हैं नए साल में कहां ज्यादा बर्फबारी हो सकती है?
पहली बार बर्फ में ट्रेकिंग का उत्साह जितना रोमांच से भरा होता है, उतनी ही इसमें जोखिम की गुंजाइश भी रहती है. इसलिए विंटर ट्रेकिंग पर निकलने से पहले कुछ जरूरी बातों को समझ लेना बेहद अहम है, ताकि आपकी पहली बर्फीली यात्रा यादगार बने, न कि परेशानी की वजह.
पश्चिमी हिमालय इस समय भीषण सूखे जैसी स्थिति से जूझ रहा है. लगातार बारिश और बर्फबारी की कमी से हालात गंभीर नजर आ रहे हैं. अब तक पूरे मौसम में केवल एक बार 6 अक्टूबर को बारिश और बर्फबारी देखी गई है. सर्दियों में बर्फ से ढके दिखने वाले पहाड़ अब सूखे और खाली दिखाई दे रहे हैं.
साल का अंत यात्रा के लिए बेहतरीन समय में से एक माना जाता है. अगर आप इस मौके को खास बनाना चाहते हैं, तो ऊटी की सैर एक शानदार विकल्प हो सकता है. IRCTC के जरिए आप अपने बजट के अनुसार पैकेज चुनकर यात्रा का आनंद ले सकते हैं. आइए जानते हैं इस टूर पैकेज की डिटेल.
आप अगर प्रकृति प्रेमी हैं तो IRCTC का यह बजट टूर पैकेज आपके लिए शानदार साबित हो सकता है. इसकी मदद से आप 3 दिन और 2 रातों की यात्रा कर सकते हैं. आइए जानते हैं आप इस यात्रा को कितने रुपये से शुरू कर सकते हैं.
अगर आपको ट्रैकिंग पसंद है और पहाड़ों पर ट्रैक करने का प्लान बना रहे हैं, तो यह आपके लिए एक अच्छा मौका हो सकता है. आप IRCTC की मदद से उत्तराखंड की खूबसूरत जगहों की ट्रैकिंग कर सकते हैं. आइए जानते हैं कि आप कहां से इसकी ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं.
हर साल बारिश हिमालय की सच्चाई सामने रख देती है. करोड़ों खर्च कर बनाई सड़कें और पुल कुछ घंटों की बारिश में ढह जाते हैं. असली समस्या सिर्फ मौसम नहीं, बल्कि हमारी लापरवाही और गलत प्लानिंग है. जब तक हम समझदारी और टिकाऊपन के साथ निर्माण नहीं करेंगे, तब तक पहाड़ हमारी महत्वाकांक्षाओं को बार-बार बहा ले जाएंगे. वक्त आ गया है नई सोच और नए नैतिक ढांचे की.
झांसी की बेटी सोनिया कुशवाहा ने पर्वतारोहण में एक बड़ा मुकाम हासिल किया है. 15 अगस्त को हिमाचल प्रदेश स्थित 20,219 फीट ऊंचे माउंट सिनकुन वेस्ट की चोटी पर पहुंचकर उन्होंने भारतीय तिरंगा फहराया.
ऑफिस के काम से ऊब गए हैं? क्यों न काम के साथ-साथ छुट्टियों का भी मजा लिया जाए? भारत में ऐसी कई खूबसूरत जगहें हैं, जहां आप प्रकृति के बीच बैठकर काम कर सकते हैं.
अगर आपको रोमांच का चस्का है और पहाड़ों पर घूमने का शौक है, तो भारत के ये 7 शानदार पहाड़ी रास्ते आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर होने चाहिए. हर रास्ते का सफर थोड़ा मुश्किल है, लेकिन ये किसी कहानी की किताब से कम नहीं है.
धराली की आपदा हमें बताती है कि नदी की बनावट और भू-कटाव का विज्ञान कितना महत्वपूर्ण है. कॉनवेक्स साइड पर ज्यादा दबाव और कटाव ने तबाही मचाई, जबकि कॉनकेव साइड ने प्राकृतिक सुरक्षा दी. 54 करोड़ साल पुरानी ढीली मिट्टी, जलवायु परिवर्तन और मानवीय गलतियों ने मिलकर इस संकट को गहरा किया.
हिमालय के ऊंचे पहाड़ों में बसा लद्दाख, जो कभी प्राचीन सिल्क रूट का हिस्सा था. जलवायु परिवर्तन के कारण लद्दाख में याकों की संख्या कमी आ रही है. याकों को को चराना, दूध दुहना और ऊन इकट्ठा करना लद्दाख के लोगों की जीवनशैली का हिस्सा है. तेज़ी से पिघलते ग्लेशियर, अनियमित बारिश और पहाड़ों पर घटती बर्फ से चरवाहों और उनके पशुओं, दोनों पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है.
सोलो ट्रिप आपको खुद से मिलने, अपनी ताकत को पहचानने और दुनिया को अपनी शर्तों पर खोजने का मौका देती है. आखिर, अकेले घूमना क्यों इतना जरूरी है? यह एक ऐसा सवाल है, जिसका जवाब हर यात्री को खुद तलाशना चाहिए.
मंडी जिले के गोहर इलाके में बादल फटने की चार घटनाएं हुई हैं, जिनमें कई घरों को नुकसान पहुंचा है. कई लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया, लेकिन अब भी 10 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं. धर्मपुर इलाके में भी बादल फटने के बाद छह घर सैलाब में समा गए.
26 मई को इंसान की पकड़ से इतिहास फिसल गया था, जब साथी पर्वतारोही चार्ल्स इवांस और टॉम बॉर्डिलन चोटी के 300 फीट करीब पहुंच गए थे, लेकिन थकावट और खराब डिवाइस की वजह से उन्हें वापस लौटने पर मजबूर होना पड़ा.