काजू (Cashew) एक लोकप्रिय ड्राई फ्रूट है, जिसका इस्तेमाल भारत में मिठाइयों, नमकीन, सब्जियों और कई तरह के व्यंजनों में किया जाता है. काजू का वैज्ञानिक नाम Anacardium Occidentale है. यह एनाकार्डिएसी (Anacardiaceae) परिवार का पौधा है. काजू मूल रूप से उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों का पौधा माना जाता है.
काजू के पेड़ पर फल के नीचे एक कठोर खोल के अंदर काजू की गिरी होती है. काजू का बाहरी हिस्सा काफी सख्त होता है और इसे सीधे नहीं खाया जाता. इसके खोल को विशेष प्रक्रिया से हटाने के बाद अंदर से काजू की गिरी प्राप्त होती है. काजू के फल के ऊपर बनने वाले हिस्से को काजू सेब कहा जाता है.
काजू की उत्पत्ति ब्राजील से मानी जाती है. पुर्तगाली व्यापारी इसे 16वीं शताब्दी में भारत समेत दुनिया के दूसरे उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में लेकर आए थे. भारत में काजू की खेती अब कई राज्यों में की जाती है.
भारत में काजू उत्पादन वाले प्रमुख राज्यों में महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, गोवा और पश्चिम बंगाल शामिल हैं. काजू के पेड़ गर्म और नम जलवायु में अच्छी तरह बढ़ते हैं. इसकी खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है.
काजू की खेती मुख्य रूप से इसके बीज यानी काजू की गिरी के लिए की जाती है. कच्चे काजू को पेड़ से प्राप्त करने के बाद उसकी सफाई, सुखाने, भूनने और खोल हटाने जैसी कई प्रक्रियाओं से गुजारा जाता है. इसके बाद काजू बाजार में बिक्री के लिए तैयार होता है.
खाद्य पदार्थों के अलावा काजू का इस्तेमाल काजू पेस्ट, काजू बटर और कई प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों में भी किया जाता है. काजू का उपयोग मिठाइयों और भारतीय पकवानों में सजावट तथा ग्रेवी को गाढ़ा करने के लिए भी किया जाता है.
भारत काजू के उत्पादन के साथ-साथ इसके प्रसंस्करण और निर्यात के लिए भी जाना जाता है. काजू उद्योग में खेती, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और व्यापार से जुड़े बड़ी संख्या में लोग काम करते हैं. काजू की कीमत उसकी गुणवत्ता, आकार, किस्म और बाजार की मांग के आधार पर अलग-अलग हो सकती है.
लखनवी गोल समोसा एक शाही और क्रिस्पी स्नैक है, जिसे गेहूं के आटे, सूजी और ड्राई फ्रूट्स युक्त आलू-मटर मसाले से तैयार किया जाता है. पोटली के आकार में बना यह गोल समोसा शाम की चाय का मजा दोगुना कर देता है, इसे चाट स्टाइल में दही-चटनी के साथ भी परोसा जा सकता है. आइए आपको इसे बनाने का आसान तरीका बताते हैं.
सावन और रक्षाबंधन के लिए लोग घरों में मिठाइयां बनाना शुरू कर देते हैं और इस लिस्टे में आप गुलाब-नारियल की बर्फी को भी शामिल कर सकते हैं. खाना खाने के बाद मीठे की क्रेविंग्स मिटाने के लिए घर पर बिना मिलावट की टेस्टी रोज कोकोनट बर्फी बना सकते हैं. इसे सिर्फ 15-20 मिनट में आसानी से तैयार किया जा सकता है. आइए आपको इसे बनाने का तरीका बताते हैं.
Sawan First Monday 2026: अगर आप भी सावन के पहले सोमवार के लिए कुछ मीठा बनाना चाहते हैं तो यहां हम आपको मूंगफली की झटपट बनने वाली मिठाई की रेसिपी बता रहे हैं. इसे आप बनाकर लंबे समय के लिए स्टोर कर सकते हैं.
सावन की शुरुआत हो चुकी है. इस मौके पर कई लोग सोमवार का व्रत रखते हैं और भगवान शिव को तरह-तरह के भोग चढ़ाते हैं. अगर आप भी व्रत-त्योहार के लिए बाजार से मिठाई लाने का सोच रहे हैं तो रुक जाइए. यहां हम आपको घर पर ही शुद्ध पिस्ता कतली बनाने की रेसिपी सिखा रहे हैं.
Matar Makhana Sabji: अगर आप भी रोज एक जैसी दाल या सब्जी खाकर थक चुके हैं तो यहां हम आपको शादी वाली मटर-मखाने की सब्जी की रेसिपी बता रहे हैं. लेकिन खास बात है कि इसके लिए आपको किसी क्रीम, बटर या फिर काजू की जरूरत नहीं है.
राजस्थान की राजधानी जयपुर का मशहूर टूरिस्ट डेस्टिनेशन 'चोखी ढाणी' इस वक्त एक बेहद चौंकाने वाली खबर को लेकर सुर्खियों में है. अपनी पारंपरिक राजस्थानी मेहमाननवाजी और लजीज खाने के लिए देश-विदेश में मशहूर इस रिसॉर्ट-होटल पर राजस्थान सरकार की फूड सेफ्टी टीम ने एक बड़ा छापा मारा है.