भीमराव रामजी आंबेडकर (B R Ambedkar) एक महान अर्थशास्त्री, न्यायविद, समाज सुधारक और नेता थे. उन्होंने भारत के संविधान का मसौदा तैयार करने वाली समिति की अध्यक्षता की थी. अंबेडकर ने जवाहरलाल नेहरू की पहली कैबिनेट में कानून और न्याय मंत्री के रूप में कार्य किया. बाद में उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया और हिंदू धर्म त्यागने के बाद दलित बौद्ध आंदोलन को प्रेरित किया.
उनका जन्म 14 अप्रैल 1891 को ब्रिटिश भारत के महू में हुआ था. बॉम्बे विश्वविद्यालय के एलफिंस्टन कॉलेज से स्नातक होने के बाद, अंबेडकर ने कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में अर्थशास्त्र का अध्ययन किया. डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की और 1920 के दशक में दोनों संस्थानों में ऐसा करने वाले मुट्ठी भर भारतीय छात्रों में से एक थे.
उन्होंने लंदन के ग्रेज इन में कानून की भी ट्रेनिंग ली. अपने शुरुआती करियर में वे अर्थशास्त्री, प्रोफेसर और वकील रहे. बाद के जीवनकाल में वे राजनीतिक गतिविधियों में शामिल हुए. वे विभाजन के लिए अभियान और वार्ता में शामिल हो गए, पत्रिकाओं का प्रकाशन किया, दलितों के लिए राजनीतिक अधिकारों और सामाजिक स्वतंत्रता की वकालत की और भारत राज्य की स्थापना में योगदान दिया.
आंबेडकर की पहली पत्नी रमाबाई की 1935 में लंबी बीमारी के बाद मृत्यु हो गई (Bhimrao Ambedkar's first wife).
1940 के दशक के अंत में भारत के संविधान का मसौदा तैयार करने के बाद, आंबेडकर को नींद की कमी, पैरों में न्यूरोपैथिक दर्द की शिकायत थी और वे इंसुलिन और होम्योपैथिक दवाएं ले रहे थे. वे इलाज के लिए बॉम्बे गए और वहां उनकी मुलाकात शारदा कबीर से हुई, जिनसे उन्होंने 15 अप्रैल 1948 को नई दिल्ली में अपने घर पर उनसे शादी कर ली. उन्होंने सविता आंबेडकर नाम अपनाया और जीवन भर उनकी देखभाल की.
भीमराव आंबेडकर जून से अक्टूबर 1954 तक बिस्तर पर रहे. 1955 के दौरान उनका स्वास्थ्य खराब हो गया. अपनी अंतिम पांडुलिपि 'द बुद्ध एंड हिज धम्म' को पूरा करने के तीन दिन बाद, 6 दिसंबर 1956 को दिल्ली में अपने घर पर आंबेडकर की नींद में ही मृत्यु हो गई.
सविता आंबेडकर का 29 मई 2003 को मुंबई में 93 वर्ष की आयु में निधन हो गया. उन्हें 'माई' भी कहा जाता था.
भारत में बुद्ध केवल एक धार्मिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि दलित चेतना और सामाजिक प्रतिवाद के सबसे बड़े प्रतीक भी हैं. डॉ. अंबेडकर के प्रभाव से शुरू हुई यह वैचारिक क्रांति आज करोड़ों लोगों के लिए आत्म-सम्मान, तर्क और जाति-मुक्त पहचान का आधार बन चुकी है. मान्यता है कि ये हिंदू रूढ़िवाद के सामने एक सशक्त विकल्प पेश करती है.
गाजियाबाद के लोनी में आंबेडकर प्रतिमा तोड़े जाने से बवाल जैसी स्थित पैदा हो गई. घटना के बाद सैकड़ों लोगों ने हाईवे जाम कर दिया. इलाके में पुलिस बल तैनात है.
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भीमराव आंबेडकर की 135वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए सामाजिक न्याय के उनके सपनों को साकार करने का संकल्प दोहराया. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के मार्गदर्शन में दिल्ली सरकार दलितों, पिछड़ों और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए काम कर रही है.
दलित समुदाय के बीच सामाजिक और राजनीतिक चेतना जगाने वाले संविधान निर्माता डा. भीमराव आंबेडकर की 135वीं जयंती है. आंबेडकर की जयंती के बहाने सपा से लेकर बीजेपी, कांग्रेस और बसपा तक दलित वोट बैंक को साधने की कवायद में है, लेकिन सवाल यही है कि क्या दलित समाज का विश्वास जीतने का यही मंत्र है?
उत्तर प्रदेश में 22 फीसदी दलित वोटर सत्ता का खेल बनाने और बिगाड़ने की ताकत रखता है, जिसे साधने के लिए सपा से लेकर बीजेपी तक हर दांव आजमा रही है. अखिलेश यादव पीडीए समीकरण के जरिए सत्ता में आने के लिए बेताब हैं तो बीजेपी ने दलित प्रेरणा स्थल और दलित मसीहा आंबेडकर के जरिए काउंटर करने की रणनीति बनाई है.
केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल खट्टर के बयान पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने निशाना साधा है. अनुराग ढांडा ने खट्टर से तुरंत माफी मांगने की मांग है.
लालू यादव आंबेडकर के अपमान के मुद्दे पर घिरने लगे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार दौरे में सवाल उठाया है, जबकि प्रशांत किशोर केवल राहुल गांधी को चुनौती दे रहे हैं - क्या प्रशांत किशोर को बिहार की जातीय राजनीति में फंस जाने का डर सता रहा है?
आकाश आनंद की बीएसपी में वापसी मायावती के भरोसे का मजबूत इशारा है, लेकिन नई जिम्मेदारी उनके लिए अग्नि परीक्षा भी है. मायावती ने आकाश आनंद को बीएसपी के भविष्य की उम्मीदों के साथ जोड़ा है. सवाल अब भी यही है कि क्या आकाश आनंद परमानेंट हो गये हैं या प्रोबेशन पर ही हैं?
सपा ने बयान जारी करते हुए कहा है कि 'हम अपने सभी समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रेम, स्नेह, समर्पण के लिए उनकी भावनाओं का हृदय से आभार प्रकट करते हैं, साथ ही ये अति संवेदनशील अपील भी करते हैं कि भावना में बहकर कभी भी किसी पार्टी नेता की तुलना या समकक्षता किसी भी दिव्य और पूजनीय महापुरुष या महाव्यक्तित्व से किसी भी संदर्भ में नहीं करें.'
समाजवादी पार्टी के दफ्तर के सामने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव का एक पोस्टर लगाया गया है, जिसमें उन्हें बाबा साहेब अंबेडकर की तस्वीर के साथ दिखाया है. इस पोस्टर में आधा चेहरा बाबा साहेब अंबेडकर और आधा चेहरा अखिलेश यादव का है. इस पोस्टर पर बवाल मच गया है.
अखिलेश यादव की एक फोटो को लेकर सियासत गरमा गई है. बाबा साहेब अंबेडकर के साथ एडिट की गई इस फोटो पर बीजेपी और बीएसपी दोनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. मायावती ने कहा कि ये बाबा साहेब का अपमान है और बसपा सड़कों पर उतर सकती है. वहीं, बीजेपी नेताओं ने अखिलेश से माफी की मांग की है.
अखिलेश यादव पर बीजेपी एक बार फिर हमलावर है. मायावती ने भी अखिलेश के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. और इसकी वजह है एक फोटो, जिसमें बाबा साहेब के चेहरे के साथ अखिलेश यादव के चेहरे को मिलाकर दिखाया गया है.
भारत के अगले चीफ जस्टिस बनने जा रहे जस्टिस बी आर गवई ने संविधान सभा के सदस्य के.एम. जेधे के भाषण का भी हवाला दिया, जिन्होंने बताया था कि अनुसूचित जातियों के नेता के रूप में अंबेडकर की स्थिति के कारण, कुछ लोगों ने संविधान को "भीमस्मृति" कहा था.
कंगना रनौत ने कहा कि हम आज यहां बाबा भीम राव आंबेडकर को याद करने के लिए इकट्ठा हुए हैं. वह देश के अमूल्य रत्न हैं. किसी ने अगर आंबेडकर का सम्मान किया है तो वह बीजेपी है. कांग्रेस ने भ्रम फैलाया कि हम संविधान को बदल देंगे, आरक्षण खत्म कर देंगे. अब हम सत्ता में हैं तो क्या हमने संविधान बदल दिया? किसी का आरक्षण छीना?
आंबेडकर जयंती पर सियासी वार-पलटवार देखने को मिला. पीएम मोदी ने कांग्रेस पर संविधान और बाबा साहेब आंबेडकर के अपमान का आरोप लगाते हुए हमले किए. इसी कड़ी में मौजूदा वक्फ विवाद पर भी पीएम ने बयान दिया. ऐसे में सवाल है कि क्या बीजेपी और विपक्ष के बीच अब आंबेडकर के राजनैतिक-सामाजिक मूल्यों की विरासत पर कब्जे की जंग छिड़ी है? देखें दंगल.
अंबेडकर ने अपने शोध में इस तथ्य को बहुत मजबूती से रखा कि शूद्र मूल रूप से आर्य सौर जाति (सोलर रेस) का हिस्सा थे. वे प्राचीन इंडो-आर्यन समाज में क्षत्रिय वर्ण में शामिल थे, जो योद्धा वर्ग के रूप में जाना जाता था. अंबेडकर के अनुसार, एक समय ऐसा था जब आर्य समाज में केवल तीन वर्ण थे- ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य. उस समय शूद्र एक अलग वर्ण नहीं थे, बल्कि क्षत्रिय वर्ण का हिस्सा थे.
बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर की जयंती पर सियासी दलों में खुद को उनकी लकीर का फकीर साबित करने की होड़ मची है लेकिन उनका अपना परिवार कहा हैं? आंबेडकर की सियासी विरासत की दावेदारी में उनका अपना परिवार क्यों पिछड़ गया?
आज बाबा साहेब अंबेडकर की जयंती है और इस मौके पर अंबेडकर के बहाने सियासी बयानबाजी हो रही है. हिसार की एक सभा से पीएम मोदी ने कांग्रेस और विपक्ष पर संविधान से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया तो खड़गे और अखिलेश यादव के भी हमले हुए.
अंबेडकर जयंती पर यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने दिया बड़ा बयान. उन्होंने कहा कि भारत में शरियत नहीं, संविधान चलेगा. मंत्री ने कहा कि अंबेडकर का मिशन था गरीब बच्चों को शिक्षा देकर आगे बढ़ाना. उन्होंने कहा कि सरकार गरीब मुसलमानों को भी अनाज, मकान और इलाज दे रही है.
अरविंद केजरीवाल ने बाबा साहेब अंबेडकर और शहीद-ए-आजम भगत सिंह को पार्टी का आदर्श बताया और उनके जीवन संघर्ष से प्रेरणा लेने और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प व्यक्त किया. केजरीवाल ने कहा कि वर्तमान राजनीति में कई पार्टियों और नेताओं द्वारा बाबा साहब को श्रद्धांजलि देने के नाम पर बस दिखावा करती है.
अंबेडकर जयंती पर लखनऊ के हजरतगंज चौराहे पर राजनीतिक दलों की सक्रियता देखी गई. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अंबेडकर प्रतिमा पर माल्यार्पण किया. बसपा, कांग्रेस सहित अन्य दल भी दलित वोट बैंक को आकर्षित करने की कोशिश में दिखे। 2027 के चुनाव में दलित-पिछड़ा वोट बैंक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.