हिंदू पंचांग में अमावस्या (Amavasya) का दिन विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है. यह दिन उस समय को दर्शाता है जब चंद्रमा आकाश में पूरी तरह से अदृश्य हो जाता है, और रात का अंधकार अपने चरम पर होता है. लेकिन इस गहरे अंधकार में भी श्रद्धा, साधना और आत्मचिंतन का उजाला छिपा होता है.
अमावस्या को पितरों को समर्पित दिन माना जाता है. इस दिन लोग तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं. मान्यता है कि इस दिन किए गए कर्म पूर्वजों तक अवश्य पहुंचते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है.
कुछ विशेष अमावस्या तिथियों में सत्यनारायण अमावस्या, महालय अमावस्या (पितृपक्ष की अंतिम तिथि), माघ अमावस्या (गंगा स्नान और दान के लिए प्रसिद्ध), और आषाढ़ी अमावस्या (गुरु पूजा का विशेष महत्व) शामिल है.
अमावस्या के दिन नदियों, विशेषकर गंगा, यमुना, नर्मदा, गोदावरी आदि में स्नान करना पुण्यदायी माना जाता है. साथ ही दान, विशेष रूप से अन्न, वस्त्र और तिल, करने से पापों का क्षय होता है और आत्मा को शांति मिलती है.
चूंकि अमावस्या पर ऊर्जा का प्रभाव गहरा होता है, यह दिन साधना, ध्यान और आत्ममंथन के लिए श्रेष्ठ माना गया है. तांत्रिक साधनाओं और मंत्र सिद्धि के लिए भी यह रात विशेष होती है.
अंधकार के प्रतीक इस दिन पर दीपदान करना अज्ञान और भय को दूर करने का प्रतीक माना जाता है. कुछ लोग इस दिन हनुमान जी की विशेष पूजा करते हैं, ताकि नकारात्मक शक्तियों से रक्षा हो.
दिवाली 2026 में 8 नवंबर, रविवार को मनाई जाएगी. नई दिल्ली में लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:54 से रात 7:50 बजे तक रहेगा. अलग-अलग शहरों में पूजा का मुहूर्त भिन्न हो सकता है. वीडियो में जानें अमावस्या तिथि, प्रदोष काल, लक्ष्मी-गणेश पूजा का महत्व और दीपावली मनाने की धार्मिक मान्यता.
Sarva Pitru Amavasya 2026: सर्वपितृ अमावस्या पितरों को याद करने और उनकी आत्मा की शांति के लिए बेहद खास मानी जाती है. मत्स्य पुराण में अच्छोदा से जुड़ी एक पौराणिक कथा का भी जिक्र मिलता है. आइए, जानते हैं अच्छोदा की इस कथा के बारे में.
Sarva Pitru Amavasya Shubh Muhurat: इस वर्ष सर्वपितृ अमावस्या 2026 कल यानि 10 अक्टूबर को मनाई जाएगी. यहां जानें श्राद्ध-तर्पण का शुभ मुहूर्त और पितरों का श्राद्ध करने का सही तरीका.
Sarva Pitru Amavasya 2026: सर्व पितृ अमावस्या पितृपक्ष का अंतिम दिन होता है. इस दिन धरती पर आए पितरों को याद कर उन्हें विदाई दी जाती है. पितृ पक्ष में अगर आपने पूर्वजों का तर्पण, श्राद्ध नहीं किया है तो सर्व पितृ अमवास्या पर तिलांजलि कर उन्हें सम्मानपूर्वक विदा करें. इस दिन दान करने से अमोघ फल प्राप्त होता, हर बड़ी परेशानी का अंत हो जाता है. ये पितरों को मनाने का आखिरी मौका होता है.
Sarvapitri Amavasya 2026: सर्व पितृ अमावस्या 10 अक्टूबर अक्टूबर 2026 को है. सर्व पितृ अमावस्या पितृपक्ष का अंतिम दिन होता है. इस दिन धरती पर आए पितरों को याद कर उन्हें विदाई दी जाती है. पितृ पक्ष में अगर आपने पूर्वजों का तर्पण, श्राद्ध नहीं किया है तो सर्व पितृ अमवास्या पर तिलांजलि कर उन्हें सम्मानपूर्वक विदा करें. इस दिन दान करने से अमोघ फल प्राप्त होता, हर बड़ी परेशानी का अंत हो जाता है. ये पितरों को मनाने का आखिरी मौका है.
पितृ पक्ष 2026 की शुरुआत 27 सितंबर से प्रतिपदा श्राद्ध के साथ होगी और 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या पर इसका समापन होगा. इस दौरान पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में दान-पुण्य और सात्विक जीवन का विशेष महत्व है. तर्पण के समय दिशा, मुहूर्त और पूजा सामग्री से जुड़े नियमों का ध्यान रखना भी जरूरी माना जाता है.
पितृ पक्ष 2026 की शुरुआत को लेकर इस बार तारीख को लेकर भ्रम है. 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध किया जाएगा, जबकि प्रतिपदा से मुख्य श्राद्ध तिथियों का क्रम 27 सितंबर से शुरू होगा. इसके बाद अलग-अलग तिथियों के अनुसार श्राद्ध कर्म होंगे और 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ पितृ पक्ष का समापन होगा. जिन पूर्वजों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है, उनके लिए सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध की परंपरा है
Pithori Amavasya 2026 Date: पिठोरी अमावस्या भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाई जाने वाली एक अत्यंत पवित्र अमावस्या है. इसकी तिथि को लेकर लोगों के मन में काफी कंफ्यूजन है. तो आइए जानते हैं इसकी तिथि.
Pithori Amavasya 2026: द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल भादो कृष्ण अमावस्या की तिथि 10 सितंबर को सुबह 10:33 बजे से लेकर 11 सितंबर को सुबह 8:56 बजे तक रहने वाली है. ऐसे में पिठोरी अमावस्या 10 सितंबर को मनाई जाएगी.
Ashadh Amavasya 2026: आज आषाढ़ अमावस्या 2026 का पावन दिन है, जो पितरों की पूजा और तर्पण के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दिन गंगा स्नान, दान और धार्मिक अनुष्ठान करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, तर्पण का सही तरीका और कौन से उपाय आपके जीवन में सुख-समृद्धि ला सकते हैं.
इस साल आषाढ़ अमावस्या 13 जुलाई 2026 को शाम 6:49 बजे से लेकर 14 जुलाई 2026 को दोपहर 3:12 बजे तक रहेगी. ऐसे में आषाढ़ अमावस्या 14 जुलाई को मान्य है. ज्योतिषचार्य प्रवीण मिश्र के अनुसार, इस दिन तीन गलतियां कभी नहीं करनी चाहिए.
Ashadha Amavasya 2026: 14 जुलाई को आषाढ़ अमावस्या है. आषाढ़ अमावस्या पर सूर्य और चंद्रमा मिथुन राशि में एकसाथ मौजूद रहेंगे. अगले ही दिन यानी 15 जुलाई को देवगुरु बृहस्पति भी अस्त होने वाले हैं. यह दुर्लभ संयोग तीन राशियों के लिए अशुभ माना जा रहा है.
14 जुलाई को गुरु और चंद्रमा की युति से कर्क राशि में गजकेसरी योग बनने जा रहा है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह योग 16 जुलाई तक प्रभावी रहेगा और कुछ राशियों के लिए शुभ माना गया है. इस दौरान धन, करियर, कारोबार और आर्थिक प्रगति से जुड़े सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना व्यक्त की गई है. यह मान्यता व्यक्तिगत विश्वास और ज्योतिषीय परंपराओं पर आधारित है.
Ashadh Amavasya 2026: हिंदू धर्म में आषाढ़ अमावस्या बहुत ही विशेष मानी जाती है. इस दिन भगवान शिव की पूजा करना बहुत ही महत्वपूर्ण कहलाता है. साथ ही, यह दिन स्नान-दान के लिए भी महत्वपूर्ण है.
14 जुलाई को आषाढ़ अमावस्या है और इसी दिन कर्क राशि में गजकेसरी योग बनने वाला है. ज्योतिषविदों का कहना है कि यह गजकेसरी योग मेष, कर्क, सिंह और धनु राशि के जातकों के लिए शुभ संकेत लेकर आ रहा है.
पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि की शुरुआत 13 जुलाई 2026 को शाम 6 बजकर 50 मिनट पर होगी और इसका समापन 14 जुलाई को दोपहर 3 बजकर 14 मिनट पर होगा. उदया तिथि के आधार पर 14 जुलाई को ही आषाढ़ अमावस्या का व्रत, स्नान, दान और पितृ तर्पण करना शुभ माना जाएगा.
Adhik Maas Purnima: 31 मई 2026 को अधिक मास पूर्णिमा पर रवि योग का महासंयोग बन रहा है. इस शुभ दिन पर धन लाभ और सुख-समृद्धि के लिए किए जाने वाले विशेष ज्योतिषीय उपाय और टोटके जानें, जो आपकी पैसों की तंगी और कंगाली को हमेशा के लिए दूर कर सकते हैं.
सनातन परंपरा में ऋतु के अनुसार, भगवान को ताजे फलों का भोग लगाने की सदियों पुरानी रीत है. इसी रीत को निभाते हुए एकादशी के दिन 2500 किलो तरबूज का भोग लगाया गया था. वहीं आज देवों को प्रसन्न करने के लिए अनोखा 'मैंगो अन्नकूट' सजाया गया.
16 मई को शनिश्चरी अमावस्या है. इसके ठीक अगले दिन यानी 17 मई को शनि देव रेवती नक्षत्र में प्रवेश करने वाले हैं. इस नक्षत्र में शनि 9 अक्टूबर तक रहेंगे. ज्योतिषविदों ने इस दुर्लभ संयोग को चार राशियों के लिए शुभ बताया है.
Vaishakh Amavasya 2026: वैशाख अमावस्या हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है. यह दिन पितरों पूर्वजों को समर्पित होता है. हर महीने अमावस्या आती है, लेकिन वैशाख महीने की अमावस्या का महत्व थोड़ा अधिक माना जाता है, क्योंकि इस समय किए गए पूजा-पाठ और दान का विशेष फल मिलता है.
Amavasya April 2026: वैशाख अमावस्या हिंदू पंचांग के वैशाख महीने में आने वाली अमावस्या है जब चंद्रमा दिखाई नहीं देता. इसे धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दिन लोग पितरों की शांति के लिए तर्पण दान पूजा और स्नान करते हैं और उपवास भी रखते हैं.