Mauni Amavasya 2026: माघ माह में आने वाली अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है. यह पवित्र तिथि दान, स्नान, तर्पण और पितरों की आत्मा की शांति के लिए शुभ मानी गई है. इस दिन लोग पवित्र नदियों के घाट पर जाकर स्नान करते हैं. पितरों का तर्पण करते हैं और सामर्थ्य के अनुसार, दान-दक्षिणा देते हैं. जनवरी माह में मौनी अमावस्या आने वाली है, जो कि साल की पहली अमावस्या भी है. हालांकि इसकी तिथि को लेकर लोगों में बहुत कन्फ्यूजन है. कोई 18 जनवरी तो कोई 19 जनवरी को मौनी अमावस्या बता रहा है. आइए सही तिथि जानते हैं.
कब है मौनी अमावस्या?
वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 18 जनवरी को रात 12 बजकर 03 मिनट से शुरू होगी. और इस तिथि का समापन 19 जनवरी को रात 01 बजकर 21 मिनट पर होगा. उदया तिथि के आधार पर मौनी अमावस्या का पर्व 18 जनवरी 2026 दिन रविवार को मनाई जाएगी.
मौनी अमावस्या पर दान-स्नान का शुभ मुहू्र्त
इस बार मौनी अमावस्या पर पूजा के लिए दो शुभ मुहूर्त रहने वाले हैं. सबसे पहले सुबह 4 बजकर 43 मिनट से लेकर 5 बजकर 23 मिनट तक ब्रह्म मुहूर्त रहने वाला है. इस शुभ मुहूर्त में आप दान-स्नान से जुड़े कार्य कर सकते हैं. फिर दोपहर 3 बजकर 44 मिनट से लेकर अगले दिन सुबह तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा. इस शुभ घड़ी में आप पूजा-पाठ आदि कर सकते हैं.
मौनी अमावस्या की पूजन विधि
मौनी अमावस्या के दिन सवेरे ब्रह्म मुहूर्त में जल्दी उठकर दैनिक क्रियाएं पूरी कर लें. फिर किसी पवित्र नदी में स्नान करें. खासतौर से गंगा नदी में स्नान करना श्रेष्ठ मान जाता है. यदि नदी में स्नान संभव न हो तो घर में ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर लें. स्नान के बाद भगवान विष्णु का स्मरण करें. इसके बाद सृष्टि के पालनकर्ता श्रीहरि विष्णु की विधिवत पूजा करें और तुलसी माता की तीन बार परिक्रमा लगाएं. अंत में अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, धन या वस्त्र का दान करें.
मौनी अमावस्या पर किए जाने वाले विशेष उपाय
1. मौनी अमावस्या पर पितरों का तर्पण करें और फिर पीली चीजों का दान करें. पीले वस्त्र, हल्दी, केसर, पीले कपड़े, केले या गुड़ का दान कर सकते हैं.
2. घर के मुख्य द्वार पर हल्दी मिले जल का छिड़काव करें और चौखट की अच्छी तरह सफाई करें. यहां सुबह-शाम सरसों के तेल का दीपक भी जलाएंय
3. मौनी अमावस्या के दिन भगवान विष्णु की उपासना के साथ-साथ पीपल वृक्ष का पूजन करना भी विशेष पुण्यदायी माना गया है.