अकाल तख्त (Akal Takht) सिखों के पांच तख्तों में से एक है. यह अमृतसर में दरबार साहिब (स्वर्ण मंदिर) परिसर में स्थित है. अकाल तख्त का निर्माण गुरु हरगोबिंद ने न्याय और लौकिक मुद्दों पर विचार करने के स्थान के रूप में किया था. यह खालसा के सांसारिक अधिकार की सर्वोच्च सीट और सिखों के सर्वोच्च प्रवक्ता जत्थेदार का स्थान है.
2015 में कुछ सिख संगठनों द्वारा आयोजित सरबत खालसा के बीच और जत्थेदार की स्थिति शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के बीच विवादित है. इसने 2023 में ज्ञानी रघुबीर सिंह को कार्यवाहक जत्थेदार नियुक्त किया था.
जगतार सिंह हवारा की राजनीतिक कैद के कारण, सरबत खालसा द्वारा ध्यान सिंह मंड को कार्यवाहक जत्थेदार नियुक्त किया गया था. हालांकि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने इसके अधिकार को स्वीकार करने से इनकार कर दिया.
अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने पंजाब सरकार को 10 दिन का अल्टीमेटम दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि मोहाली और चंडीगढ़ से सिख धार्मिक संस्थाओं के खिलाफ सोशल मीडिया अभियान चलाया जा रहा है. हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में कोई सार्वजनिक सबूत पेश नहीं किया गया है.
पंजाब विधानसभा में जिस कानून को सत्ता और विपक्ष ने सर्वसम्मति से पास किया था. अब वही कानून मान सरकार के लिए सबसे बड़ा सियासी और धार्मिक इम्तिहान बन गया है. श्री अकाल तख्त साहिब में हुई पेशी के दौरान सरकार से एक के बाद एक तीखे सवाल पूछे गए. मुख्यमंत्री भगवंत मान के पुराने बयानों पर जवाब मांगा गया. कानून बनाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया गया. इस पूरी कार्रवाई के दौरान हैरान करने वाली बात ये पता चली कि विधानसभा के अंदर जिस बिल के समर्थन में विधायकों ने हाथ उठाया था उसे उन्होने पढ़ा तक नहीं था.
पंजाब सरकार के मंत्रियों सहित सभी दलों के सिख विधायक सोमवार को अकाल तख्त के सामने पेश हुए. अकाल तख्त ने सरकार को एक महीने का अल्टीमेटम दिया है.
पंजाब में सीएम भगवंत मान के कथित वीडियो को लेकर अकाल तख्त सख्त है. जहां भगवंत मान की पेशी का वीडियो जारी किया गया है...जिसमें पंजाब के मुख्यमंत्री सफाई देते नजर आ रहे हैं.. बुलेटिन में देखें पूरी खबर.
अकाल तख्त की ओर से भगवंत मान को 'गुरु विरोधी' और 'खालसा पंथ विरोधी' करार दिए जाने के बाद सियासी और धार्मिक गलियारों में घमासान तेज हो गया है. एक तरफ मुख्यमंत्री भगवंत मान इस पूरे विवाद को अपने खिलाफ चलाया जा रहा राजनीतिक प्रोपेगेंडा बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ SGPC और विपक्षी दल अकाल तख्त के फैसले को सर्वोपरि बताते हुए मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.
पंजाब के सीएम भगवंत मान को लेकर एक कथित वीडियो वायरल हो रहा है, जिस पर श्री अकाल तख्त ने सख्त फैसला सुना है. अब सीएम ने कहा कि वीडियो में जो शख्स दिखाई दे रहा है वह मैं नहीं हूं. मैं हैरान हूं कि पंथ के इतने बड़े ओहदे पर बैठे लोग सियासी मोहरे की तरह काम कर रहे हैं.
वायरल वीडियो को लेकर उठे विवाद पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सफाई दी है. उन्होंने कहा कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति वह नहीं हैं. अकाल तख्त के फैसले के बाद मामले ने राजनीतिक और धार्मिक चर्चा को तेज कर दिया है. विवाद से जुड़े तथ्यों और दावों पर अंतिम स्थिति संबंधित प्रक्रियाओं और आधिकारिक निष्कर्षों के बाद ही स्पष्ट होगी.
जिस वीडियो को लेकर महीनों से सियासी और धार्मिक घमासान मचा हुआ था, अब उसी वीडियो की फॉरेंसिक रिपोर्ट ने पंजाब की राजनीति में नया भूचाल ला दिया है. श्री अकाल तख्त साहिब ने दो फॉरेंसिक लैब्स की रिपोर्ट के आधार पर दावा किया है कि वायरल वीडियो के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं हुई और ना ही AI से तैयार किया गया था. इसके बाद अकाल तख्त ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को न सिर्फ धार्मिक तौर पर दोषी ठहराया है, बल्कि उन्हें 'गुरुद्रोही' और 'खालसा पंथ विरोधी' भी करार दे दिया.
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख्त ने 'गुरु दोखी' और 'खालसा पंथ विरोधी' बताया है. तख्त ने नए बेअदबी कानून को लेकर पंजाब मंत्रिमंडल और सभी सिख विधायकों को तलब किया है.
पंजाब की राजनीति और सिख समुदाय से जुड़े एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में अकाल तख्त ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. एक कथित वीडियो विवाद और उससे जुड़े आरोपों के बीच यह निर्णय सामने आया है. साथ ही बेअदबी विरोधी कानून को लेकर भी अकाल तख्त ने पंजाब के सिख विधायकों और मंत्रिमंडल को तलब किया है, जिससे इस मुद्दे पर चर्चा और तेज हो गई है.
AAP ने 2022 के विधानसभा चुनावों में सिख वोट बैंक को मजबूत करके जीत हासिल की थी, लेकिन अब यह समन उसकी धार्मिक संवेदनशीलता पर सवाल उठा सकता है. राजनीतिक रूप से, यह शिरोमणि अकाली दल (SAD) और कांग्रेस के लिए AAP को सिख-विरोधी करार देने का मौका देता है.
अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार कुलदीप सिंह ने गंभीर पंथिक ममलों पर स्पष्टीकरण देने के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को तलब किया है. जत्थेदार ने स्पष्ट किया कि 'पतित' होने के नाते मान को अकाल तख्त की दीवार के सामने पेश नहीं किया जा सकता, इसलिए उन्हें सचिवालय में स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है.
श्री अकाल तख्त साहिब और तख्त श्री पटना साहिब के बीच जत्थेदार की नियुक्ति को लेकर विवाद छिड़ गया है. जिसके बाद तख्त श्री पटना साहिब के पंच प्यारों ने अकाली प्रधान सुखबीर बादल को गुरुद्वारे में पेश होने का आदेश दिया. साथ ही तख्त की तरफ से दो जत्थेदारों को भी तनखैया घोषित किया. देखें पंजाब आजतक.
आदेश को स्वीकार करते हुए धामी ने सजा पूरी की. धामी ने स्वर्ण मंदिर की सामुदायिक रसोई में बर्तन साफ किए, भक्तों को भोजन परोसा और भक्तों के जूते पॉलिश किए. 16 दिसंबर को, धामी पंजाब राज्य महिला आयोग के सामने पेश हुए थे और पूर्व एसजीपीसी प्रमुख बीबी जागीर कौर के खिलाफ अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांगी.
अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने यह आदेश अकाल तख्त के 'फसील' (मंच) से सुनाया. इसके साथ ही उन्होंने शिरोमणि अकाली दल (SAD) की कार्यसमिति से सुखबीर बादल से पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा लेने की मांग की और छह महीने के भीतर SAD अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों के चुनाव के लिए समिति बनाने का निर्देश दिया.
पंजाब के पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल ने आज से अगले दो दिनों के लिए अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में सेवा शुरू कर दी. साथ में उनके गले में तनखैया यानी दोषी होने की तख्ती लटकी हुई थी. धार्मिक कदाचार के लिए अकाल तख्त ने उन्हें ये सजा दी है. इससे पहले कई नेताओं समेत महाराजा रणजीत सिंह को भी अकाल तख्त सजा दे चुका है.
सुखबीर बादल सजा के दरम्यान अपने गले में दोषी होने की तख्ती पहनकर सेवादारी करेंगे. वे श्री दरबार साहिब में बने लंगर हॉल में एक घंटे तक बर्तन साफ करेंगे. एक घंटे तक गुरबाणी सुनेंगे.