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पंजाब CM भगवंत मान पर लगा बेअदबी का आरोप, अकाल तख्त ने बताया पंथ विरोधी

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख्त ने 'गुरु दोखी' और 'खालसा पंथ विरोधी' बताया है. तख्त ने नए बेअदबी कानून को लेकर पंजाब मंत्रिमंडल और सभी सिख विधायकों को तलब किया है.

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान. (Photo: PTI)
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान. (Photo: PTI)

सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था 'अकाल तख्त' ने सोमवार को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को 'गुरु दोखी' और 'खालसा पंथ विरोधी' घोषित कर दिया. न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक अकाल तख्त ने यह फैसला उस कथित आपत्तिजनक वीडियो को लेकर लिया, जिसके संबंध में मुख्यमंत्री पर झूठ बोलने का आरोप लगाया गया है. अकाल तख्त सिखों की सर्वोच्च सांसारिक (टेम्पोरल) पीठ मानी जाती है.

अकाल तख्त ने इसके साथ ही पंजाब के सभी सिख विधायकों, चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े हों, और पंजाब मंत्रिमंडल को भी 29 जून को अकाल तख्त के समक्ष पेश होने के लिए तलब किया है. यह समन राज्य सरकार द्वारा बनाए गए बेअदबी विरोधी कानून के संबंध में जारी किया गया है. अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने अमृतसर में 'पांच सिंह साहिबानों' की बैठक के बाद अकाल तख्त की फसील (मंच) से यह आदेश सुनाया.

भगवंत मान पर 'गुरु की गोलक' (गुरुद्वारे के दान पात्र) पर आपत्तिजनक टिप्पणी, सिख गुरुओं के अपमान का आरोप है. ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने दावा किया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित वह वीडियो, जिसमें एक व्यक्ति मुख्यमंत्री भगवंत मान जैसा दिखाई देता है, दो फोरेंसिक लैब की जांच में प्रामाणिक पाया गया है. उन्होंने कहा कि वीडियो के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की गई और न ही यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार किया गया है. गर्गज ने बताया कि जनवरी में अकाल तख्त सचिवालय ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर वीडियो की जांच के संबंध में संपर्क किया था. 

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उस समय भगवंत मान ने स्वयं कहा था कि वह वीडियो की फोरेंसिक जांच के लिए तैयार हैं. हालांकि, सचिवालय को उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला. इसके बाद अकाल तख्त सचिवालय ने वीडियो की दो अलग-अलग लैब से जांच करवाई. ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने कहा, 'मुख्यमंत्री का पद सम्मानजनक होता है, लेकिन भगवंत सिंह मान ने अकाल तख्त के समक्ष वीडियो के मामले में झूठ बोला.' उन्होंने कहा कि पांच सिंह साहिबानों ने सर्वसम्मति से मुख्यमंत्री को 'गुरु दोखी' और 'खालसा पंथ विरोधी' घोषित किया है.

बेअदबी विरोधी कानून के मुद्दे पर अकाल तख्त के जत्थेदार ने कहा कि 'जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026' के संबंध में सभी सिख विधायक और पंजाब मंत्रिमंडल को 29 जून को अकाल तख्त के समक्ष उपस्थित होना होगा. इससे पहले अकाल तख्त और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) इस कानून पर आपत्ति जता चुके हैं. उनका कहना है कि यह कानून सिख पंथ से पर्याप्त परामर्श किए बिना बनाया गया है. अकाल तख्त ने राज्य सरकार से यह भी कहा था कि अधिनियम की उन धाराओं को हटाया जाए जो गुरु ग्रंथ साहिब, खालसा पंथ और संगत की भावनाओं के खिलाफ हैं.

बता दें कि 13 अप्रैल 2026 को पंजाब विधानसभा ने 'जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक, 2026' को सर्वसम्मति से पारित किया था. इस कानून में गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने वालों के लिए आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान किया गया है. हालांकि अकाल तख्त के फैसले से ठीक पहले आम आदमी पार्टी (AAP) के पंजाब मीडिया प्रभारी बलतेज सिंह पन्नू ने कहा कि जिन फोरेंसिक रिपोर्टों का हवाला दिया जा रहा है, उनमें यह स्पष्ट नहीं किया गया कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति वास्तव में कौन है. पन्नू ने यह भी आरोप लगाया कि ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज राजनीतिक हो गए हैं और उन्होंने एक पक्ष चुन लिया है. उन्होंने कहा, 'अकाल तख्त साहिब पूरे सिख समुदाय का है. यह न तो शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल का है और न ही अकाली दल का.'

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