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भारत के बाद सोमालिया ने भी किया WhatsApp Username का किया विरोध, Meta की बढ़ी टेंशन

वॉट्सऐप के अपकमिंग यूजरनेम फीचर पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. भारत के बाद अब सोमालिया भी इस फीचर के खिलाफ आ गया है. फिलहाल भारत में मेटा को जवाब देने के लिए कुछ दिनों की और मोहलत मिल गई है.

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वॉट्सऐप के यूजरेम फीचर पर क्यों मचा है बवाल
वॉट्सऐप के यूजरेम फीचर पर क्यों मचा है बवाल

WhatsApp का यूजरनेम फीचर लगातार विवादों में बना हुआ है. भारत सरकार ने पहले ही वॉट्सऐप की पेरेंट कंपनी Meta को नोटिस भेजकर इस फीचर को फिलहाल भारत में लॉन्च नहीं करने को कहा था.

अब सोमालिया ने भी भारत का समर्थन करते हुए इसी तरह की चिंता जताई है. सोमालिया का कहना है कि अगर वॉट्सऐप पर मोबाइल नंबर की जगह सिर्फ यूजरनेम से लोगों से कॉन्टैक्ट किया जा सकेगा, तो क्रिमिनल्स की पहचान करना पहले के मुकाबले मुश्किल हो सकता है. 

यूजरनेम पर मचा है बवाल

वॉट्सऐप ने कुछ दिन पहले यूजरनेम रिजर्व करने की सुविधा शुरू की थी. इस फीचर के बाद यूजर अपना एक यूनिक यूजरनेम चुन सकेंगे. जब यह फीचर पूरी तरह शुरू होगा, तब किसी नए व्यक्ति से बात करने के लिए मोबाइल नंबर शेयर करना जरूरी नहीं होगा.

यह भी पढ़ें: WhatsApp यूजरनेम फीचर पर मचा बवाल, सकार ने बढ़ाई मोहलत, अब मेटा के पास 9 जुलाई तक का टाइम

सामने वाले के पास आपका सही यूजरनेम होगा, तो वह आपसे चैट शुरू कर सकेगा. मेटा का कहना है कि इसका मकसद लोगों की प्राइवेसी बढ़ाना है ताकि हर बार मोबाइल नंबर शेयर करने की जरूरत न पड़े.

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लेकिन भारत सरकार का कहना है कि अगर मोबाइल नंबर लोगों को दिखाई नहीं देगा, तो साइबर ठग फर्जी यूजरनेम बनाकर लोगों को आसानी से धोखा दे सकते हैं. कोई भी बैंक, सरकारी विभाग या किसी मशहूर व्यक्ति से मिलता-जुलता यूजरनेम बनाकर लोगों को अपने जाल में फंसा सकता है.

इसी वजह से सरकार ने मेटा से कहा है कि जब तक बातचीत पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस फीचर को भारत में रोल आउट न किया जाए. 

भारत को सोमालिया का मिला साथ

अब इसी मामले में सोमालिया भी भारत के साथ खड़ा हो गया है. वहां की सरकार का भी मानना है कि यूजरनेम सिस्टम से मैसेज भेजने वाले की शुरुआती पहचान कमजोर हो सकती है. इससे जांच एजेंसियों के लिए भी शुरुआती स्तर पर संदिग्ध अकाउंट तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है. यही वजह है कि यह मुद्दा अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रह गया है. 

यह भी पढ़ें: WhatsApp Username पर आमने-सामने भारत सरकार और मेटा, जानें पूरा विवाद

इस बीच मेटा ने भारत सरकार से जवाब देने के लिए एक्स्ट्रा समय मांगा है. पहले कंपनी को तीन दिन के अंदर जवाब देना था, लेकिन अब सरकार ने उसे तीन दिन और दिए हैं.

मेटा ने सरकार से मांगी और महोलत

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रिपोर्ट्स के मुताबिक अब मेट को 9 जुलाई तक यह बताना होगा कि यूजरनेम फीचर कैसे काम करेगा, इससे जुड़े सेफ्टी इंतजाम क्या होंगे और फर्जी अकाउंट या साइबर फ्रॉड को रोकने के लिए कंपनी क्या कदम उठाएगी. तब तक भारत में यह फीचर लॉन्च नहीं किया जाएगा. 

मेटा का कहना है कि यूजरनेम फीचर में कई सुरक्षा लेयर पहले से जोड़ी गई हैं. कंपनी के मुताबिक हर यूजरनेम यूनिक होगा. मशहूर लोगों, सरकारी संस्थानों और बड़े पब्लिक फिगर्स के नाम पहले से सुरक्षित रखे जाएंगे ताकि कोई उनकी पहचान का गलत इस्तेमाल न कर सके.

इसके अलावा कंपनी ने यह भी कहा है कि यूजरनेम जान लेने भर से कोई भी लगातार मैसेज नहीं भेज पाएगा और स्पैम रोकने के लिए अलग सुरक्षा सिस्टम भी रहेगा.  हालांकि सरकार सिर्फ वॉट्सऐप तक सीमित नहीं है. हाल ही में टेलीग्राम और सिग्नल को भी इसी तरह के नोटिस भेजे गए हैं. सरकार इन सभी प्लेटफॉर्म से यह जानना चाहती है कि बिना मोबाइल नंबर दिखाए बातचीत करने वाले फीचर्स में यूजर्स की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई कैसे आसान बनी रहेगी. 

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