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सुप्रीम कोर्ट में WhatsApp का यू-टर्न, अब आपकी मंजूरी के बिना मेटा से डेटा शेयर नहीं होगा

यूजर डेटा शेयरिंग को लेकर WhatsApp को सुप्रीम कोर्ट के आगे झुकना पड़ा. कंपनी की तरफ से कहा गया है कि वो CCI के निर्देशों का पालन करेगी. दरअसल ये मामला WhatsApp का डेटा पेरेंट कंपनी मेटा के साथ शेयरिंग को लेकर है.

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सुप्रीम कोर्ट Meta को लेकर हुआ सख्त. (File Photo)
सुप्रीम कोर्ट Meta को लेकर हुआ सख्त. (File Photo)

WhatsApp और उसकी पैरेंट कंपनी Meta को भारत में यूजर डेटा शेयरिंग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कहा कि वो निर्देशों का पालन करेगी.

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉय माल्य बागची की बेंच को WhatsApp ने बताया कि अब वह दूसरी मेटा कंपनियों के साथ यूजर का डेटा शेयर करने से पहले उसकी साफ सहमति लेगा.

कंपनी ने कहा कि वह भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के निर्देशों का पालन करेगी. वॉट्सऐप ने कोर्ट को यह भी बताया कि वह डेटा शेयरिंग को लेकर सहमति आधारित ढांचा लागू करेगा.  

यह ढांचा राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण के निर्देशों के मुताबिक होगा. इसका मतलब यह है कि आगे से यूजर तय करेगा कि उसका डेटा थर्ड पार्टी के साथ शेयर किया जाए या नहीं. कंपनी ने इस बारे में कोर्ट में हलफनामा भी दाखिल कर दिया है.

सुनवाई के दौरान मेटा और वॉट्सऐप ने यह भी कहा कि वे एनसीएलएटी (NCALT) के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने की मांग वाली अपनी याचिका वापस ले रहे हैं.

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16 मार्च तक WhatsApp करेगी निर्देशों का पालन

कंपनी ने भरोसा दिलाया कि वह 16 मार्च तक एनसीएलएटी के निर्देशों का पालन कर देगी. इसके साथ ही वॉट्सऐप ने कहा कि वह इस पूरे पालन से जुड़ी रिपोर्ट भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग में भी जमा करेगा.

हालांकि, मेटा और वॉट्सऐप ने एनसीएलएटी (NCALT) के फैसले को चुनौती देने वाली अपनी याचिका वापस नहीं ली है. यह याचिका अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.

एनसीएलएटी ने पहले भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की ओर से मेटा पर लगाए गए 213.14 करोड़ रुपये के जुर्माने को सही ठहराया था. इस जुर्माने को लेकर मेटा ने सुप्रीम कोर्ट में अपील कर रखी है.

यह मामला साल 2021 की व्हाट्सऐप प्राइवेसी पॉलिसी से जुड़ा है, जिसमें डेटा शेयरिंग को लेकर विवाद हुआ था. भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने जांच के बाद मेटा पर जुर्माना लगाया था.

अब कोर्ट में दिए गए आश्वासन के बाद माना जा रहा है कि भारत में WhatsApp यूजर्स को डेटा पर ज्यादा कंट्रोल मिलेगा. इससे यूजर्स को यह तय करने का अधिकार मिलेगा कि उनका डेटा मेटा की दूसरी कंपनियों के साथ शेयर हो या नहीं.

WhatsApp के इस कदम को डेटा प्राइवेसी के लिहाज से अहम माना जा रहा है. लंबे समय से यूजर्स यह सवाल उठा रहे थे कि उनका डेटा कैसे और किसके साथ शेयर होता है. कोर्ट के निर्देशों और कंपनी के नए आश्वासन के बाद अब भारत में डेटा शेयरिंग को लेकर नियम और सख्त होने की उम्मीद है.

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क्या है पूरा विवाद

WhatsApp और उसकी पैरेंट कंपनी मेटा के डेटा शेयरिंग प्रैक्टिस को लेकर भारत की सुप्रीम कोर्ट में एक लंबा विवाद चल रहा है. यह मामला 2021 में WhatsApp की प्राइवेसी पॉलिसी से जुड़ा है, जब कंपनी ने यूजर डेटा शेयरिंग के नियमों को बदला था.

इसी पर भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने 213.14 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था, जिसे WhatsApp और मेटा चुनौती दे रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट अब तक इस मामले में कई दिन सुनवाई कर चुका है. 3 फरवरी की सुनवाई में न्यायालय ने व्हाट्सएप और मेटा दोनों पर कड़ी चेतावनी दी थी कि नागरिकों की निजता से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा और डेटा शेयरिंग के नाम पर उनका अधिकार छेडऩे नहीं दिया जाएगा.

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि तकनीक या बिज़नेस मॉडल का बहाना बनाकर यूजर्स के डेटा का इस्तेमाल नहीं हो सकता.

 

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