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व्हाइट हाउस में AI का महाजमावड़ा, मस्क से सुंदर पिचाई तक पहुंचे दिग्गज, ट्रंप के साथ क्या होने वाला है?

आए दिन आप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बेकाबू होने की खबरें पढ़ रहे हैं. अमेरिका में इस वक्त इसे लेकर बड़ी बैठक चल रही है. व्हाइट हाउस में अमेरिकी प्रेसिडेंट ट्रंप के साथ अमेरिका के बडे़ टेक दिग्गज शामिल हैं. लिस्ट में भारतीय मूल के तो कई बड़े सीईओ हैं, लेकिन भारत की AI कंपनियों का कोई प्रतिनिधित्व नहीं दिखता है. आइए जानते हैं इस बड़े AI जमावड़े का मुद्दा क्या है.

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America.gov लॉन्च के दौरान डोनाल्ड ट्रंप (Photo: Getty/AFP)
America.gov लॉन्च के दौरान डोनाल्ड ट्रंप (Photo: Getty/AFP)

अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर आज एक ऐसी बैठक हो रही है, जिस पर पूरी दुनिया की नजर है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और हाउस स्पीकर माइक जॉनसन ने टेक्नोलॉजी की दुनिया के कई बड़े नामों को व्हाइट हाउस में एक साथ बुलाया है. बैठक में Elon Musk, Microsoft के सीईओ Satya Nadella, Google के सीईओ Sundar Pichai, Meta के Mark Zuckerberg, Nvidia के Jensen Huang और Anthropic के Dario Amodei जैसे नाम शामिल हैं.

यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब AI पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा ताकतवर हो चुका है. AI एजेंट अब सिर्फ सवालों के जवाब नहीं देते, बल्कि खुद वेबसाइट खोल सकते हैं, कंप्यूटर पर काम कर सकते हैं और कई काम बिना हर कदम पर इंसान की मंजूरी के पूरा कर सकते हैं. हाल में ऐसे मामलों की खबरें भी सामने आई हैं, जिनमें AI एजेंट ने तय सीमा से आगे जाकर सिस्टम को एक्सेस करने की कोशिश की. इसी वजह से AI की रफ्तार और उसकी सुरक्षा को लेकर बहस तेज हुई है.

एक कमरे में टेक दुनिया के सबसे बड़े नाम

Axios की रिपोर्ट के मुताबिक व्हाइट हाउस में होने वाली इस बैठक के लिए 31 लोगों की पुष्टि हुई है. इनमें टेक कंपनियों के बड़े अधिकारी और अमेरिकी सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं. सूची में एलॉन मस्क, ऐमेजॉन के जेफ बेजोस, माइक्रोसॉफ्ट के सत्य नडेला, पैलो अल्टो नेटवर्क के निकेशन अरोड़ा जैसे नाम शामिल हैं.  

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इसके अलावा Meta, Nvidia, Google और Anthropic के प्रमुख भी बैठक में शामिल होने वाले हैं. OpenAI की तरफ से उसके अध्यक्ष ग्रेग ब्रॉकमैन मौजूद रहेंगे, जबकि कंपनी के सीईओ सैम ऑल्टमैन अपनी कंपनी के सालाना सम्मेलन के कारण सैन फ्रांसिस्को में हैं.

अमेरिकी सरकार की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, कॉमर्स सेक्रेटरी हावर्ड ल्यूट्निक Lutnick, NASA एडमिनिस्ट्रेटर जेरेड आइसैकमैन और नेशनल साइंस एडवाइजर माइकल क्रैटसिओस समेत कई अधिकारी बैठक में मौजूद रहेंगे.

AI को कितनी आजादी मिले?

इस बैठक का सबसे बड़ा मुद्दा AI की रफ्तार रोकना नहीं, बल्कि इनोवेशन और सेफ्टी के बीच संतुलन बनाना है. हाउस स्पीकर माइक जॉनसन ने कहा है कि अमेरिका को AI में चीन से आगे रहना है, लेकिन इसके साथ सुरक्षा और ट्रांसपेरेंसी भी जरूरी है. उन्होंने बहुत ज्यादा रेगुलेशन से बचने की बात भी कही है.

दूसरी तरफ AI को लेकर चिंता भी लगातार बढ़ रही है. Reuters-Ipsos के 17 से 20 सितंबर के बीच किए गए सर्वे में 73 प्रतिशत अमेरिकी लोगों ने कहा कि उन्हें चिंता है कि AI कंपनियां AI से होने वाले गंभीर नुकसान को रोकने के लिए पर्याप्त काम नहीं कर रही हैं. इसी सर्वे में 55 प्रतिशत लोगों ने AI डेवेलपमेंट की रफ्तार धीमी करने का समर्थन किया.

यही वजह है कि व्हाइट हाउस की यह बैठक सिर्फ भविष्य की टेक्नोलॉजी की चर्चा नहीं है. सवाल यह भी है कि अगर AI किसी दिन ऐसा काम करता है जिसकी उसके बनाने वालों ने कल्पना नहीं की थी, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?

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Rogue AI की घटनाओं ने बढ़ाई चिंता

इस बैठक के पीछे एक और बड़ा कारण हाल की घटनाएं हैं. Reuters के मुताबिक OpenAI और Anthropic ने ऐसे मामलों की जानकारी दी है जिनमें उनके AI एजेंट बिना निर्देश के दूसरे सिस्टम में घुसने या उन्हें हैक करने जैसी गतिविधियों में शामिल हुए. इन घटनाओं ने AI की ऑटोनॉमी को लेकर चिंता बढ़ा दी है.

Washington Post ने भी बताया है कि हाल के मामलों में AI एजेंट ने सरकारी वेबसाइटों की जांच की है. इसके बाद अमेरिका में यह सवाल ज्यादा गंभीर हो गया है कि AI को काम करने की आजादी देते समय उसके लिए कौन-सी सीमाएं तय की जानी चाहिए.

Anthropic के सीईओ Dario Amodei भी हाल में AI के खतरों को लेकर चेतावनी दे चुके हैं. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कहा था कि अगर AI को ठीक तरीके से मैनेज नहीं किया गया तो यह पूरी मानवता के लिए जोखिम बन सकता है.

लेकिन टेक इंडस्ट्री इस मुद्दे पर एकमत नहीं है. कुछ लोग AI डेवेलपमेंट की रफ्तार कम करने और ज्यादा सेफ्टी चेक्स की बात कर रहे हैं, जबकि दूसरे नेताओं का मानना है कि कंपनियों को खुद अपने AI सिस्टम की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए और डेवेलपमेंट को रोकना नहीं चाहिए.

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ट्रंप का फोकस AI रोकने पर नहीं, आगे बढ़ने पर

डोनाल्ड ट्रंप का रुख AI को लेकर काफी साफ रहा है. उनका जोर अमेरिका को AI की ग्लोबल रेस में आगे रखने पर है. वह AI को लेकर लगाए जा रहे कुछ गंभीर खतरों को खारिज कर चुके हैं और रेगुलेशन को इनोवेशन के रास्ते में बाधा बनने से रोकने की बात करते रहे हैं.

इसी दिन अमेरिका एक नया AI-पावर्ड सरकारी पोर्टल America.gov भी पेश कर रहा है. इसका मकसद लोगों को सरकारी सेवाओं और जानकारी तक AI के जरिए पहुंच देना है. शुरुआती स्तर पर यह अलग-अलग सरकारी वेबसाइटों से जानकारी खोजने में मदद करेगा और आगे चलकर मेडिकेयर जैसी सरकारी सेवाओं में एनरॉलमेंट और पासपोर्ट रिन्वूल जैसे कामों में भी मदद करने की योजना है.

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