बीते एक दशक में भारतीय स्मार्टफोन बाजार ने बहुत ग्रोथ की है. हालांकि, अगर आप बाजार में किसी भारतीय ब्रांड को खोजने निकलेंगे, तो आपके हाथ सिर्फ एक या दो ब्रांड्स लगेंगे. उसमें भी अगर किसी ऐसे ब्रांड को तलाश रहे हैं, जो लंबे समय से इस मार्केट में एक्टिव हो, तो लावा (Lava) एक मात्र विकल्प बन जाता है.
लावा भारतीय बाजार में लगातार स्मार्टफोन्स को लॉन्च कर रहा है. कंपनी ने कुछ साल पहले अपनी स्ट्रैटजी में बदलाव किया और अब मार्केट में अपनी स्थिति को काफी मजबूत कर चुकी है. हालांकि, अभी भी लावा मोबाइल्स उस स्थिति में नहीं है, जिसमें चीनी ब्रांड्स हैं. कंपनी सस्ते 5जी फोन्स के जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों को लुभाने में लगी हुई है.
लावा इंटरनेशनल के सेल्स ऑपरेशन हेड कमल मल्होत्रा ने बताया कि स्मार्टफोन खरीदते समय कंज्यूमर आज भी डिवाइस को हाथ में लेकर देखने, कैमरा टेस्ट करने, स्क्रीन की ब्राइटनेस चेक करने और तुरंत फोन एक्टिवेट कराने को प्रायोरिटी देते हैं. यही वजह है कि ऑफलाइन रिटेल स्मार्टफोन इंडस्ट्री का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.
कमल मल्होत्रा की मानें तो पिछले एक साल में लावा की ऑफलाइन स्मार्टफोन बिक्री में 49 परेसंट की ग्रोथ हुई है. इसकी बड़ी वजह मजबूत रिटेल नेटवर्क, पार्टनर्स का भरोसा और एक भारतीय ब्रांड के रूप में क्रेडिबिलिटी है.
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उन्होंने बताया कि लावा फिलहाल देशभर के 1.10 लाख से अधिक रिटेल आउटलेट्स तक पहुंच रखता है. कंपनी 13,000 से ज्यादा पिन कोड्स तक सीधे डिस्ट्रीब्यूशन करती है, जो देश के कुल पिन कोड नेटवर्क का लगभग 66 परसेंट हिस्सा है.
Lava का प्लान स्मार्टफोन सेल्स को दोगुना करने का है. कंपनी 20,000 रुपये से कम कीमत वाले सेगमेंट में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना चाहती है. कमल मल्होत्रा का कहना है कि एंट्री-लेवल स्मार्टफोन बाजार में Lava की मजबूत पकड़ है और अब कंपनी इसी आधार पर मिड-रेंज सेगमेंट में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहती है.
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कंपनी की मानें, तो छोटे शहर और कस्बे फ्यूचर स्मार्टफोन मार्केट की ग्रोथ का सबसे बड़ा सोर्स बनेंगे. कंपनी एग्जीक्यूटिव ने बताया कि टीयर-2, टीयर-3 और उससे नीचे के मार्केट में सेल्स लगातार बढ़ रही है. इसे देखते हुए लावा ने 2026 में अपनी स्मार्टफोन रिटेल डिस्ट्रीब्यूशन को 100 परसेंट तक बढ़ाने की योजना बनाई है.
कंपनी रिटेल ब्रांडिंग, डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और रिटेलर एंगेजमेंट पर बड़ा इन्वेस्टमेंट करेगी. कमल का कहना है कि लावा की सबसे बड़ी ताकत उसका भारतीय आर एंड डी और मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम है. कंपनी भारतीय ग्राहकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर प्रोडक्ट डिजाइन करती है. कई ब्रांड अपने एक्सपीरियंस सेंटर और एक्सक्लूसिव स्टोर्स खोल रहे हैं, लेकिन लावा फिलहाल इस दिशा में आगे नहीं बढ़ रही.