दिल्ली में नकली मोबाइल और एक्सेसरी बेचने वाले एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है. दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने करोल बाग और मोती नगर में छापेमारी कर ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो Realme, OPPO और OnePlus जैसे बड़े ब्रांड्स के नाम पर नकली सामान बेच रहा था.
पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है और कई गोदाम व एक फैक्ट्री सील की गई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह सिर्फ छोटे स्तर का नकली माल बेचने वाला मामला नहीं था.
फैक्ट्री से लेकर गोदाम तक सील
पुलिस को यहां पूरा सेटअप मिला, जहां चीन से बिना ब्रांडिंग वाले मोबाइल एक्सेसरी मंगाए जाते थे. बाद में उन पर बड़े ब्रांड्स के लोगो लगाए जाते थे और उन्हें बिल्कुल ओरिजिनल पैकिंग जैसा बनाकर बाजार में बेचा जाता था.
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छापेमारी के दौरान पुलिस ने करोल बाग के दो गोदाम और मोती नगर की एक फैक्ट्री सील की. यहां नकली पैकेजिंग बॉक्स छापने के लिए मशीनें लगी थीं. पुलिस को इयरबड्स, चार्जर्स, केबल्स, एडेपटर्स, इयरफोन्स और पैकेजिंग मटेरियल का बड़ा स्टॉक मिला. बताया जा रहा है कि 10 हजार से ज्यादा नकली प्रोडक्ट बरामद हुए हैं.
दिलचस्प बात यह है कि इन नकली प्रोडक्ट्स की पैकिंग इतनी असली जैसी थी कि आम कसमर्स के लिए पहचानना मुश्किल हो सकता था.
पुलिस के मुताबिक, प्रोडक्ट्स पर ब्रांडिंग करने के लिए अलग मशीनें इस्तेमाल हो रही थीं और फर्जी बॉक्स भी लगभग ओरिजिनल जैसे बनाए जा रहे थे. OPPO, OnePlus और Realme कंपनी की तरफ से लोगों ने भी मौके पर पहुंचकर वेरिफाई किया कि सामान नकली था.
असली के नाम पर बेचे नकली फोन
पुलिस का कहना है कि आरोपी इन नकली सामानों को ओरिजनल या ड्यूटी फ्री बताकर बेच रहे थे. यानी कस्टमर्स को कम कीमत में असली प्रोडक्ट जैसा दिखने वाला सामान दिया जा रहा था. कई बार लोग सस्ता समझकर ऐसे प्रोडक्ट खरीद लेते हैं, लेकिन बाद में यही डिवाइस फोन खराब करने या हादसे की वजह बन सकते हैं.
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असल चिंता सिर्फ नकली ब्रांडिंग नहीं है. नकली चार्जर्स और एडेप्टर्स सबसे ज्यादा खतरनाक माने जाते हैं. इनमें अक्सर सही सेफ्टी सर्किट नहीं होता. ऐसे में फोन ओवरहीटिंग, बैटरी डैमेज या यहां तक कि आग लगने का खतरा भी बढ़ जाता है. पिछले कुछ सालों में भारत में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां लोकल या नकली चार्जर की वजह से फोन फटने या शॉर्ट सर्किट की घटनाएं हुई हैं.
नकली ऐक्सेसरीज
करोल बाग लंबे समय से दिल्ली के ग्रे इलेक्ट्रॉनिक मार्केट हब के तौर पर जाना जाता है. यहां सस्ते गैजेट्स, रिफर्बिश्ड और इंपोर्टेड एकेस्सरीज बड़ी मात्रा में बिकते हैं. लेकिन इसी बाजार में नकली सामान का नेटवर्क भी तेजी से बढ़ा है. हाल के महीनों में पुलिस ने IMEI टैंपरिंग, फेक फोल्डेबल फोन्स और डुप्लिकेट ऐक्सेसरीज से जुड़े कई रैकेट पकड़े हैं.
अब सवाल यह है कि आम लोग नकली Realme, OPPO या OnePlus डिवाइस और एक्सेसरी को पहचानें कैसे?
सबसे पहले कीमत पर ध्यान देना जरूरी है. अगर कोई चार्जर, इयरबड्स या केबल बाजार कीमत से बहुत सस्ता मिल रहा है, तो शक होना चाहिए. कई बार लोग ओरिजनल कॉपी या इंपोर्टेड स्टॉक के नाम पर नकली सामान बेचते हैं.
नकली और असली फोन-ऐक्सेसरीज में ऐसे करें पहचान
दूसरी चीज पैकेजिंग है. नकली बॉक्स अक्सर पहली नजर में असली जैसे लगते हैं, लेकिन ध्यान से देखने पर प्रिंटिंग क्वॉलिटी, फॉन्ट, स्पेलिंग या QR कोड में फर्क दिख सकता है. कई बार होलोग्राम भी नकली होता है.
तीसरी बात वॉरंटी और बिल की है. असली प्रोडक्ट के साथ प्रॉपर जीएसटी बिल और ब्रांड वॉरंटी मिलती है. अगर दुकानदार सिर्फ कैश मांग रहा है और बिल देने से बच रहा है, तो सावधान रहने की जरूरत है.
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फोन खरीदते समय IMEI नंबर जरूर चेक करना चाहिए. फोन के बॉक्स और सेटिंग्स में IMEI एक जैसा होना चाहिए. लोग भारत सरकार के CEIR पोर्टल पर भी IMEI वेरिफाई कर सकते हैं.
इसके अलावा चार्जर या एडेप्टर खरीदते समय BIS सर्टिफिकेशन मार्क देखना जरूरी है. भारत में बिकने वाले सर्टिफाइड इलेक्ट्रॉनिक्स पर BIS मार्क होता है. नकली प्रोडक्ट में यह या तो नहीं होता या गलत तरीके से छापा जाता है.
सबसे सुरक्षित तरीका यही माना जाता है कि लोग ब्रांड स्टोर्स, ऑफिशियल वेबसाइट्स या ट्रस्टेड ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से ही खरीदारी करें. खासकर चार्जर, बैटरी और पावर ऐक्सेसरीज जैसी चीजों में सस्ता विकल्प कई बार भारी पड़ सकता है.
दिल्ली पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े बाकी लोगों की तलाश कर रही है. जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह सामान किन-किन बाजारों और राज्यों तक सप्लाई किया जा रहा था