Elon Musk की कंपनी SpaceX अब मोबाइल नेटवर्क की दुनिया में भी बड़ी एंट्री करने की तैयारी कर रही है. कंपनी की सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस Starlink को मोबाइल सर्विस से जोड़ने की योजना अब आगे बढ़ती दिख रही है. SpaceX ने अमेरिका में 800 MHz वायरलेस स्पेक्ट्रम खरीदने के लिए एक एग्रीमेंट किया है. इस खबर के सामने आते ही अमेरिका की बड़ी टेलीकॉम कंपनियों AT&T, Verizon और T-Mobile के शेयरों में गिरावट देखने को मिली. इन्वेस्टर्स को डर है कि आने वाले समय में Starlink Mobile इन कंपनियों को कड़ी टक्कर दे सकती है.
रिपोर्ट के मुताबिक, SpaceX ने इन्वेस्टमेंट कंपनी Grain Management से देशभर में इस्तेमाल होने वाले लो-बैंड वायरलेस स्पेक्ट्रम को खरीदने पर सहमति जताई है. इस डील को अभी अमेरिकी रेगुलेटर Federal Communications Commission (FCC) की मंजूरी मिलना बाकी है. अगर इसे मंजूरी मिल जाती है, तो यह SpaceX की मोबाइल सर्विस शुरू करने की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकता है.
AT&T, Verizon और T-Mobile के शेयर गिरे
SpaceX की इस अनाउंसमेंट के बाद अमेरिकी टेलीकॉम कंपनियों के शेयरों पर दबाव देखने को मिला. रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को बाजार खुलने से पहले AT&T के शेयर करीब 6.6% गिरकर 23 डॉलर पर आ गए. वहीं, Verizon के शेयरों में 7.23% की गिरावट आई और ये 43 डॉलर पर पहुंच गए. T-Mobile के शेयर भी 6.79% गिरकर 159.70 डॉलर पर आ गए.
दूसरी तरफ, SpaceX के शेयरों में तेजी देखने को मिली. शुरुआती कारोबार में कंपनी के शेयर करीब 3.6% चढ़कर 166.40 डॉलर पर पहुंच गए. शेयरों में इस उतार-चढ़ाव से साफ है कि निवेशक स्टारलिंक मोबाइल की संभावनाओं को गंभीरता से देख रहे हैं. शेयरों में गिरावट या तेजी का मतलब यह नहीं है कि पारंपरिक टेलीकॉम कंपनियों का कारोबार तुरंत प्रभावित होने वाला है.
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क्या है 800 MHz स्पेक्ट्रम और इससे क्या फायदा होगा?
स्पेक्ट्रम उन रेडियो फ्रीक्वेंसी का हिस्सा होता है, जिनकी मदद से मोबाइल नेटवर्क और वायरलेस कम्युनिकेशन काम करते हैं. 800 MHz जैसे लो-बैंड स्पेक्ट्रम की खासियत है कि इसका सिग्नल लंबी दूरी तक जा सकता है और दीवारों व इमारतों के अंदर भी बेहतर तरीके से पहुंच सकता है.
यही वजह है कि SpaceX इस स्पेक्ट्रम की मदद से स्टारलिंक मोबाइल की कवरेज बेहतर करना चाहती है. कंपनी के मुताबिक, इससे मोबाइल कनेक्टिविटी से जुड़ी एक बड़ी तकनीकी चुनौती को दूर करने में मदद मिल सकती है. अच्छी बात यह भी है कि मौजूदा कई स्मार्टफोन 800 MHz बैंड को सपोर्ट करते हैं.
इसका मतलब यह नहीं है कि हर फोन स्टारलिंक मोबाइल के साथ काम करेगा. इसके लिए डिवाइस की कंपैटिबिलिटी और सर्विस की शर्तें भी अहम होंगी. रिपोर्ट के मुताबिक, इस डील की कीमत का ऑफिशियल खुलासा नहीं किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक इसकी कीमत करीब 8 अरब डॉलर बताई गई है.
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क्या स्टारलिंक मोबाइल से बढ़ेगी टेलीकॉम कंपनियों की मुश्किल?
SpaceX की इस योजना से AT&T, Verizon और T-Mobile के सामने भविष्य में नई चुनौती खड़ी हो सकती है. लेकिन अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि स्टारलिंक मोबाइल इन कंपनियों की जगह ले लेगी. पारंपरिक टेलीकॉम कंपनियों के पास पहले से मोबाइल टावर और जमीन पर बना नेटवर्क है, जिसका इस्तेमाल शहरों और दूसरी जगहों पर कनेक्टिविटी देने के लिए होता है.
AT&T और Verizon के अधिकारियों ने भी पहले सैटेलाइट आधारित मोबाइल सर्विस की सीमाओं पर सवाल उठाए हैं. उनका मानना है कि खासकर शहरों में मजबूत मोबाइल नेटवर्क देना आसान नहीं होगा.
फिलहाल SpaceX को डील के लिए रेगुलेटरी मंजूरी और मोबाइल सर्विस से जुड़ी तकनीकी चुनौतियों पर काम करना होगा. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि स्टारलिंक मोबाइल पारंपरिक टेलीकॉम कंपनियों को कितनी कड़ी टक्कर देती है.