केंद्रीय कैबिनेट ने केरल का नाम बदलकर केरलम करने की मंजूरी दी है. यह बदलाव मलयालम भाषा में राज्य की असली पहचान को सामने रखता है. नाम परिवर्तन के पीछे पौराणिक कथाएं, ऐतिहासिक संदर्भ और भाषाई तर्क हैं. परशुराम की कथा से लेकर मौर्य सम्राट अशोक के शिलालेखों तक, केरल का नाम कई रूपों में सामने आता है.
1920 के दशक में मद्रास प्रेसीडेंसी में जस्टिस पार्टी ने पहली गैर-ब्राह्मण सरकार बनाई और सामाजिक न्याय के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए. उन्होंने सरकारी नौकरियों में आरक्षण की शुरुआत की और मंदिर प्रशासन में सुधार किए. डॉ. मुत्तुलक्ष्मी रेड्डी जैसे नेताओं ने महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष किया.
तमिलों की संस्कृति, भाषा और जमीन को लेकर आर्य-द्रविड़ विवाद की जड़ें 19वीं सदी के ब्रिटिश भारत में पादरी रॉबर्ट काल्डवेल की रिसर्च से जुड़ी हैं. काल्डवेल ने द्रविड़ भाषाओं को संस्कृत से अलग बताया, जिससे दक्षिण भारत में क्षेत्रीय गौरव बढ़ा लेकिन उत्तर भारतीय प्रभुत्व पर सवाल उठे.
तमिल संस्कृति में भक्ति आंदोलन ने शैव और वैष्णव संतों के माध्यम से आध्यात्मिक और सांस्कृतिक क्रांति लाई. आलवार और नायनमार जैसे संतों ने भजनों और कविताओं के जरिए समाज में प्रेम, भक्ति और आध्यात्मिकता को बढ़ावा दिया.
तमिलनाडु के इतिहास में जैन और बौद्ध दर्शन का गहरा प्रभाव था, लेकिन ये दर्शन जीवन में उत्साह और रंग की कमी के कारण नीरस हो गए थे. इस खालीपन को भरने के लिए नयनमार और आलवार संतों ने भक्ति आंदोलन की शुरुआत की, जिसने शिव और विष्णु की भक्ति को आम जनता तक पहुंचाया.
गाजियाबाद में तीन किशोर लड़कियों द्वारा नौवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या की घटना ने कोरियन टास्क-बेस्ड गेम्स की खतरनाक मानसिकता को उजागर किया है. ये गेम्स युवा पीढ़ी में बढ़ते तनाव, मानसिक दबाव और जीवन के लिए उनके उदासीन नजरिये को सामने रख रहे हैं.
कोटद्वार में कपड़े की दुकान के नाम में 'बाबा' शब्द को लेकर हिंदू संगठनों और मुस्लिम मालिकों के बीच विवाद हुआ. 'बाबा' शब्द का इतिहास फारसी मूल का है और यह विभिन्न संस्कृतियों में सम्मान और बुजुर्गों के लिए उपयोग होता रहा है. हिंदू, मुस्लिम और सूफी परंपराओं में इस शब्द का अलग-अलग धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है.
तमिल भाषा केवल एक भाषा नहीं, बल्कि तमिलों की सभ्यता और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है. इसकी उत्पत्ति को लेकर कई मिथक और व्याकरणीय प्रमाण मौजूद हैं, जिनमें संगम सभाओं, ऋषि अगस्त्य और भगवान शिव की भूमिका प्रमुख है.
दुनिया की नजर जब बड़ी लड़ाइयों पर टिकी होती है, ठीक उसी वक्त आतंकी संगठन परदे के पीछे अपना अगला कदम तय करते हैं. मौजूदा वैश्विक उथल-पुथल उनके लिए उपजाऊ जमीन बन सकती है और वे मजबूत हो सकते हैं, खासकर, तब, जबकि शक्तिशाली देश खुद में गुत्थमगुत्था हैं, और निगरानी घट चुकी.
डोनाल्ड ट्रंप भले ही मैडमैन थ्योरी को आजमाते हुए देशों को धमका रहे हों, लेकिन इसका असर उल्टा हो रहा है. उनके सताए हुए सारे देश एकजुट होने लगे. यूरोपियन यूनियन (ईयू) और भारत ने हाल में फ्री ट्रेड डील पर दस्तखत किए. इस बीच ये सवाल भी उठ रहा है कि क्या यूरोप और चीन भी करीब आ रहे हैं!
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने 13 जनवरी 2026 को नए नियम लागू किए हैं, जिनका उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव और असमानता को रोकना है. इन नियमों के तहत सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में इक्विटी कमेटी, इक्विटी स्क्वाड और हेल्पलाइन स्थापित करना अनिवार्य होगा. लेकिन इन नियमों पर विरोध क्यों हो रहे हैं?
विद्वान फ्रांसिस व्हाइट एलिस, रॉबर्ट कैल्डवेल और जीयू पोप तीनों विद्वानों ने तमिल और अन्य दक्षिण भारतीय भाषाओं को संस्कृत से अलग एक स्वतंत्र भाषा परिवार के रूप में स्थापित किया.
भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुआ समझौता केवल टैरिफ या सप्लाई चेन तक सीमित नहीं है, बल्कि सदियों पुराने भारत-यूरोप व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंधों की निरंतरता को दर्शाता है. इस ऐतिहासिक डील के पीछे भारत और यूरोप के बीच दो हजार साल पुराना व्यापारिक संबंध भी है.
ग्रीनलैंड के ग्लेशियर के भीतर बना कैंप सेंचुरी अपने समय का सबसे रहस्यमय और गुप्त ठिकाना था. बाहर की दुनिया को बताया गया कि यह परमाणु ऊर्जा से चलने वाला आर्कटिक रिसर्च सेंटर है, जहां वैज्ञानिक बर्फ पर स्टडी करेंगे. लेकिन असल में यह एक गुप्त सैन्य योजना का हिस्सा था, जिसका नाम था ऑपरेशन आइसवर्म.
मैडमैन थ्योरी एक रणनीति है, जिसमें नेता खुद को बेहद खतरनाक दिखाते हैं ताकि दुश्मन डर जाए और टकराव से पहले ही झुक जाए. अमेरिका के राष्ट्रपति समय-समय पर यह तरीका आजमाते रहे. अब डोनाल्ड ट्रंप को लेकर भी यही कहा जा रहा है. वे एक साथ कई देशों को कभी जंग, कभी टैरिफ के बहाने डरा रहे हैं.
जनवरी 2024 में डोनाल्ड ट्रंप ने बतौर अमेरिकी राष्ट्रपति दूसरा कार्यकाल शुरू किया. आने के साथ ही उन्होंने एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किया कि एक साल के भीतर यूएस विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से बाहर निकल जाएगा. मियाद पूरी हुई. अमेरिका अब डब्ल्यूएचओ से बाहर है. वो संयुक्त राष्ट्र (UN) के कई और संगठनों से हट चुका.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर हमास को धमकाया. स्विट्जरलैंड के दावोस में गाजा के लिए बनाए जा रहे बोर्ड ऑफ पीस में उन्होंने कहा कि हमास हथियार न डाले तो उसे खत्म कर दिया जाएगा. पिछले साल ट्रंप प्रशासन की कोशिश पर इजरायल और हमास के बीच जंग रुकी थी, लेकिन हमास अब भी गाजा पट्टी में सक्रिय है.
डोनाल्ड ट्रंप को ग्रीनलैंड चाहिए. क्यों? क्योंकि अगर उन्होंने ऐसा न किया तो चीन या रूस वहां काबिज हो जाएंगे. फिर अमेरिका की सुरक्षा तो खतरे में पड़ेगी ही, दुनिया को भी नुकसान झेलना पड़ सकता है. ट्रंप ने अपनी जिद के पीछे यही तर्क दिया. इधर ये दोनों देश खुद पर इतने बड़े लांछन के बाद भी चुप रहे, और बोले भी तो विरोध उतना बुलंद नहीं.
ग्रीनलैंड में आजादी की मांग दशकों से चल रही है. फिलहाल यह द्वीप देश डेनमार्क के अधीन अर्ध स्वायत्त तरीके से काम करता है. मतलब घरेलू मामलों को ग्रीनलैंडर्स देखते हैं, लेकिन फॉरेन पॉलिसी और रक्षा विभाग डेनमार्क सरकार के पास हैं. अब कयास लग रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की जिद के बीच वहां अलगाववाद को और हवा मिलेगी.
जल्द ही भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच एक समझौता हो सकता है. दोनों ही देश एक-दूसरे के यहां डिजिटल एंबेसी खोलेंगे. यह आम दूतावास से बिल्कुल अलग होगा, जहां खुफिया कागजात से लेकर सरकारी बैंकों के भी दस्तावेज रखे जा सकते हैं.
शंकराचार्य पद की वैधता पर लंबे समय से विवाद चल रहा है, जो 1941 से शुरू हुआ था. इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के बीच मामला अटका हुआ है। इस विवाद ने धार्मिक और राजनीतिक स्तर पर गहरा असर डाला है, और माघ मेला प्रशासन ने स्वामी को नोटिस जारी किया है.