वैभव सूर्यवंशी के बल्ले ने दुनिया को हैरान किया है. इतनी कम उम्र में जिस तरह उन्होंने टी20 क्रिकेट में गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाईं, उसके बाद उनसे उम्मीदें भी आसमान पर पहुंच गई हैं. अब जब वैभव मैदान पर उतरते हैं तो दर्शक सिर्फ पारी नहीं देखते, धमाका तलाशते हैं.
लेकिन यहीं से कहानी का दूसरा अध्याय शुरू होता है. जो बल्लेबाज हर गेंद में चौका-छक्का तलाशने लगे, उसे एक दिन गेंदबाज भी उसी जल्दबाजी में फंसाने लगते हैं. और दलीप ट्रॉफी फाइनल में चेन्नई में त्रिपुराना विजय की गेंद पर वैभव का स्टंप होना इसी खतरे की एक झलक है.
8 रन, 16 गेंद... और फिर वह शॉट- वैभव गेंद को उड़ाने निकले थे, लेकिन अपनी जल्दबाजी में खुद ही उड़ गए!
विजय ने गेंद को थोड़ा पीछे खींचा. वैभव क्रीज से बाहर निकले. इरादा वही- गेंद को बाउंड्री के पार पहुंचाना. लेकिन इस बार गेंद ने बल्ले को नहीं, बल्लेबाज के दिमाग को मात दे दी.
गेंद हवा में घूमी, वैभव चूके और जगदीशन ने गिल्लियां बिखेर दीं.
यही वह क्षण है जहां वैभव को रुककर खुद से सवाल करना चाहिए.
कल जिसे उड़ाया, आज उसी ने पढ़ लिया
इस विकेट की कहानी इसलिए और दिलचस्प है क्योंकि सामने वही त्रिपुराना विजय थे, जिनके आईपीएल डेब्यू में वैभव ने पहले ही ओवर में तीन चौके और एक छक्का ठोक दिया था.
तब वैभव ने विजय को पढ़ लिया था. इस बार विजय ने वैभव को पढ़ लिया. क्रिकेट में बदला हमेशा शब्दों से नहीं लिया जाता. कभी-कभी एक गेंद काफी होती है.
शायद वैभव के दिमाग में पिछली भिड़ंत की वही तस्वीर रही हो. शायद उन्हें लगा हो कि विजय फिर से उन्हें आसान शिकार देंगे. इसलिए वह गेंद तक पहुंचने के लिए क्रीज से बाहर निकल पड़े. लेकिन रेड बॉल क्रिकेट में गेंदबाज आपको सिर्फ गेंद नहीं दिखाता, वह आपको भ्रम भी दिखाता है.

विजय ने वही किया.उन्होंने वैभव को आगे आने दिया और फिर गेंद को हवा में ऐसा रोका कि बल्लेबाज का पूरा गणित बिगड़ गया.पिछली बार वैभव ने गेंदबाज को सबक दिया था. इस बार गेंदबाज ने वैभव को.
यही फर्क है आईपीएल और फर्स्ट क्लास क्रिकेट में
टी20 ने वैभव को पहचान दी है. उनकी निडर बल्लेबाजी उनकी सबसे बड़ी पूंजी है. लेकिन फर्स्ट क्लास क्रिकेट उसी निडरता की परीक्षा लेता है. यहां हर गेंद को मारना जरूरी नहीं.
कई बार गेंद को छोड़ देना ही सबसे बड़ा शॉट होता है. कई बार 10 गेंद तक रन नहीं बनाना ही सही बल्लेबाजी होती है.और कई बार गेंदबाज को यह अहसास कराना जरूरी होता है कि बल्लेबाज उसके जाल में आने वाला नहीं है.
वैभव को यही सीखना होगा. उनके पास शॉट्स की कमी नहीं है. ताकत की कमी नहीं है. आत्मविश्वास की कमी नहीं है. अब उन्हें 'कब नहीं मारना है'- यह सीखना है. यही चीज एक विस्फोटक बल्लेबाज और महान बल्लेबाज के बीच फर्क पैदा करती है.
सबसे बड़ा खतरा गेंदबाज नहीं, स्टारडम है
वैभव के लिए सबसे खतरनाक चीज इस समय कोई तेज गेंदबाज या चालाक स्पिनर नहीं है.
सबसे बड़ा खतरा है- स्टारडम. जब हर पारी से शतक की उम्मीद होने लगे, जब हर छक्के पर सोशल मीडिया फटने लगे, जब हर मैच से पहले चर्चा होने लगे कि आज वैभव क्या नया रिकॉर्ड बनाएंगे, तब बल्लेबाज के भीतर एक अदृश्य दबाव पैदा होता है.
उसे लगता है कि उसे हर बार कुछ असाधारण करना है. लेकिन क्रिकेट असाधारण पारियों से नहीं, हजारों साधारण गेंदों को सही तरीके से खेलने की कला से लंबा चलता है.

वैभव अभी सिर्फ 15 साल के हैं. उनके पास सीखने और गलतियों से निकलने का भरपूर समय है. इसलिए यह चेतावनी आलोचना नहीं है. यह उस प्रतिभा के लिए जरूरी चेतावनी है जिसे बहुत जल्दी बहुत ज्यादा शोहरत मिल गई है.
वैभव को वैभव ही रहने दीजिए
उन्हें हर मैच में 'रिकॉर्ड तोड़ने वाला वैभव' मत बनाइए. उन्हें कभी-कभी 30 रन बनाने दीजिए. कभी 40 रन पर आउट होने दीजिए. कभी 20 गेंद तक उन्हें डिफेंस करने दीजिए.
क्योंकि अगर हर पारी में उनसे आतिशबाजी मांगी जाएगी तो बल्लेबाज धीरे-धीरे अपने खेल की बजाय अपनी छवि के लिए खेलने लगेगा.और यह किसी भी किशोर क्रिकेटर के लिए खतरनाक मोड़ है.
वैभव को सुपरस्टार बनने की जल्दी नहीं करनी चाहिए. सुपरस्टारडम तो उन्हें मिल ही चुका है. अब असली लड़ाई है- उसे संभालने की.
आगे दुनिया और बेरहम होगी
आज दलीप ट्रॉफी में एक ऑफ स्पिनर ने उन्हें हवा में चकमा दिया है. कल इंटरनेशनल क्रिकेट में दुनिया के शीर्ष स्पिनर उनके लिए इससे कहीं बड़े जाल लेकर आएंगे. वे उनकी पिछली पारियां देखेंगे. उनकी पसंदीदा गेंदें देखेंगे. क्रीज से निकलने की आदत देखेंगे. शरीर की हरकत पढ़ेंगे... और फिर वैभव की उसी आक्रामकता को उनके खिलाफ इस्तेमाल करेंगे.
वहां सिर्फ बल्ले की ताकत काम नहीं आएगी. दिमाग की ताकत भी चाहिए होगी. इसलिए वैभव के लिए अभी सबसे जरूरी चीज कोई नया शॉट सीखना नहीं है.
उन्हें ठहरना सीखना है. क्योंकि तूफान जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है यह जानना कि तूफान कब रोकना है. वैभव के पास क्रिकेट की दुनिया जीतने की प्रतिभा है.
बस उन्हें यह याद रखना होगा- आईपीएल आपको स्टार बना सकता है, लेकिन टेस्ट और फर्स्ट क्लास क्रिकेट आपको महान बनाते हैं. और महान बनने की राह में हर गेंद को उड़ाना नहीं होता. कभी-कभी... गेंद को छोड़ना भी पड़ता है.