भारतीय क्रिकेट में इन दिनों सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि रोहित शर्मा और विराट कोहली कितने रन बना रहे हैं. असली सवाल इससे बड़ा है- क्या 2027 के वर्ल्ड कप की भारतीय टीम इन दोनों के बिना पूरी मानी जा सकती है?
सुरेश रैना ने तो इस सवाल का जवाब अपने अंदाज में दे दिया है. उनका मानना है कि अगर रोहित शर्मा और विराट कोहली 2027 वर्ल्ड कप में भारत की टीम का हिस्सा होते हैं तो खिताब जीतने की संभावना 90 प्रतिशत तक पहुंच जाती है. यह आंकड़ा किसी क्रिकेटीय गणना का नतीजा नहीं, बल्कि रैना का आकलन है. लेकिन इस बयान ने उस बहस को जरूर फिर सामने ला दिया है, जिसे भारतीय क्रिकेट पिछले कई महीनों से टाल नहीं पा रहा है.
और दिलचस्प बात यह है कि बहस सिर्फ रैना के बयान से नहीं चल रही. गौतम गंभीर ने भी हाल में रोहित और विराट की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताया है. उन्होंने कहा कि वनडे क्रिकेट में शुभमन गिल काफी भाग्यशाली हैं कि उन्हें रोहित और विराट जैसे खिलाड़ियों से मैदान के अंदर और बाहर मदद मिल रही है. यानी भारतीय टीम में इन दोनों की उपयोगिता सिर्फ बल्ले तक सीमित नहीं है.
2027 की टीम में रोहित-विराट क्यों बड़ा सवाल हैं?
रोहित और विराट की उम्र को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है. 2027 वर्ल्ड कप तक दोनों अपने करियर के उस पड़ाव पर होंगे जहां फिटनेस, रिफ्लेक्स और लगातार मैच खेलने की क्षमता पर नजर रहना तय है. लेकिन उम्र अपने आप में चयन का फैसला नहीं कर सकती. असली पैमाना होगा- रन, फिटनेस और टीम को मिलने वाला फायदा.
रोहित के मामले में यह बहस ज्यादा तीखी है. विराट की वनडे जगह फिलहाल अपेक्षाकृत मजबूत दिखाई देती है, जबकि रोहित के भविष्य पर पिछले कुछ समय में लगातार सवाल उठते रहे हैं. इंग्लैंड दौरे के दौरान भी उनके वनडे भविष्य को लेकर अटकलें तेज हुई थीं, लेकिन उन्होंने खुद उन अटकलों को खारिज किया. अब वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज के लिए दोनों की वापसी इस बात का संकेत है कि कम से कम फिलहाल चयनकर्ताओं की योजना में दोनों मौजूद हैं.
यही वजह है कि अगले एक साल में हर वनडे रोहित के लिए सिर्फ एक मैच नहीं होगा. वह 2027 की तस्वीर का हिस्सा बनने की अपनी क्षमता को लगातार साबित करने का मौका होगा.
दक्षिण अफ्रीका में विराट का रिकॉर्ड रोहित से बिल्कुल अलग
रैना के बयान को अगर आंकड़ों के आईने से देखें तो एक दिलचस्प तस्वीर सामने आती है.
2027 का वर्ल्ड कप दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की मेजबानी में होगा. ऐसे में दक्षिण अफ्रीका की परिस्थितियों में रोहित शर्मा और विराट कोहली का अनुभव चर्चा के केंद्र में आना स्वाभाविक है. खासकर विराट का वहां वनडे रिकॉर्ड इस बहस को और दिलचस्प बनाता है. उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में 18 पारियों में 993 रन बनाए हैं और उनका एवरेज 76.38 है. रोहित के आंकड़े इसके मुकाबले काफी कमजोर हैं- 13 पारियों में 256 रन और 19.69 का एवरेज.
यानी सिर्फ यह कहना कि दोनों के पास दक्षिण अफ्रीका में खेलने का अनुभव है, पूरी तस्वीर नहीं बताता. अनुभव दोनों के पास है, लेकिन उस अनुभव का प्रदर्शन में रूपांतरण विराट के मामले में कहीं ज्यादा प्रभावी रहा है.
फिर भी रोहित को सिर्फ इन आंकड़ों के आधार पर बाहर कर देना भी आसान नहीं है. वर्ल्ड कप जैसी प्रतियोगिता में किसी खिलाड़ी की उपयोगिता केवल एक देश के पिछले रिकॉर्ड से तय नहीं होती. मैच की परिस्थितियां, मौजूदा फॉर्म, टीम कॉम्बिनेशन और ड्रेसिंग रूम में उसकी भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है.
गिल कप्तान हैं, लेकिन उन्हें भी इन दोनों की जरूरत है
2027 की सबसे दिलचस्प तस्वीर शायद यही होगी. शुभमन गिल भारतीय वनडे टीम की कमान संभाल रहे हैं और अगली पीढ़ी के नेतृत्व का चेहरा बन चुके हैं. लेकिन उनके आसपास रोहित और विराट जैसे दो पूर्व कप्तानों की मौजूदगी संक्रमण को बिल्कुल अलग रूप देती है.
गंभीर ने साफ कहा कि गिल को रोहित और विराट से मैदान के अंदर और बाहर मदद मिल रही है. उन्होंने यह भी माना कि भारतीय क्रिकेट में किसी खिलाड़ी को प्लेइंग इलेवन से बाहर करना आसान नहीं होता, खासकर तब जब सामने इतने बड़े नाम हों.
यहीं रोहित-विराट की असली उपयोगिता सामने आती है.
अगर बल्ला चलता है तो वे मैच जिताएंगे. अगर बल्ला नहीं चलता तो उनका अनुभव गिल की कप्तानी को सहारा दे सकता है.
लेकिन इसकी एक शर्त है- यह भूमिका सिर्फ प्रतिष्ठा के आधार पर नहीं चल सकती. 2027 तक पहुंचते-पहुंचते दोनों को प्रदर्शन और फिटनेस के जरिए अपनी जगह बनाए रखनी होगी. और यही सबसे बड़ा ट्विस्ट है
भारत के पास विकल्पों की कमी नहीं है. यही बात पूर्व चयनकर्ता संदीप पाटिल ने भी कही है. उनका कहना है कि रोहित और विराट महान खिलाड़ी हैं, लेकिन अगर भविष्य में उनकी जगह नए खिलाड़ियों को लाना पड़े तो भारत की बेंच स्ट्रेंथ ऐसी है कि इससे बड़ी समस्या पैदा नहीं होगी.
यानी तस्वीर दो ध्रुवों वाली है. एक तरफ रोहित-विराट का अनुभव, बड़े मैचों का दबाव झेलने की क्षमता और ड्रेसिंग रूम में प्रभाव है. दूसरी तरफ यशस्वी जायसवाल जैसे युवा विकल्प हैं, जो लगातार दरवाजा खटखटा रहे हैं. इसी टकराव से अगले एक साल की भारतीय वनडे टीम की दिशा तय होगी.
इसलिए 2027 वर्ल्ड कप की कहानी को अभी से 'रोहित-विराट होंगे या नहीं' में सीमित करना जल्दबाजी होगी. सही सवाल यह है- क्या 2027 तक दोनों इतने अच्छे रहेंगे कि भारत उन्हें छोड़ने का जोखिम न उठा सके?
अगर जवाब हां है तो अनुभव को नजरअंदाज करना मुश्किल होगा. अगर जवाब नहीं है तो सिर्फ अतीत के नाम पर भविष्य की टीम नहीं बनाई जा सकती.
रैना ने 90 प्रतिशत का दावा किया है. अगले एक साल में भारत को यह साबित नहीं करना कि आंकड़ा सही है या गलत. असली परीक्षा यह होगी कि 2027 में दक्षिण अफ्रीका की मुश्किल परिस्थितियों में उतरते वक्त रोहित-विराट समेत हर खिलाड़ी अपनी जगह को कितनी मजबूती से सही साबित करता है.