scorecardresearch
 

ना स्पिन, ना मिस्ट्री… IPL 2026 में पेस का ‘किलर इंस्टिंक्ट’ ही हिट

IPL 2026 में गेंदबाजी का ट्रेंड पूरी तरह बदलता नजर आ रहा है, जहां स्पिनर्स की जगह पेसर्स का दबदबा देखने को मिल रहा है. भुवनेश्वर कुमार और अंशुल कंबोज पर्पल कैप की रेस में आगे हैं, जबकि कगिसो रबाडा और जोफ्रा आर्चर जैसे तेज गेंदबाज अपनी रफ्तार से बल्लेबाजों पर दबाव बना रहे हैं. इस सीजन में 145+ की स्पीड या स्विंग की कला ही सफलता की कुंजी बन गई है, जबकि राशिद खान को छोड़ अधिकांश स्पिनर्स का असर सीमित रहा है.

Advertisement
X
पर्पल कैप की रेस ...पेसरों में जंग. (Photo: PTI)
पर्पल कैप की रेस ...पेसरों में जंग. (Photo: PTI)

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) का मौजूदा सीजन एक बड़े ट्रेंड बदलाव का गवाह बन रहा है. सालों तक जहां टी20 क्रिकेट में स्पिनर्स ने अपनी चतुराई और विविधता से बल्लेबाजों को जकड़कर रखा, वहीं इस बार तस्वीर उलटती नजर आ रही है. आंकड़े साफ इशारा कर रहे हैं कि इस सीजन गेंदबाजी की कमान तेज गेंदबाजों के हाथ में है.

पर्पल कैप की रेस पर नजर डालें तो शुरुआती सूची में पेसर्स का दबदबा स्पष्ट दिखता है. भुवनेश्वर कुमार और अंशुल कम्बोज 17-17 विकेट लेकर शीर्ष पर काबिज हैं. इनके बाद कगिसो रबाडा (16 विकेट) और जोफ्रा आर्चर (15 विकेट) जैसे नाम हैं, जो अपनी रफ्तार और आक्रामकता से बल्लेबाजों पर कहर बरपा रहे हैं.

यह महज संयोग नहीं, बल्कि बदलती रणनीति और परिस्थितियों का नतीजा है.

रफ्तार और स्विंग का डबल अटैक

IPL 2026 में सफल पेसर्स को देखें तो एक खास पैटर्न उभरकर सामने आता है... या तो गेंदबाज 145 किमी/घंटा से ऊपर की रफ्तार रखता है या फिर उनके पास स्विंग और कंट्रोल की असाधारण क्षमता है.

भुवनेश्वर कुमार इसका सबसे सटीक उदाहरण हैं. उनकी गेंदों में पहले जैसी स्विंग अब भी मौजूद है और लाइन-लेंथ इतनी सटीक कि बल्लेबाजों के लिए रन बनाना जोखिम भरा हो जाता है. 15.52 की औसत और 7.54 की इकोनॉमी इस बात की गवाही देती है कि अनुभव और कौशल अब भी उतने ही प्रभावी हैं.

Advertisement

दूसरी ओर, कगिसो रबाडा और जोफ्रा आर्चर जैसे गेंदबाज शुद्ध रफ्तार के दम पर खेल बदल रहे हैं. हार्ड लेंथ, बाउंस और तेज गति... इन तीनों का मिश्रण बल्लेबाजों को खुलकर खेलने नहीं दे रहा.

अंशुल कम्बोज इस सीजन के ‘डार्क हॉर्स’ बनकर उभरे हैं. उनका स्ट्राइक रेट (11.17) बताता है कि वे कितनी तेजी से विकेट निकाल रहे हैं. यानी वे सिर्फ रन रोक नहीं रहे, बल्कि मैच का रुख पलट रहे हैं.

स्पिनर्स क्यों पिछड़े?

जहां पेसर्स का दबदबा साफ नजर आ रहा है, वहीं स्पिनर्स की चमक फीकी पड़ी है. राशिद खान अकेले ऐसे स्पिनर हैं जो टॉप-10 में जगह बना पाए हैं, जबकि रवि बिश्नोई और वरुण चक्रवर्ती जैसे नाम इस सूची से बाहर हैं.

राशिद खान ने 11 विकेट जरूर लिए हैं, लेकिन उनकी औसत 27.81 है, जो उनके स्तर के हिसाब से ज्यादा है. वहीं चक्रवर्ती और बिश्नोई विकेट तो निकाल रहे हैं, मगर नियमित अंतराल पर मैच पर पकड़ नहीं बना पा रहे.

हालांकि सुनील नरेन अब भी इकोनॉमी के मामले में सबसे किफायती गेंदबाजों में शामिल हैं (6.80), लेकिन विकेट लेने के मामले में वे पीछे रह गए हैं.

इसका सीधा मतलब है- स्पिनर्स अब 'रन रोकने वाले' गेंदबाज बनकर रह गए हैं, जबकि पेसर्स ‘मैच जिताने वाले’.

Advertisement

स्ट्राइक रेट बना असली हीरो

टी20 क्रिकेट में अब सिर्फ इकोनॉमी नहीं, बल्कि स्ट्राइक रेट असली गेम चेंजर बन गया है. इस सीजन के टॉप गेंदबाजों पर नजर डालें तो एक बात साफ है, जो गेंदबाज कम गेंदों में विकेट ले रहा है, वही सबसे ज्यादा प्रभावशाली साबित हो रहा है. यही वजह है कि अंशुल कम्बोज (11.17) और भुवनेश्वर कुमार (12.35) जैसे गेंदबाज मैच के रुख को तेजी से बदलने में कामयाब हो रहे हैं.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement