टीम इंडिया को जब तेजी से रन बनाने होते हैं, हार्दिक पंड्या याद आते हैं. जब बीच के ओवरों में विकेट चाहिए या डेथ ओवरों में रनों पर लगाम लगानी होती है, तब भी हार्दिक की जरूरत महसूस होती है. और जब मुकाबला आखिरी गेंदों तक पहुंचे, तब मैदान पर उनकी मौजूदगी कप्तान का भरोसा बढ़ाती है. लेकिन फिलहाल चोट ने भारत के इस स्टार ऑलराउंडर को मैदान से दूर कर रखा है. उनकी वापसी में देरी हो रही है और टीम इंडिया के सामने सबसे बड़ा सवाल है- आखिर हार्दिक की जगह कौन लेगा?
भारतीय क्रिकेट में बल्लेबाजों और गेंदबाजों की कमी नहीं है. ऑलराउंडर भी हैं, लेकिन हार्दिक जैसा तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर तैयार करना आसान नहीं. ऐसा खिलाड़ी, जो निचले मध्यक्रम में उतरकर कुछ ही गेंदों में मैच का रुख बदल दे, नई गेंद से भी योगदान दे और जरूरत पड़ने पर डेथ ओवरों की जिम्मेदारी भी उठा सके. हार्दिक की खासियत यही है कि वह टीम को एक साथ कई विकल्प देते हैं.
चोट का चक्रव्यूह, हार्दिक की वापसी पर फिर ब्रेक!
हार्दिक पंड्या आईपीएल 2026 के बाद से प्रतिस्पर्धी क्रिकेट से दूर हैं. उनकी वापसी की उम्मीद तब जगी, जब उन्हें ऑस्ट्रेलिया-ए के खिलाफ तीन मैचों की अनऑफिशियल वनडे सीरीज के लिए भारत-ए की टीम में शामिल किया गया. हालांकि, उनकी उपलब्धता फिटनेस क्लीयरेंस पर निर्भर थी. गेंदबाजी के दौरान दर्द की समस्या बनी रहने के कारण यह वापसी भी टल गई.
सितंबर के आखिर में उनकी दाहिनी पिंडली के निचले हिस्से में दोबारा परेशानी सामने आई थी. इसके बाद उनकी रिकवरी और मैदान पर वापसी को लेकर सवाल खड़े हो गए. हार्दिक मार्च 2025 में चैम्पियंस ट्रॉफी फाइनल के बाद से वनडे भी नहीं खेले हैं.
यह स्थिति इसलिए चिंताजनक है, क्योंकि भारत को 2027 वनडे वर्ल्ड कप के लिए अपना संयोजन तैयार करना है. हार्दिक पूरी तरह फिट रहते हैं, तो टीम को बल्लेबाजी में गहराई और गेंदबाजी में अतिरिक्त विकल्प मिलता है. लेकिन अगर उनकी फिटनेस बार-बार बाधा बनती है, तो टीम मैनेजमेंट को दूसरे विकल्पों पर भी गंभीरता से काम करना होगा.
हार्दिक की जगह लेने के लिए किसे आजमा रहे गंभीर?
हार्दिक की गैरमौजूदगी में भारतीय टीम ने अलग-अलग फॉर्मेट में दूसरे ऑलराउंडरों को मौके दिए हैं. टी20 इंटरनेशनल में शिवम दुबे को बल्लेबाजी के साथ मध्यम गति की गेंदबाजी की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है. वह लंबे छक्के लगाने की क्षमता रखते हैं और स्पिन के खिलाफ खास तौर पर आक्रामक बल्लेबाजी कर सकते हैं. लेकिन हार्दिक की तरह लगातार गेंदबाजी के भरोसेमंद विकल्प के रूप में खुद को स्थापित करना उनके लिए अब भी चुनौती है.
दुबे को लेकर हाल में पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज वरुण आरोन ने भी सवाल उठाए. उनका मानना रहा कि भारत को दुबे की गेंदबाजी पर लगातार निर्भर रहने के बजाय दूसरे विकल्पों को भी आजमाना चाहिए. आरोन ने नीतीश कुमार रेड्डी को मौका देने की वकालत की.
नीतीश रेड्डी की खासियत यह है कि वह मध्यक्रम में बल्लेबाजी कर सकते हैं और मध्यम गति की गेंदबाजी भी करते हैं. उन्हें भविष्य के लिए हार्दिक के संभावित विकल्पों में गिना जा सकता है. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में हार्दिक जैसी भूमिका निभाने के लिए उन्हें लगातार प्रदर्शन और फिटनेस के जरिए अपनी उपयोगिता साबित करनी होगी.
वनडे में हार्दिक का विकल्प तलाशने के लिए चयनकर्ताओं ने नमन धीर पर दांव लगाया. वेस्टइंडीज के खिलाफ घरेलू वनडे सीरीज में जगह देने के बाद उन्हें टी20 सीरीज में भी मौका मिल रहा है. साफ है कि टीम मैनेजमेंट हार्दिक की गैरमौजूदगी में ऐसे खिलाड़ियों को आजमाने में जुटा है, जो बल्ले से रन बरसाने के साथ गेंद से भी विरोधियों पर वार कर सकें. हालांकि, मौके मिलना अलग बात है और हार्दिक जैसी दोहरी मार दिखाना अलग.
लेकिन यहां सबसे अहम अंतर समझना होगा. किसी खिलाड़ी में ऑलराउंडर बनने की क्षमता होना और हार्दिक की तरह मैच के अलग-अलग चरणों में जिम्मेदारी निभा पाना एक जैसी बात नहीं है. हार्दिक के विकल्पों की तलाश जारी है, लेकिन उनके जैसा तैयार खिलाड़ी फिलहाल मिलना मुश्किल दिखता है.
टीम मैनेजमेंट की नजर हर्षित राणा पर भी रही है. टीम मैनेजमेंट उन्हें नीतीश रेड्डी के साथ ऐसे खिलाड़ी के रूप में तैयार करना चाहता था, जो गेंदबाजी के साथ निचले क्रम में बल्ले से भी योगदान दे सके. हालांकि, हर्षित के लिए फिटनेस बड़ी चुनौती बन गई है. 2026 में घुटने की सर्जरी के कारण टी20 वर्ल्ड कप और आईपीएल से बाहर रहने के बाद वह वापसी करने में सफल रहे, लेकिन सितंबर में हैमस्ट्रिंग की नई चोट ने फिर उनकी राह रोक दी.
मैच पलटने का दम... हार्दिक का बल्ला क्यों है बेमिसाल!
हार्दिक की बल्लेबाजी की सबसे बड़ी ताकत उनकी पावर-हिटिंग है. वह क्रीज पर आते ही गेंदबाजों पर दबाव बना सकते हैं. उन्हें लंबी पारी खेलने के लिए हमेशा ज्यादा गेंदों की जरूरत नहीं होती. कुछ अच्छे शॉट मैच का समीकरण बदल सकते हैं.
टी20 वर्ल्ड कप के डेथ ओवरों में उनके नाम 307 रन दर्ज हैं. इस चरण में कम से कम 100 गेंदों का सामना करने वाले बल्लेबाजों में उनसे ज्यादा रन किसी ने नहीं बनाए. उनका स्ट्राइक रेट 193.08 रहा है. यह आंकड़ा बताता है कि हार्दिक आखिरी ओवरों में कितने खतरनाक साबित हो सकते हैं.
टी20 वर्ल्ड कप 2026 के इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में भी उन्होंने 12 गेंदों पर 27 रन की तेज पारी खेली थी. भारत ने इस मुकाबले में 253/7 का विशाल स्कोर बनाया और 7 रनों से जीत हासिल की. हार्दिक की छोटी लेकिन तेज पारी ने टीम को बड़े स्कोर तक पहुंचाने में योगदान दिया.
ऐसे खिलाड़ी की अहमियत सिर्फ बनाए गए रनों से नहीं मापी जा सकती. वह विपक्षी कप्तान को गेंदबाजी के विकल्प बदलने पर मजबूर करता है और आखिरी ओवरों में किसी भी लक्ष्य को मुश्किल बना सकता है.
गेंद हाथ में आते ही बदलता है खेल, ये ताकत भी खास
हार्दिक को बुमराह या अर्शदीप सिंह जैसा विशेषज्ञ गेंदबाज कहना सही नहीं होगा. लेकिन वह ऐसे ऑलराउंडर हैं, जिन पर कप्तान अलग-अलग परिस्थितियों में भरोसा कर सकता है. नई गेंद से स्विंग, बीच के ओवरों में कटर और जरूरत पड़ने पर डेथ ओवरों की जिम्मेदारी- उनके पास कई तरह के विकल्प हैं.
टी20 वर्ल्ड कप में डेथ ओवरों के दौरान कम से कम 100 गेंदें फेंकने वाले 29 गेंदबाजों में उनकी इकॉनमी 8.23 रही है. केवल आठ गेंदबाज उनसे बेहतर रहे हैं. यानी हार्दिक सिर्फ बल्लेबाजी में ही नहीं, बल्कि मुश्किल ओवरों में रन रोकने के मामले में भी उपयोगी साबित हुए हैं.
इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में उन्होंने फिल सॉल्ट को आउट कर भारत को शुरुआती सफलता दिलाई थी. बाद में आखिरी ओवरों में भी उनकी गेंदबाजी ने इंग्लैंड पर दबाव बनाए रखा. बड़े मैचों में बल्ले और गेंद से एक साथ योगदान देने की यही क्षमता हार्दिक को खास बनाती है.
बैटिंग-बॉलिंग के बाद फील्डिंग में भी फुल पैकेज हैं हार्दिक
हार्दिक की उपयोगिता बल्लेबाजी और गेंदबाजी पर खत्म नहीं होती. वह मैदान पर भी फुर्तीले और प्रभावशाली खिलाड़ी हैं. मुश्किल कैच लपकना, तेजी से गेंद तक पहुंचना और सटीक थ्रो करना उनकी खूबियों में शामिल है.
इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में जैकब बेथेल के शॉट पर उनकी तेजी और फुर्ती देखने को मिली थी. ऐसे मौके पर एक अच्छा फील्डिंग प्रयास विरोधी टीम के लिए अतिरिक्त रन जुटाना मुश्किल बना देता है.
यानी हार्दिक एक ही मैच में तीनों विभागों में योगदान दे सकते हैं. यही वजह है कि उनकी जगह किसी दूसरे खिलाड़ी को शामिल करने भर से टीम को वैसा ही संतुलन मिल जाएगा, यह मान लेना गलत होगा.
हार्दिक नहीं लौटे तो क्या होगा? गंभीर के सामने बड़ा सिरदर्द!
गौतम गंभीर और टीम मैनेजमेंट के सामने चुनौती सिर्फ हार्दिक की जगह किसी खिलाड़ी को चुनने की नहीं, बल्कि ऐसा संयोजन तैयार करने की है जो लंबे टूर्नामेंट में टिक सके. 2027 वनडे वर्ल्ड कप की तैयारी के लिए हार्दिक की फिटनेस बेहद अहम होगी.
अगर वह पूरी तरह फिट होकर लौटते हैं, तो भारत को बल्लेबाजी में मजबूती, गेंदबाजी में अतिरिक्त विकल्प और फील्डिंग में एक भरोसेमंद खिलाड़ी मिलेगा. लेकिन अगर उनकी वापसी में देरी होती है या वह लगातार खेलने की स्थिति में नहीं पहुंचते, तो टीम को दूसरे ऑलराउंडरों पर भरोसा बढ़ाना पड़ेगा.
शिवम दुबे और नीतीश रेड्डी जैसे खिलाड़ियों के लिए यह खुद को साबित करने का मौका भी है. लेकिन उन्हें सिर्फ हार्दिक की जगह भरने के दबाव में नहीं, बल्कि अपनी भूमिका और खूबियों के आधार पर तैयार करना होगा. भारत को एक ऐसा विकल्प चाहिए, जो बल्लेबाजी के साथ गेंदबाजी में भी लगातार योगदान दे सके.
टीम इंडिया को है इस 'पावर पैकेज' की जरूरत
हार्दिक पंड्या की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वह टीम को सिर्फ एक विभाग में मजबूती नहीं देते. वह बल्लेबाजी में विस्फोट कर सकते हैं, गेंद से विरोधियों की रफ्तार रोक सकते हैं और फील्डिंग में भी मैच का रुख बदल सकते हैं. इसीलिए उनकी गैरमौजूदगी में टीम को बार-बार संयोजन पर विचार करना पड़ता है.
उनकी फिटनेस पर नजर रखना और दूसरे खिलाड़ियों को तैयार करना, दोनों जरूरी हैं. भारत को हार्दिक की वापसी के लिए जल्दबाजी करने के बजाय यह सुनिश्चित करना होगा कि वह पूरी तरह फिट होकर लौटें और लंबे समय तक टीम को अपनी सेवाएं दे सकें.
बल्ले से तबाही, गेंद से कहर और मैदान पर फुर्ती- हार्दिक पंड्या के इस पैकेज का फिलहाल कोई सटीक विकल्प नजर नहीं आता. गंभीर के सामने असली चुनौती यही है कि हार्दिक की वापसी तक टीम का संतुलन कैसे बनाए रखा जाए और 2027 वर्ल्ड कप से पहले उनके विकल्पों को कितना तैयार किया जाए.