इंग्लैंड के दिग्गज ऑलराउंडर बेन स्टोक्स ने रविवार (28 जून) को इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्याास लेने का ऐलान कर दिया था. स्टोक्स ने इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच आयोजित ट्रेंट ब्रिज टेस्ट के दौरान ये चौंकाने वाले निर्णय लिया. स्टोक्स ने अब साफ किया कि उन्हें किसी ने संन्यास लेने के लिए मजबूर नहीं किया. यह पूरी तरह उनका अपना फैसला था.
35 वर्षीय स्टोक्स ने स्काई स्पोर्ट्स से बातचीत में उन अटकलों को भी खारिज कर दिया कि हाल ही में लंदन के एक नाइटक्लब विवाद और अनुशासनात्मक जांच के कारण उन्हें टीम छोड़नी पड़ी. उन्होंने कहा कि उनके संन्यास की असली वजह मानसिक और शारीरिक थकान थी, जिसकी शुरुआत पिछले साल ऑस्ट्रेलिया में एशेज सीरीज के दौरान ही हो गई थी.
बेन स्टोक्स ने कहा कि लॉर्ड्स टेस्ट के दौरान उन्हें अपने करियर को लेकर फिर वही नकारात्मक भावनाएं महसूस होने लगीं, जो एशेज दौरे के बाद पैदा हुई थीं. स्टोक्स कहते हैं, 'लॉर्ड्स टेस्ट ने मुझे फिर से याद दिलाया कि मैं अपने करियर में किस दौर से गुजर रहा हूं. घर लौटने के बाद मैंने खुद को बेहतर बनाने के लिए बहुत मेहनत की, लेकिन इस कोशिश में मैं पूरी तरह थक गया.'
उन्होंने बताया कि पिछले कुछ महीनों में उन्होंने टीम के लिए अपना सबकुछ झोंक दिया था और अब वह उस स्थिति में पहुंच चुके थे, जहां क्रिकेट का आनंद भी खत्म होने लगा था. हालांकि बेन स्टोक्स ने साफ किया कि नाइटक्लब विवाद उनके संन्यास की वजह नहीं था, लेकिन उन्होंने माना कि उस घटना और उसके बाद हुए विवाद ने उनके ऊपर मानसिक दबाव जरूर बढ़ा दिया.
बेन स्टोक्स कहते हैं, 'लॉर्ड्स टेस्ट का पूरा सप्ताह काफी मुश्किल रहा. फिर ड्रेसिंग रूम में जो रूट के साथ बैठा तो एहसास हुआ कि मैं मानसिक रूप से कितना थक चुका हूं. पिछले दो हफ्तों में जो कुछ हुआ, उसने हालात और मुश्किल बना दिए.' गौरतलब है कि लॉर्ड्स टेस्ट के बाद स्टोक्स एक नाइट क्लब विवाद में फंस गए थे. इसके बाद उन्हें दूसरे टेस्ट से बाहर बैठना पड़ा. ईसीबी (इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड) और क्रिकेट रेगुलेटर ने मामले की जांच शुरू की थी. हालांकि बाद में उन्हें गंभीर आरोपों से क्लीन चिट मिल गई और ट्रेंट ब्रिज टेस्ट के लिए टीम में वापस शामिल कर लिया गया.
बेन स्टोक्स ने बताया कि दूसरे टेस्ट से बाहर होने के बाद जब वह अपने काउंटी क्लब डरहम लौटे, तो उन्हें क्रिकेट के प्रति फिर से लगाव महसूस हुआ. स्टोक्स ने बताया, 'डरहम में खेलते हुए मुझे लगा कि क्रिकेट के लिए मेरा प्यार लौट रहा है, लेकिन ट्रेंट ब्रिज में वापस आने के बाद मैं वही एहसास दोबारा हासिल नहीं कर पाया.'
बेन स्टोक्स ने माना कि उनका यह फैसला कुछ लोगों को स्वार्थी लग सकता है, क्योंकि उनका केंद्रीय अनुबंध 2027 तक था. स्टोक्स ने आगे कहा, 'यह फैसला थोड़ा स्वार्थी लग सकता है, लेकिन इस समय मेरे लिए यही सबसे सही है. मुझे उम्मीद है कि इससे टीम को भी आगे बढ़ने का मौका मिलेगा और मैं उस खेल से प्यार करना जारी रख सकूंगा, जिसने मुझे सबकुछ दिया.'
बेन स्टोक्स ने अपने साथियों को ड्रेसिंग रूम में अपने फैसले की जानकारी दे दी थी. उन्होंने खिलाड़ियों से अपील की कि भावनाओं को एक तरफ रखकर टीम के लिए आखिरी बार पूरी ताकत झोंक दें. स्टोक्स ने 15 साल लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर को अलविदा कहा है. इस दौरान उन्होंने इंग्लैंड को दो विश्व कप जिताने में अहम भूमिका निभाई, कई ऐतिहासिक पारियां खेलीं और अपनी आक्रामक कप्तानी से टेस्ट क्रिकेट में 'बैजबॉल' युग की शुरुआत की.