जिंदगी की हर एक मुश्किल को मात देकर भारत की युवा पैरा एथलीट दीप्ति जीवनजी ने एक बार फिर पूरी दुनिया में देश का सिर फक्र से ऊंचा कर दिया है. जापान के आइची-नागोया में हो रहे एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारत का गोल्ड मेडल जीतने का सिलसिला मंगलवार को भी जारी रहा.
मंगलवार के दिन 23 साल की दीप्ति ने महिलाओं की 400 मीटर टी20 स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया. दीप्ति ने आइची-नागोया में 56.36 सेकंड का नया गेम्स रिकॉर्ड भी अपने नाम किया है.
तेलंगाना के वारंगल जिले के कल्लेड़ा गांव में जन्मी दीप्ति के लिए यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था. बौद्धिक विकलांगता के साथ जन्मी दीप्ति के जन्म के समय उनका सिर छोटा और चेहरे के फीचर्स थोड़े असामान्य थे, जिसके चलते समाज और रिश्तेदारों ने उन्हें ताने देने में कोई कसर नहीं छोड़ी. यहां तक कि कुछ लोगों ने उनकी तुलना जानवरों तक से कर दी थी और माता-पिता को यह सलाह दी थी कि वे बच्ची को किसी अनाथालय में छोड़ दें.
मजदूर माता-पिता ने नहीं छोड़ा साथ
लेकिन दीप्ति के गरीब दिहाड़ी मजदूर माता-पिता ने दुनिया की परवाह किए बिना अपनी बेटी का हाथ नहीं छोड़ा और उसे पाला-पोसा. अपनी इस कमी और मानसिक रूप से जानकारी प्रोसेस करने, एकाग्रता रखने जैसी चुनौतियों से जूझते हुए भी दीप्ति ने कभी हार नहीं मानी. मात्र 15 साल की उम्र में SAI के कोच एन. रमेश ने उन्हें एक स्टेट लेवल मीट के दौरान पहचाना और उनके पंखों को उड़ान दी.
दीप्ति ने साल 2019 में हॉन्ग कॉन्ग में हुई एशियाई यूथ चैंपियनशिप से अपना सफर शुरू किया और ब्रॉन्ज मेडल जीता. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. खेलो इंडिया यूथ गेम्स से लेकर पैरा वर्ल्ड चैम्पियनशिप तक, दीप्ति ने अपनी मेहनत के दम पर सफलता के झंडे गाड़े.
साल 2024 की पैरा वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने के अलावा वह पैरालंपिक खेलों में भी ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम कर चुकी हैं. अब एशियन पैरा गेम्स में एक बार फिर गोल्ड जीतकर उन्होंने आलोचकों को अपने मेडल से करारा जवाब दे दिया है.