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कभी चलाते थे UBER टैक्सी... अब एशियन गेम्स में जीता मेडल, सलमान खान की ऐसे बदली जिंदगी

उबर कैब चलाकर परिवार का खर्च उठाने वाले उत्तर प्रदेश के सलमान खान ने अपनी मेहनत और संघर्ष के दम पर एशियन गेम्स 2026 में रोइंग का ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है. सतनाम सिंह के साथ पुरुषों के डबल स्कल्स में पदक जीतने वाले सलमान की कहानी संघर्ष, जुनून और सफलता की मिसाल है.

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सलमान खान ने एशियन गेम्स 2026 में जीता ब्रॉन्ज मेडल (Photo: SAI)
सलमान खान ने एशियन गेम्स 2026 में जीता ब्रॉन्ज मेडल (Photo: SAI)

एशियन गेम्स 2026 में भारत के लिए रोइंग से एक ऐतिहासिक खबर सामने आई है. सतनाम सिंह और सलमान खान की भारतीय जोड़ी ने 24 सितंबर (गुरुवार) को पुरुषों के डबल स्कल्स इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीत लिया है. भारतीय जोड़ी ने फाइनल में 6:13.25 के समय में इस इवेंट में एशियन गेम्स का अपना पहला पदक हासिल किया.

लेकिन इस मेडल से ज्यादा चर्चा सलमान खान की संघर्ष भरी कहानी की हो रही है. उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के रहने वाले सलमान कभी दिल्ली की सड़कों पर उबर कैब चलाकर अपने परिवार का खर्च उठाते थे. आज वही सलमान एशियन गेम्स के मेडलिस्ट बन चुके हैं.

पिता की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी

सलमान खान का जन्म अमेठी जिले के पूरे ढिंगई गांव में हुआ. वह चार भाइयों और दो बहनों में सबसे बड़े हैं. उनके पिता मोहम्मद कासिम खान हरियाणा के तावड़ू में ट्रक बॉडी बनाने का काम करते थे.

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सलमान जब 18 साल के थे, तभी डेंगू के कारण उनके पिता का निधन हो गया था. इसके बाद परिवार और छोटे भाई-बहनों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई. भारतीय सेना में जाने का उनका सपना भी उस समय पीछे छूट गया. परिवार की आर्थिक मदद के लिए सलमान दिल्ली चले गए और दिन-रात उबर कैब चलाने लगे.

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फिर लौटा सेना में जाने का सपना

सलमान के एक दोस्त ने उन्हें बताया कि उनकी लंबाई और शारीरिक बनावट सेना में भर्ती के लिए सही साबित हो सकती है. इसके बाद उन्होंने कैब किसी दूसरे ड्राइवर को सौंप दी और करीब 4 महीने तक सेना में भर्ती की तैयारी की. उन्होंने भर्ती रैली, मेडिकल और लिखित परीक्षा पास की और 25 सितंबर 2018 को सलमान पुणे के बॉम्बे इंजीनियर ग्रुप में शामिल हो गए.

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सेना में मिली रोइंग की राह

सेना में शामिल होने के बाद सलमान की जिंदगी में रोइंग की एंट्री हुई. कोच सत्यवान, सतीश सिराट और प्रभात मिश्रा ने उनकी क्षमता को पहचाना और उन्हें रोइंग आजमाने के लिए कहा.

शुरुआत में सलमान इस खेल को लेकर उत्साहित नहीं थे, लेकिन कोचों ने उनका लगातार हौसला बढ़ाया. पहली इंटर-सेंटर रेगाटा में उन्होंने सिल्वर मेडल जीता. इसके बाद 2021 में एर्गोमीटर बेंचमार्क पार करने के बाद उनका चयन आर्मी रोइंग नोड, सीएमई पुणे के लिए हुआ.

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नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर बनाई पहचान

सलमान ने 2022 के गुजरात नेशनल गेम्स में गोल्ड मेडल जीता. उसी साल उन्होंने 5वीं इंडोर नेशनल चैम्पियनशिप में भी गोल्ड मेडल हासिल किया. 2023 में उन्होंने सीनियर नेशनल चैम्पियनशिप में सिल्वर और ओपन स्प्रिंट नेशनल चैम्पियनशिप में गोल्ड जीता.

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उन्होंने 2023 में वर्ल्ड रोइंग कप III में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया. 2024 में एशियन रोइंग कप में गोल्ड जीतने के बाद उन्हें भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर नौकरी मिली.

2025 में उन्होंने ऑस्ट्रेलियन रोइंग चैम्पियनशिप और एशियन रोइंग चैम्पियनशिप में सिल्वर मेडल भी जीते. एक समय परिवार को संभालने के लिए दिल्ली में उबर चलाने वाले सलमान खान की यह यात्रा अब एशियन गेम्स के पोडियम तक पहुंच चुकी है.

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