कई बार लोगों को लगता है कि उनके पीछे कोई खड़ा है या आसपास कोई मौजूद है, जबकि वहां कोई नहीं होता. कुछ लोगों को लगता है कि किसी ने उन्हें छुआ है, तो कुछ को ऐसी आवाजें सुनाई देती हैं, जिनका कोई साफ कारण नहीं मिलता. विज्ञान में इस तरह के अनुभव को 'फेल्ट प्रेजेंस' (Felt Presence) कहा जाता है.
वैज्ञानिकों ने यह समझने के लिए रिसर्च की कि लोगों को ऐसा क्यों महसूस होता है और क्या अलग-अलग लोगों के अनुभवों में कोई समानता है. इसके लिए 206 लोगों के अनुभवों को समझा गया. हालांकि, इस एहसास के पीछे की पक्की वजह अब तक पता नहीं चली है.
यह रिसर्च सायकोलॉजिकल मेडिसिन जर्नल में छपी थी. इसमें तीन तरह के लोगों को शामिल किया गया. पहले वे लोग जिन्हें आवाजें सुनाई देती थीं या जिन्हें कुछ मानसिक या दिमाग से जुड़ी समस्याएं थीं. दूसरे वे लोग जो आध्यात्मिक बातों में विश्वास रखते थे. तीसरे वे खिलाड़ी थे, जो अकेले लंबी दूरी तक दौड़ने या मुश्किल खेलों में हिस्सा लेते थे. इन सभी लोगों से ऑनलाइन सवाल पूछे गए और उनके जवाबों की तुलना की गई.
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206 लोगों पर कैसे हुई रिसर्च?
वैज्ञानिकों ने इस रिसर्च में तीन समूह बनाए. पहले समूह में 75 लोग थे. इनमें ऐसे लोग शामिल थे जिन्हें आवाजें सुनाई देने का अनुभव था या जिन्हें मानसिक और दिमाग से जुड़ी कुछ समस्याएं थीं. दूसरे समूह में 47 लोग थे, जो आध्यात्मिक गतिविधियों से जुड़े थे. तीसरे समूह में 84 खिलाड़ी शामिल थे, जो लंबी दूरी तक दौड़ते थे या अकेले मुश्किल खेलों में हिस्सा लेते थे.
इन सभी लोगों से पूछा गया कि उन्हें किसी अनदेखे व्यक्ति की मौजूदगी कब महसूस होती है. उनसे यह भी पूछा गया कि क्या ऐसा होने पर उन्हें डर लगता है, किसी की आवाज सुनाई देती है या शरीर में कुछ अलग महसूस होता है. वैज्ञानिक यह समझना चाहते थे कि अलग-अलग लोगों को होने वाले इन अनुभवों में क्या समानता है.
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लोगों को कैसा एहसास होता है?
रिसर्च में शामिल कई लोगों ने बताया कि उन्हें लगता था कि कोई उनके पीछे खड़ा है या उनके आसपास मौजूद है. कुछ लोगों को किसी के छूने का एहसास होता था, जबकि कुछ को आवाजें सुनाई देती थीं. कई लोगों को ऐसा भी लगता था कि कोई उन्हें देख रहा है. हर व्यक्ति का अनुभव अलग था. कुछ लोगों को इस एहसास से डर नहीं लगता था. उन्हें लगता था कि उनका कोई करीबी उनके आसपास है, जिसकी मौत हो चुकी है.

वहीं, कुछ लोगों को बहुत डर लगता था. उन्हें लगता था कि आसपास मौजूद कोई अनदेखी ताकत उन्हें नुकसान पहुंचा सकती है. कुछ खिलाड़ियों ने भी बताया कि मुश्किल खेलों के दौरान या अकेले रहने पर उन्हें किसी के साथ होने का एहसास हुआ. इससे पता चला कि ऐसे अनुभव सिर्फ एक तरह के लोगों तक सीमित नहीं थे. हालांकि, इन अनुभवों से यह साबित नहीं होता कि वहां सच में कोई भूत या आत्मा मौजूद थी.
नींद और डर से भी हो सकता है संबंध
रिसर्च में पाया गया कि जिन लोगों को आवाजें सुनाई देने या दूसरी तरह के भ्रम होने का अनुभव था, उनमें किसी की मौजूदगी महसूस होने की संभावना भी ज्यादा थी. कुछ लोगों में डर और शक की भावना भी इस अनुभव से जुड़ी हुई थी. आध्यात्मिक गतिविधियों से जुड़े लोगों ने बताया कि उन्हें ध्यान लगाने या आत्माओं से संपर्क करने की कोशिश के दौरान ऐसा महसूस हुआ.
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वहीं, आवाजें सुनने वाले कुछ लोगों ने किसी के छूने या शरीर में बदलाव महसूस होने की बात कही. नींद से जुड़ी एक बात भी सामने आई. तीनों समूहों के कुछ लोगों ने बताया कि उन्हें सोते समय या नींद से जागने के दौरान किसी की मौजूदगी महसूस हुई. ऐसा नींद और जागने के बीच होने वाले अनुभवों के कारण भी हो सकता है. हालांकि, रिसर्च से यह साबित नहीं हुआ कि हर व्यक्ति के साथ ऐसा होने की वजह एक ही है.

क्या वैज्ञानिकों को भूतों का सबूत मिला?
इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने पाया कि अलग-अलग लोगों को किसी की मौजूदगी महसूस होने के अनुभवों में कुछ समानताएं थीं. लेकिन सभी लोगों के अनुभव एक जैसे नहीं थे. रिसर्च से यह भी पता चला कि ऐसे अनुभवों का संबंध भ्रम, डर और नींद से जुड़ी कुछ स्थितियों से हो सकता है.
हालांकि, वैज्ञानिक अब तक यह नहीं बता पाए हैं कि ऐसा महसूस होने की असली वजह क्या है. इस रिसर्च में भूतों या आत्माओं के होने का कोई सबूत नहीं मिला. इस विषय को बेहतर तरीके से समझने के लिए अभी और रिसर्च की जरूरत है. इसलिए किसी की मौजूदगी महसूस होना इस बात का सबूत नहीं है कि वहां सच में कोई भूत या आत्मा मौजूद है.