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समंदर में बिना क्रू के बह रहा रूसी टैंकर, ड्रोन हमले का हुआ था शिकार... ये है खतरा

रूस का तेल टैंकर आर्कटिक मेटागाज़ इटली-माल्टा के बीच बिना क्रू के कई दिनों से बह रहा है. 3 मार्च को ड्रोन हमले में 30 सदस्यीय चालक दल ने जहाज छोड़ दिया. इसमें 900 मीट्रिक टन डीजल और 60,000 मीट्रिक टन एलएनजी है, जो पर्यावरण के लिए टाइम बम है. इटली चिंतित है कि बदलती हवाओं से यह उसके तट की ओर आ सकता है.

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रूसी तेल टैंकर आर्कटिक मेटागाज इस महीने की शुरुआत में ड्रोन हमले का शिकार हुआ था. (Photo: Reuters)
रूसी तेल टैंकर आर्कटिक मेटागाज इस महीने की शुरुआत में ड्रोन हमले का शिकार हुआ था. (Photo: Reuters)

इटली और माल्टा के बीच भूमध्यसागर में एक रूसी तेल टैंकर कई दिनों से बिना क्रू के बह रहा है. इसे लेकर समुद्री अधिकारियों ने चेतावनी दी है. इस टैंकर को पर्यावरण के हिसाब से 'टाइम बम' बताया जा है. क्योंकि इसमें भारी मात्रा में फ्यूल और गैस मौजूद है. जो किसी भी समय बड़ा पर्यावरण के लिए खतरा है. 

हेलिकॉप्टर से देखने में पता चला कि जहाज का एक हिस्सा काला हुआ पड़ा है. एक तरफ झुका हुआ है. इसके बाएं हिस्से (पोर्ट साइड) में एक बड़ा छेद भी नजर आता है. इसके आसपास के समंदर के पानी में एक पतली परत जैसी दिख रही है, जिससे प्रदूषण की आशंका और बढ़ गई है.

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इस जहाज का नाम आर्कटिक मेटागाज़ है, जिसे रूस चलाता है. इटली के अधिकारियों ने बताया कि इस जहाज में लगभग 900 मीट्रिक टन डीजल ईंधन और 60,000 मीट्रिक टन से अधिक एलएनजी (LNG) मौजूद है, जो अब भी जहाज के ढांचे में सुरक्षित मानी जा रही है. 

शैडो फ्लीट का हिस्सा हो सकता है ये टैंकर

यह टैंकर रूस के तथाकथित शैडो फ्लीट का हिस्सा हो सकता है. यह फ्लीट उन पुराने जहाजों का समूह है, जिनका उपयोग रूस द्वारा अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद सीक्रेट तरीके से तेल और गैस के ट्रांसपोर्ट के लिए किया जाता है. ये प्रतिबंध अमेरिका और यूरोपीय देशों ने 2022 में यूक्रेन-रूस जंग की वजह से लगाए थे.  

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Russian oil tanker

करीब 277 मीटर लंबे इस जहाज ने रूस के आर्कटिक बंदरगाह मुरमान्स्क से यात्रा शुरू की थी. ये मिस्र की ओर जा रहा था. ट्रैकिंग वेबसाइट के अनुसार यह अपनी यात्रा के दौरान 3 मार्च को भूमध्यसागर के अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में, माल्टा से लगभग 311 km मील दक्षिण-पूर्व में एक ड्रोन हमले का शिकार हो गया.

रूस का दावा- ड्रोन हमला किया गया टैंकर पर

रूस के विदेश मंत्रालय ने दावा किया है कि इस जहाज पर समुद्री और हवाई ड्रोन से हमला किया गया. इस हमले के बाद जहाज में आग लग गई, जिसके चलते 30 सदस्यीय चालक दल को जहाज छोड़ना पड़ा. कुछ सदस्य इस दौरान झुलस भी गए थे. बाद में सभी को लाइफबोट के जरिए सुरक्षित निकाला गया. लीबिया के तट रक्षक बल की मदद से बेन्गाजी पहुंचाया गया. इस ऑपरेशन में लीबिया स्थित रूसी दूतावास ने भी सहयोग किया.

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रूस की विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़ाखारोवा ने इस घटना को आतंकवादी हमला करार दिया. इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताया. यह घटना यूरोपीय संघ के एक सदस्य देश के बेहद करीब हुई, लेकिन अब तक किसी यूरोपीय देश ने इसकी निंदा नहीं की है.

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रूस के परिवहन मंत्रालय ने इस हमले के लिए यूक्रेनी नौसैनिक ड्रोन को जिम्मेदार ठहराया है, हालांकि यूक्रेन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.

इटली की चिंता- हवा बदली तो जहाज आएगा उनकी तरफ

यह घटना अंतरराष्ट्रीय जल में हुई, लेकिन अब इटली की सरकार इस बात को लेकर चिंतित है कि बदलती हवाओं के कारण यह जहाज इटली के तट के और करीब आ सकता है. इस स्थिति पर चर्चा के लिए इटली में एक विशेष बैठक आयोजित की गई, जिसमें रक्षा, विदेश, ऊर्जा, समुद्री और नागरिक सुरक्षा विभागों के मंत्री शामिल हुए. इस बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने की.

बैठक में विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि इस जहाज को किसी बंदरगाह पर लाना सुरक्षित नहीं होगा. इसे गैस से भरा टाइम बम बताया. इसके चलते सरकार ने फिलहाल इसे बंदरगाह से दूर रखने का फैसला किया है. इटली और माल्टा दोनों देशों ने इस स्थिति से निपटने के लिए टगबोट्स और प्रदूषण नियंत्रण उपकरण तैयार रखे हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके. 

Russian oil tanker

जहाज पर कोई इंसान मौजूद नहीं है

जहाज का नियंत्रण पूरी तरह खत्म हो चुका है. इसमें कोई भी व्यक्ति मौजूद नहीं है. ऐसे में इसे सुरक्षित स्थान पर ले जाना या निष्क्रिय करना एक बड़ी चुनौती बन गया है. तकनीकी रूप से जहाज को बचाने और उसकी जिम्मेदारी उसके रूसी मालिक एलएलसी एसएमपी टेकमैनेजमेंट पर है, लेकिन अब तक इटली या माल्टीज अधिकारियों को इस कंपनी से कोई संपर्क नहीं मिला है.

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माल्टा के अधिकारियों ने एक विशेष समुद्री बचाव दल को नियुक्त किया है, जो यह तय करेगा कि जहाज को सुरक्षित रूप से किसी बंदरगाह तक खींचा जा सकता है. फिर समुद्र में ही डुबो देना बेहतर विकल्प होगा. हालांकि जहाज को समुद्र में डुबाना भी गंभीर पर्यावरणीय खतरे पैदा कर सकता है.

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बड़ा पर्यावरणीय खतरा बह रहा समंदर में

WWF ने इस घटना को लेकर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यदि इस जहाज से ईंधन या गैस का रिसाव होता है, तो इससे समुद्री जीवन और पर्यावरण को अपूरणीय क्षति हो सकती है. इस जहाज में मौजूद एलएनजी अत्यंत खतरनाक है. इसके रिसाव से आग लगने, जहरीले गैस के बादल बनने और समुद्री जीवों की मौत का खतरा है.

जिस क्षेत्र में यह जहाज बह रहा है, वह भूमध्य सागर के सबसे संवेदनशील और जैव विविधता से भरपूर इलाकों में से एक है. यहां ब्लूफिन टूना और स्वोर्डफिश जैसी महत्वपूर्ण प्रजातियां पाई जाती हैं. यह क्षेत्र कई संरक्षित समुद्री जीवों का आवास भी है.

यदि इस क्षेत्र में प्रदूषण फैलता है, तो इसका असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा, जो मुख्य रूप से मछली पकड़ने और पर्यटन पर निर्भर है. विशेष रूप से पेलाजिए द्वीप समूह, जिसमें लैम्पेडुसा और लिनोसा शामिल हैं. इस संकट से गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं.

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