जर्मनी की राइन नदी का पानी इस हफ्ते फिर कम हो गया है. लगातार कम बारिश के कारण शुक्रवार को काओब के पास नदी का नेविगेबल वाटर गेज करीब 21 सेंटीमीटर रह गया. पानी कम होने से कार्गो जहाज कम सामान लेकर चल रहे हैं. इससे सामान भेजने का खर्च बढ़ गया है.
राइन यूरोप का एक बड़ा शिपिंग रूट है. इसके रास्ते अनाज, धातु अयस्क, कोयला और रिफाइंड ऑयल प्रोडक्ट्स जैसी चीजें भेजी जाती हैं. लेकिन पानी कम होने पर जहाजों में ज्यादा सामान भरना मुश्किल हो जाता है. इसलिए कम सामान लेकर जहाज चलाने पड़ते हैं या एक ही सामान को कई जहाजों में भेजना पड़ता है. इससे ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ जाता है.
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इसका असर जर्मनी की कंपनियों पर भी पड़ रहा है. इस गर्मी में कम पानी की वजह से कंपनियों का ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ा था. सामान पहुंचाने में दिक्कत आई थी और कुछ जगहों पर प्रोडक्शन भी कम करना पड़ा था. अब पानी फिर कम होने से परेशानी बढ़ सकती है. कुछ सामान नदी की जगह सड़क और रेलवे से भेजा जा रहा है.

काओब में सिर्फ 21 सेंटीमीटर रह गया पानी
राइन के काओब इलाके में शुक्रवार को नेविगेबल वाटर गेज करीब 21 सेंटीमीटर दर्ज किया गया. सोमवार को यह 34 सेंटीमीटर था, जबकि पिछले हफ्ते करीब 50 सेंटीमीटर था. यानी कुछ ही दिनों में पानी काफी कम हो गया. अगस्त के बीच में यहां पानी 10 सेंटीमीटर से भी नीचे चला गया था. यह 2018 में दर्ज 25 सेंटीमीटर के पुराने सबसे कम स्तर से भी नीचे था.
यहां एक बात समझना जरूरी है. वाटर गेज का आंकड़ा नदी की पूरी गहराई नहीं बताता. इस जगह राइन नदी की असली गहराई गेज के आंकड़े से करीब 1 मीटर ज्यादा है. फिर भी गेज का स्तर कम होने पर जहाजों के लिए ज्यादा सामान लेकर चलना मुश्किल हो जाता है.
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एक हफ्ते में बढ़ा शिपिंग खर्च
पानी कम होने से जहाज अपनी पूरी क्षमता के साथ सामान नहीं ले पा रहे हैं. ऐसे में एक ही मात्रा का सामान भेजने के लिए ज्यादा जहाजों की जरूरत पड़ सकती है. इसका सीधा असर ट्रांसपोर्ट के खर्च पर पड़ रहा है. शुक्रवार को रॉटरडैम से कार्ल्सरूहे के बीच टैंकर ट्रांसपोर्ट का रेट करीब 165 से 170 यूरो प्रति टन पहुंच गया. पिछले हफ्ते यह करीब 100 यूरो प्रति टन था. यानी सिर्फ एक हफ्ते में रेट करीब 65 से 70 फीसदी बढ़ गया.

बारिश नहीं हुई तो बढ़ सकती है परेशानी
जर्मनी की इनलैंड नेविगेशन एजेंसी डब्ल्यूएसवी के मुताबिक, अगले एक हफ्ते में नदी के पानी में बड़ी बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं है. हालांकि, अगर राइन के आसपास के इलाकों में बारिश होती है तो पानी का स्तर अभी के आसपास बना रह सकता है.
इस गर्मी में जर्मनी और यूरोप के कई हिस्सों में तेज गर्मी पड़ी और बारिश कम हुई. इसका असर राइन समेत कई नदियों पर पड़ा है. फिलहाल राइन में जहाज चल रहे हैं, लेकिन उन्हें कम सामान लेकर चलना पड़ रहा है. अगर पानी और कम हुआ तो ट्रांसपोर्ट का खर्च और बढ़ सकता है और कंपनियों को सड़क और रेलवे पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ सकता है.