दुनिया के सबसे साहसी पर्वतारोहियों में गिने जाने वाले निर्मल पुर्जा की टीम 30 जुलाई 2026 को पाकिस्तान के कराकोरम रेंज में स्थित ब्रॉड पीक पर एक भयानक हिमस्खलन यानी एवलांच का शिकार हो गई. ब्रॉड पीक दुनिया का 12वां सबसे ऊंचा पर्वत है, जिसकी ऊंचाई लगभग 8047 मीटर है. इस घटना से पहले बेस कैंप से ली गई एक तस्वीर और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें पुर्जा और उनके साथी पर्वत पर चढ़ते दिख रहे हैं. निर्मल पुर्जा का शव मिलने की पुष्टि हो चुकी है.
पाकिस्तान के टूर ऑपरेटर कराकोरम विजन ने इस फोटो को इंस्टाग्राम पर शेयर किया. बताया कि यह तस्वीर ठीक त्रासदी से पहले कैप्चर की गई थी. बेस कैंप से देखने वाले लोगों ने 10 अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहियों को ऊपर जाते देखा. अचानक ऊपर से विशाल बर्फ की दीवार ढह पड़ी.
बर्फ साफ होने के बाद ऊपरी ढलानों पर कोई नहीं दिख रहा था. वीडियो में एक महिला की चीख सुनाई देती है- ओह माय गॉड. वे डरे हुए हैं कि कहीं हिमस्खलन बेस कैंप तक तो नहीं पहुंच जाएगा. यह दृश्य पूरे पर्वतारोहण जगत को झकझोर गया क्योंकि पुर्जा जैसे अनुभवी व्यक्ति भी प्रकृति के सामने असहाय साबित हुए.
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हिमस्खलन सुबह करीब 9 बजे के आसपास हुआ, जब टीम कैंप 2 और कैंप 3 के बीच लगभग 6500 से 7000 मीटर की ऊंचाई पर थी. जीपीएस ट्रैकर्स ने तेजी से ऊंचाई कम होने का संकेत दिया, जिससे साफ था कि पर्वतारोही बर्फ के साथ नीचे खिसक गए. पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में खोज-बचाव अभियान शुरू किया गया. खराब मौसम और दुर्गम इलाके के कारण हेलीकॉप्टर उड़ान भरने में दिक्कत आई.
ड्रोन फुटेज से कई शवों के संकेत मिले. अब तक चार शव पाए गए हैं, जिनमें से तीन की पहचान हो चुकी है-अमेरिकी मैलोरी गीस, ओमान की नधीरा अहमद अब्दुल्ला अल हर्थी और नेपाल के पुर बहादुर गुरुंग. पुर्जा की कंपनी एलीट एक्सपेड ने शनिवार को पुष्टि की कि निर्मल पुर्जा और अन्य सदस्यों की मृत्यु हो गई है. खोज अब भी जारी है. इलाका बहुत दूर और चुनौतीपूर्ण है, जहां मौसम और ऊंचाई काम को और मुश्किल बना रहे हैं.
निर्मल पुर्जा की उपलब्धियां और अंतिम संदेश
43 वर्षीय निर्मल पुर्जा नेपाल मूल के ब्रिटिश नागरिक थे. वे ब्रिटिश आर्मी में गोरखा के रूप में सेवा दे चुके थे. स्पेशल बोट सर्विस का हिस्सा थे. 2019 में उन्होंने दुनिया के सभी 14 आठ-हजार मीटर से ऊंचे पर्वतों को सिर्फ छह महीने से कुछ ज्यादा समय में फतह किया था. वे बिना ऑक्सीजन के इन चोटियों पर दो बार चढ़ने के करीब थे.
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इस अभियान से पहले उन्होंने एक्स पर लिखा था कि मूल योजना सिर्फ गाशरब्रम II चढ़ने की थी, लेकिन ब्रॉड पीक जोड़कर वे इतिहास रच सकते थे. उनका अंतिम संदेश था- ब्रॉड पीक, मैं सिर्फ सुरक्षित आना-जाना मांगता हूं. मैं किसी पहाड़ को हल्के में नहीं लेता.
जोखिम, तैयारी और सबक
यह घटना पर्वतारोहण की दुनिया में जोखिमों को फिर से उजागर करती है. ब्रॉड पीक को अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है, फिर भी हालिया भारी बर्फबारी के बावजूद कुछ टीमें आगे बढ़ीं. हिमस्खलन अक्सर ऊपर से ट्रिगर होता है और निचले क्षेत्रों को पूरी तरह ढक देता है. पुर्जा जैसे अनुभवी लोग भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं होते क्योंकि पहाड़ अपनी शर्तों पर चलते हैं.
खोज अभियान में मौसम, ऊंचाई और रिमोट लोकेशन बड़ी बाधाएं हैं. इससे यह सबक मिलता है कि आधुनिक ट्रैकिंग डिवाइस, ड्रोन और हेलीकॉप्टर मदद करते हैं, लेकिन प्रकृति के सामने तकनीक की सीमाएं हैं. पर्वतारोही समुदाय अब सुरक्षा प्रोटोकॉल, मौसम पूर्वानुमान और टीम समन्वय पर और जोर देने की बात कर रहा है.
पुर्जा की मौत ने लाखों लोगों को प्रेरित करने वाले व्यक्ति को हमेशा के लिए छीन लिया, लेकिन उनकी विरासत साहस, विनम्रता और मानव क्षमता की याद दिलाती रहेगी. यह त्रासदी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण परिवार की है. नेपाल के प्रधानमंत्री सहित दुनिया भर से संवेदनाएं व्यक्त की जा रही हैं.