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सात दिन में धुआं-धुआं हो गया कोच्चि, कचरा प्लांट की आग से निकल रहा जहर... क्यों हुआ ऐसा?

सात दिन हो चुके हैं कोच्चि के कचरा प्लांट में आग लगे हुए. एक हफ्ते में जहरीले धुएं ने पूरे शहर को घेर लिया है. अब तो लोगों को सांस लेने में भी दिक्कत हो रही है. केरल के हाईकोर्ट ने भी सरकार को फटकार लगाई है. शहर को गैस चेंबर तक बोल दिया है. आइए जानते हैं कि देश का ये शहर धुआं-धुआं क्यों है?

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सात दिन से कोच्चि शहर इसी तरह के धुएं में घिरा हुआ है. लोगों को अब सांस लेने में दिक्कत होने लगी है. (फोटोः एपी)
सात दिन से कोच्चि शहर इसी तरह के धुएं में घिरा हुआ है. लोगों को अब सांस लेने में दिक्कत होने लगी है. (फोटोः एपी)

2 मार्च 2023 को केरल के बंदरगाह शहर कोच्चि के ब्रह्मपुरम इलाके के कचरा प्लांट में आग लगी. तब से आग बुझ नहीं रही है. जलते हुए कचरे से निकल रहा धुआं जहरीला है. इसने पूरे शहर को अपनी गिरफ्त में कर लिया है. लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है. धुएं की वजह से आंखों में जलन हो रही है. लोग अब सोशल मीडिया पर शिकायत कर रहे हैं. 

केरल हाईकोर्ट के जस्टिस एसवी भट्टी और बसंत बालाजी ने सरकार और प्रशासन को फटकार लगाई है. कहा कि शहर गैस चेंबर बना हुआ है. कोच्चि के लोग इस चेंबर में फंसे हुए हैं. जल्द से जल्द इस आग को बुझाने का निर्देश भी दिया. या हालात तब हैं, जब इस शहर में कोई और इंडस्ट्री नहीं है. हैदराबाद और सिकंदराबाद जैसे औद्योगिक शहरों में ऐसे हालात नहीं होते, तो फिर यहां ऐसा क्यों है. 

कोच्चि के ब्रह्मपुरम के कचरा प्लांट में 2 मार्च को आग लग गई थी. (फोटोः साउदर्न नेवल कमांड/इंडियन नेवी)
कोच्चि के ब्रह्मपुरम के कचरा प्लांट में 2 मार्च को आग लग गई थी. (फोटोः साउदर्न नेवल कमांड/इंडियन नेवी)

कोर्ट ने कोच्चि कॉर्पोरेशन के सचिव और केरल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के चेयरमैन को भी इस स्थिति पर नियंत्रण पाने का आदेश दिया है. साथ ही सवाल पूछा है कि क्या ये आग मानवीय गलती है. क्या कचरा प्लांट की लगातार जांच होती आई हैं. अवैध कचरा डंप करने को लेकर क्या कदम उठाए जा रहे हैं. पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड द्वारा जमा किए गए कागजों से लगता है कि सच्चाई हकीकत से बहुत दूर है. कोच्चि में 6 जून से पहले कचरे का मैनेजमेंट सही होना चाहिए. 

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प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के निर्देश नहीं मानता कोच्चि कॉर्पोरेशन

केरल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने आरोप लगाया है कि कोच्चि कॉर्पोरेशन प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने के लिए बोर्ड द्वारा दिए गए निर्देशों को नहीं मानता. इस वजह से प्रदूषण बढ़ता जा रहा है. इस पर कोर्ट ने कहा कि अलग-अलग अथॉरिटी एकदूसरे पर आरोप न लगाएं, तत्काल इस प्रदूषण के स्तर को सुधारें. 

Kochi Waste Plant Fire Pollution
कचरा प्लांट में आग बुझाता नौसेना का हेलिकॉप्टर. (फोटोः साउदर्न नेवल कमांड/इंडियन नेवी)

30 फायर फाइटर टैंक्स, नौसेना के हेलिकॉप्टर आग बुझाने में लगे

ब्रह्मपुरम कचरा प्लांट में लगे आग को बुझाने में अग्निशमन दल के 30 टैंकर, नौसेना के हेलिकॉप्टर्स और जवान लगे हुए हैं. भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम से यंत्र लेकर इस कचरे की आग बुझाने का प्रयास जारी है. लेकिन स्थिति सुधर नहीं रही है. शहर पूरा धुएं में लिपटा हुआ है. आखिर ये प्रदूषण इस तरह से फैला कैसे? 

आग लगने के बाद लगातार गिरती गई कोच्चि की AQI

2 मार्च को कचरा प्लांट में आग लगने के बाद से वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में लगातार गिरावट आई है. यानी हवा में PM 2.5 और PM 10 की मात्रा बढ़ी है. पहले समझिए कि 2 मार्च से लेकर 8 मार्च तक कोच्चि शहर का एक्यूआई कितना बढ़ा. 2 मार्च को एक्यूआई 103 था जो 7 मार्च को दोगुने से ज्यादा होकर 215 हो गया था. पूरे हफ्ते वायु की गुणवत्ता में गिरावट आती ही चली गई है. 

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2 मार्च    103
4 मार्च    186
5 मार्च    184
6 मार्च    148
7 मार्च    215
8 मार्च    158

Kochi Waste Plant Fire Pollution
कम ज्यादा होती हवा की गति और लगातार बढ़ी हुई ह्यूमिडिटी की वजह से पूरे शहर में फैल गया धुआं. (फोटोः Indian Navy) 

क्या इस प्रदूषण में मौसम भी खेल रहा है? 

2 मार्च यानी जिस दिन आग लगी, उस दिन कोच्चि का अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस था. ह्यूमिडिटी अधिकतम 93 फीसदी थी. औसत 65 फीसदी थी. सुबह हवा नहीं थी लेकिन दोपहर से शाम तक 9 से 11 किमी प्रतिघंटा के गति से हवा चली है. तीन को बादल छाए थे. ह्यूमेडिटी अधिकतम 84 फीसदी थी. हवा का बहाव सुबह 11 किमी प्रतिघंटा था. रात में कोहरा छाया. लेकिन असल में वो कोहरा नहीं था. कोच्चि के कचरा प्लांट से निकले धुएं की वजह से ऐसा दिख रहा था. 

चार मार्च को अधिकतम ह्यूमिडिटी 93 फीसदी थी. हवा की गति कम हो गई. बादल, कोहरा और धुंध जैसी हालत थी. पांच को लगभग यही हालात थे. छह को हवा 15 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चली जिसने आग की वजह से निकल रहे धुएं को और फैलाया. ह्यूमिडिटी 78 फीसदी थी. सात को फिर हवा नहीं चली. ह्यूमिडिटी 80 फीसदी थी. 8 को ह्यूमिडिटी और हवा की गति में कमी आई. मौसम के इन आंकड़ों से क्या पता चलता है. 

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Kochi Waste Plant Fire Pollution
आग पर काबू पाने का प्रयास तेजी से किया जा रहा है. (फोटोः PTI)

हवा की गति कम होना, ह्यूमिडिटी का बढ़ना.. रोक देता है प्रदूषण को हवा में

जब भी किसी शहर में हवा की गति कम होगी. समुद्र पास होने की वजह से ह्यूमेडिटी बढ़ जाती है. हवा में पानी के कणों की मात्रा बढ़ जाती है. ऐसे में किसी भी जगह से अगर प्रदूषणकारी धुआं निकल रहा है, तो वह हवा में मौजूद पानी के कणों के साथ बैठ जाता है. लोगों को सांस लेने में दिक्कत करता है. 

अगर तेज बारिश हो जाए तो इस समस्या से छुटकारा मिल सकता है. लेकिन मौसम विभाग के अनुसार 11 मार्च से पहले बारिश के आसार नहीं हैं. अगले एक हफ्ते तक सूरज और बादल आंख-मिचौली खेलते रहेंगे. तापमान 33 और 24 के बीच झूलता रहेगा. ह्यूमिडिटी 55 से 67 के बीच औसत बनी रहेगी.

क्या कहा शहर के अधिकारियों ने... 

कोच्चि के कलेक्टर एनएसके उमेशन ने कहा कि मैंने आज ही चार्ज लिया है. बुरी स्थिति है यहां पर. मैंने मीटिंग भी की है. हमें फिलहाल ये नहीं पता है कि ये आग कब बुझेगी. हमें साइंटिफिक स्टडी करानी होगी. वह उम्मीद है जल्दी हो जाएगी. मेरे से पहले जो कलेक्टर रेनु राज थे, उन्होंने बहुत अच्छा काम किया है. इसे बुझाने के लिए गजब का प्लान बनाया गया है. 

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कोच्चि के मेयर अनिल कुमार ने कहा कि हमारी मीटिंग हुई है. रात में भी काम चल रहा है. जैसे ही ये आग बुझेगी. समस्या का समधाना होना शुरू हो जाएगा. लेकिन हमें यह नहीं पता कि ये आग कब बुझेगी. जलवायु, मौसम और कई अन्य चीजों पर नजर रखी जा रही है. (इनपुटः शिबी)

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