scorecardresearch
 

अब आम नागरिक भी बनेंगे गगनयान के एस्ट्रोनॉट, ISRO कर रहा बड़ी तैयारी

इसरो अब गगनयान मिशन के बाद आम नागरिकों को भी अंतरिक्ष यात्री बनाएगा. दूसरे बैच में 4 सिविलियन STEM विशेषज्ञ और 6 सैन्य पायलट शामिल किए जाएंगे. सिविलियंस चौथे क्रूड मिशन से उड़ान भरेंगे. ISRO भविष्य में भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और नियमित मानव मिशनों के लिए 40 सदस्यों का मजबूत अंतरिक्ष यात्री दल तैयार कर रहा है.

Advertisement
X
अब एयरफोर्स पायलट के साथ देश के आम नागरिकों को भी एस्ट्रोनॉट बनने का मौका मिलेगा. (Photo: ITG)
अब एयरफोर्स पायलट के साथ देश के आम नागरिकों को भी एस्ट्रोनॉट बनने का मौका मिलेगा. (Photo: ITG)

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अब गगनयान मिशन के आगे की तैयारी में एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है. ISRO के अंतरिक्ष यात्री चयन और प्रबंधन समिति ने सिफारिश की है कि दूसरे बैच में 4 आम नागरिकों (सिविलियंस) को भी शामिल किया जाए. ये नागरिक विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के विशेषज्ञ होंगे. 

उनके साथ 6 मिशन पायलट भारतीय वायुसेना की सैन्य पृष्ठभूमि से लिए जाएंगे. इस फैसले से साफ है कि ISRO अब सिर्फ टेक्नोलॉजी साबित करने से आगे बढ़कर नियमित अंतरिक्ष मिशनों, वैज्ञानिक काम और भविष्य के भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए एक मजबूत अंतरिक्ष यात्री दल तैयार कर रहा है.

यह भी पढ़ें: गाजियाबाद की पॉश सोसाइटी में आग... हाई-राइज में सबसे बड़ा खतरा स्टैक इफेक्ट और फायर ट्रायंगल

पहला बैच केवल फाइटर पायलट, दूसरा बैच में होगा मिश्रण

गगनयान के पहले बैच में चारों अंतरिक्ष यात्री एयर कमोडोर प्रशांत नायर, ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, अजित कृष्णन और अंगद प्रताप थे. ये सभी फाइटर प्लेन पायलट और टेस्ट पायलट थे. अब दूसरे बैच में बदलाव आ रहा है. इसमें 6 मिशन पायलट सैन्य एविएशन बैकग्राउंड से होंगे, जिनमें फाइटर पायलटों के अलावा भारतीय वायुसेना के कॉम्बैट हेलिकॉप्टर पायलट भी शामिल किए जा सकते हैं. 

Advertisement

Isro gaganyaan civilian astronauts

समिति ने कुल 10 अंतरिक्ष यात्रियों का पूल बनाने की सिफारिश की है, जिसमें 4 सिविलियन STEM विशेषज्ञ होंगे. हालांकि इन सिविलियंस को गगनयान के शुरुआती मिशनों में नहीं भेजा जाएगा. वे चौथे क्रूड (मानवयुक्त) गगनयान मिशन से ही अंतरिक्ष में उड़ान भर सकेंगे. दुनिया भर में भी यही तरीका अपनाया जाता है – पहले सैन्य प्रशिक्षित पायलटों को भेजा जाता है जब तक टेक्नोलॉजी पूरी तरह सही और सुरक्षित न हो जाए.

क्यों खोला जा रहा है सिविलियंस के लिए रास्ता?

यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ISRO अब गगनयान को सिर्फ एक या दो मिशन तक सीमित नहीं रखना चाहता. भविष्य में साल में दो मानवयुक्त मिशन करने की योजना है. अंतरिक्ष यात्री एक मिशन से लौटने के दो साल बाद फिर उड़ान भर सकते हैं. 

यह भी पढ़ें: भारत गर्मी से जूझ रहा, चीन बाढ़ से... क्विंगझाऊ-ग्वागंशी में सड़कें-गाड़ियां डूबीं, मौसम में इतना अंतर कैसे

पूरा प्रोसेस ये है – सेलेक्शन, ट्रेनिंग और मिशन तैयारी – में करीब 4.5 साल लगते हैं. शुरुआत में समिति ने सोचा था कि 7 अंतरिक्ष यात्री काफी होंगे, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मिशनों के अवसर और कुछ लोगों के छूट जाने की संभावना को देखते हुए संख्या बढ़ाकर 10 कर दी गई. 

Isro gaganyaan civilian astronauts

सातवें क्रूड मिशन से क्रू साइज दो से बढ़ाकर तीन करने की भी योजना है. इससे गगनयान क्रू मॉड्यूल की क्षमता बढ़ाई जाएगी. यह विस्तार भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन) की लंबी अवधि की योजनाओं से जुड़ा है, जहां वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए ज्यादा विविध और बड़े अंतरिक्ष यात्री दल की जरूरत पड़ेगी.

Advertisement

तीसरे बैच में और ज्यादा बदलाव, कुल 40 तक पहुंच सकता है दल

तीसरे बैच के लिए समिति ने 12 अंतरिक्ष यात्रियों की जरूरत बताई है. इसमें अनुपात बहुत बदल जाएगा – सिर्फ 2 मिशन पायलट और 10 विशेषज्ञ (सिविलियंस). कुल मिलाकर ISRO एक मजबूत अंतरिक्ष यात्री कैडर (दल) बनाने की सोच रहा है, जिसकी ताकत 40 तक पहुंच सकती है. 

यह भी पढ़ें: पानी के लिए पहले दो परिवार लड़े, फिर पूरा इलाका, आखिर में सेना को उतरना पड़ा... 42 मौतों से दहल उठा ये देश

दूसरे बैच की तैयारियों का लक्ष्य 72 महीने (6 साल) में रखा गया है, जबकि तीसरे बैच को 96 महीने (8 साल) में तैयार करना है. लंबे समय की अनिश्चितताओं और वैश्विक अवसरों को देखते हुए बड़े मार्जिन के साथ प्लानिंग की जा रही है.

Isro gaganyaan civilian astronauts

चुनौतियां भी हैं

अंतरिक्ष यात्री चयन की प्रक्रिया सही दिशा में बढ़ रही है, लेकिन ISRO को कुछ क्षेत्रों में अभी काफी काम करना बाकी है. फिलहाल ISRO के पास केवल एक अस्थाई अंतरिक्ष यात्री ट्रेनिंग सेंटर है. पूर्ण सुविधाओं वाला स्थाई प्रशिक्षण केंद्र अभी बनना बाकी है. 

टेक्नोलॉजी के मामले में भी चुनौतियां हैं. खासतौर पर ECLSS (एनवायरनमेंट कंट्रोल एंड लाइफ सपोर्ट सिस्टम) अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुआ है. यह सिस्टम बिना अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजा नहीं जा सकता, क्योंकि यह ऑक्सीजन, तापमान, दबाव और अन्य जरूरी चीजों को नियंत्रित करता है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: गर्मी की प्रचंडता से ज्यादा चर्चा में है तीव्रता... इतनी तेज क्यों आई, क्या इसका पेड़ों के डेटा से कनेक्शन है?

सिविलियंस को अंतरिक्ष यात्री बनने का रास्ता खोलना ISRO की सोच में बड़े बदलाव को दिखाता है. पहले बैच में केवल सैन्य पायलटों से शुरू करके अब STEM विशेषज्ञों को शामिल करना भारत को नियमित मानव अंतरिक्ष उड़ानों और भविष्य के अंतरिक्ष स्टेशन के लिए तैयार कर रहा है. यह कदम भारत को अंतरिक्ष में एक स्थाई उपस्थिति बनाने की दिशा में मजबूत बनाएगा, बशर्ते ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और जरूरी टेक्नोलॉजी को भी तेजी से विकसित किया जाए. 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement