2026 की ईरान-अमेरिका-इजरायल जंग में मिडिल ईस्ट के तेल और गैस प्लांट्स पर भारी हमले हो रहे हैं. ईरान के जवाबी हमलों में सऊदी अरब, कतर और यूएई के तेल फैसिलिटी पर ड्रोन और मिसाइलें गिराई गई हैं.
इससे आग लग गई है. तेल का रिसाव हो रहा है. दुनिया का 20 फीसदी तेल इसी इलाके से गुजरता है इसलिए इन प्लांट्स में लगी आग जल्दी बुझानी पड़ेंगी. वैज्ञानिक और फायर एक्सपर्ट कहते हैं कि तेल के कुएं या प्लांट की आग बहुत खतरनाक होती है क्योंकि तेल लगातार निकलता रहता है. आग बुझाने में दिन-हफ्ते लग सकते हैं.
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इस जंग में सबसे ज्यादा तबाही इन 7 प्रमुख प्लांट्स ने झेली है – रास तनूरा रिफाइनरी (सऊदी), रास लाफान एलएनजी प्लांट (कतर), मुस्साफा फ्यूल टर्मिनल (यूएई), साउथ पार्स गैस फील्ड (ईरान), खार्ग आइलैंड ऑयल एक्सपोर्ट टर्मिनल (ईरान), तेहरान के दो बड़े रिफाइनरी और डिपो और अबादान रिफाइनरी इलाका. इनमें आग और धुएं के बादल दिख रहे हैं. तेल रिसाव से पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच रहा है.

तेल के कुएं की आग क्यों इतनी खतरनाक होती है
तेल का कुआं जब जलता है तो उसमें गैस, तेल और हवा का मिश्रण लगातार निकलता रहता है. आग का तापमान 1000 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. आसपास की जमीन इतनी गर्म हो जाती है कि फिर से आग लग सकती है.
1991 की कुवैत जंग में सद्दाम हुसैन ने 600 से ज्यादा कुएं जला दिए थे. उन्हें बुझाने में 9 महीने लगे थे. आज की जंग में भी यही समस्या है. प्लांट्स में तेल का भंडार और पाइपलाइन होने से आग फैलने का खतरा ज्यादा है.
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इसलिए एक्सपर्ट टीम तुरंत पहुंचती है. कई तरीके आजमाती है. रिसर्च के मुताबिक तेल के कुएं की आग बुझाने के मुख्य रूप से 6 बड़े तरीके हैं जो दुनिया भर में इस्तेमाल होते हैं.
तेल की आग बुझाने के 6 मुख्य तरीके
पहला तरीका है पानी से डुबाना. इसमें समुद्री पानी या नदी का पानी पावरफुल होज से आग के नीचे स्प्रे किया जाता है. 1991 कुवैत में 90 फीसदी आग इसी से बुझाई गई. पानी आग को ठंडा करता है. ऑक्सीजन कम करता है.

दूसरा तरीका गैस टरबाइन मिस्ट है. एक बड़ा टरबाइन इंजन लगाकर उसकी पीछे पानी की महीन धुंध फेंकी जाती है जो आग के आधार पर हमला करती है.
तीसरा तरीका सबसे ड्रामेटिक है – डायनामाइट या विस्फोट से बुझाना. एक्सप्लोसिव को कुएं के पास रखकर धमाका किया जाता है. इससे शॉक वेव बनती है जो जलते तेल और ऑक्सीजन को दूर फेंक देती है. आग बुझ जाती है.
चौथा तरीका फोम या ड्राई केमिकल है. स्पेशल फोम (AFFF) या पर्पल के पाउडर से आग पर कंबल बिछा दिया जाता है जो ऑक्सीजन काट देता है.
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पांचवां तरीका रिलीफ वेल ड्रिलिंग है. कुएं के पास नया कुआं खोदा जाता है. दबाव कम करके तेल का रिसाव रोक दिया जाता है.
छठा तरीका कैपिंग या मैकेनिकल क्लैंप है. हाइड्रोलिक कटर से डैमेज्ड पाइप काटकर नया वॉल्व लगाया जाता है और तेल रोक दिया जाता है.
इनमें से पानी और विस्फोट सबसे तेज हैं लेकिन रिलीफ वेल सबसे सुरक्षित और स्थायी तरीका माना जाता है.

मिडिल ईस्ट वॉर में इन प्लांट्स पर क्या असर पड़ा
रास तनूरा रिफाइनरी सऊदी की सबसे बड़ी है, ड्रोन हमले से आग लगी और प्रोडक्शन बंद हो गया है. रास लाफान कतर का सबसे बड़ा एलएनजी प्लांट है. ईरानी हमले से आग लगी. रिसाव हुआ. मुस्साफा टर्मिनल यूएई में आग लग गई. साउथ पार्स ईरान का सबसे बड़ा गैस फील्ड है जहां इजरायली हमले से आग फैली.
खार्ग आइलैंड ईरान का 90 फीसदी तेल निर्यात करता है. अमेरिकी हमले से मिलिट्री पार्ट डैमेज लेकिन तेल प्लांट पर भी धुआं दिखा. तेहरान के रिफाइनरी और डिपो में आग से पूरा शहर अंधेरा हो गया. अबादान इलाका भी प्रभावित हुआ है.
इन 7 प्लांट्स की वजह से तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं. एक्सपर्ट टीम्स इन प्लांट्स पर पानी, फोम और रिलीफ वेल तरीके इस्तेमाल कर रही हैं ताकि आग जल्दी बुझे और रिसाव रुके.
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क्यों जरूरी है तेज एक्शन
अगर ये आग लंबे समय तक जलती रहीं तो पर्यावरण को भारी नुकसान होगा. समुद्र में तेल फैल जाएगा और हवा प्रदूषित हो जाएगी. मिडिल ईस्ट वॉर में अब तक इन प्लांट्स को बुझाने में अंतरराष्ट्रीय टीम्स लगी हैं.
ट्रंप सरकार और ईरान दोनों कह रहे हैं कि तेल सुविधाओं पर और हमले नहीं होंगे लेकिन खतरा बना हुआ है. वैज्ञानिक कहते हैं कि 6 तरीकों में से सही तरीका चुनना बहुत जरूरी है क्योंकि गलत तरीके से आग और फैल सकती है.