पाकिस्तान के सिंध प्रांत के खैरपुर जिले में जुलाई में खजूर तोड़ने का काम शुरू होता है. इस समय यहां तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. इतनी गर्मी में भी हजारों मजदूर खजूर तोड़ने में लगे हैं. गर्मी से बचने के लिए मजदूर सूरज निकलने से पहले काम शुरू करते हैं. दिन में वे थोड़ी-थोड़ी देर काम करते हैं. बीच में आराम करते हैं. तापमान बढ़ने के साथ काम करना उनके लिए और मुश्किल हो जाता है. Photo: AFP
खैरपुर पाकिस्तान के बड़े खजूर उत्पादक इलाकों में शामिल है. देश की आधे से ज्यादा खजूर इसी इलाके में पैदा होती है. यहां खजूर की खेती से बड़ी संख्या में किसान और मौसमी मजदूर जुड़े हैं. Photo: AFP
खजूर तोड़ने के लिए मजदूरों को ऊंचे पेड़ों पर चढ़ना पड़ता है. पेड़ों से फल निकालने के बाद उन्हें अलग किया जाता है. इसके बाद खजूर को आगे बेचने और इस्तेमाल के लिए तैयार किया जाता है. Photo: AFP
कुछ जगहों पर खजूर को उबालने का काम भी होता है. ऐसे में मजदूरों को बाहर की तेज गर्मी के साथ गर्म पानी और भाप की गर्मी भी सहनी पड़ती है. इससे काम और ज्यादा कठिन हो जाता है. सिंध पाकिस्तान के उन इलाकों में है जहां गर्मी काफी ज्यादा पड़ती है. जुलाई में यहां तापमान कई बार 40 डिग्री से ऊपर चला जाता है. कुछ दिनों में यह 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच जाता है. Photo: AFP
इतनी गर्मी में खुले में लंबे समय तक काम करने से शरीर पर गर्मी का असर बढ़ सकता है. इसलिए मजदूर सुबह जल्दी काम शुरू करते हैं. गर्मी बढ़ने पर वे काम रोककर कुछ देर आराम करते हैं. Photo: AFP
लेकिन खजूर की तुड़ाई का मौसम सीमित समय के लिए होता है. इसलिए मजदूर काम को पूरी तरह रोक नहीं सकते. फसल समय पर तैयार करना उनके लिए जरूरी है, क्योंकि इसी से उनकी कमाई जुड़ी होती है. पाकिस्तान क्लाइमेट चेंज से प्रभावित देशों में शामिल है. देश में पिछले कुछ समय से ज्यादा गर्मी, हीटवेव, अनियमित बारिश और बाढ़ जैसी घटनाएं देखने को मिली हैं. इसका असर खेती और किसानों पर भी पड़ रहा है. Photo: AFP
ग्लोबल ग्रीनहाउस गैस इमिशन में पाकिस्तान की हिस्सेदारी 1 फीसदी से भी कम है. इसके बावजूद देश को क्लाइमेट चेंज का बड़ा असर झेलना पड़ रहा है. बढ़ता तापमान खेती से जुड़े मजदूरों के लिए भी परेशानी बढ़ा रहा है. साल 2022 में पाकिस्तान में आई भीषण बाढ़ ने देश के करीब एक-तिहाई हिस्से को प्रभावित किया था. लाखों लोग बेघर हुए थे. सिंध प्रांत भी बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुआ था और खेती को नुकसान हुआ था. Photo: AFP
अब बढ़ती गर्मी खेती के काम को और मुश्किल बना रही है. खजूर की तुड़ाई में लगे मजदूरों को ऐसे समय काम करना पड़ रहा है जब तापमान बहुत ज्यादा रहता है. इससे काम के दौरान गर्मी से जुड़ी परेशानियों का खतरा बढ़ सकता है. Photo: AFP
मौसम में बदलाव का असर सिर्फ तापमान तक सीमित नहीं है. बारिश का समय बदलना और लंबे समय तक गर्मी रहना भी खेती को प्रभावित कर सकता है. इसका असर किसानों के साथ-साथ मौसमी मजदूरों की कमाई पर भी पड़ सकता है. Photo: AFP
खैरपुर के खजूर मजदूरों का काम बढ़ती गर्मी की इस चुनौती का एक उदाहरण है. सुबह जल्दी काम शुरू करना और बीच-बीच में आराम करना अब उनके काम का हिस्सा बन गया है. बढ़ते तापमान के बीच ऐसे मजदूरों के लिए सुरक्षित तरीके से काम करना जरूरी होगा. Photo: AFP