यूरोप में जून के आखिर और जुलाई 2025 की शुरुआत में पड़ी भीषण गर्मी को लेकर एक नई स्टडी सामने आई है. स्टडी में दावा किया गया है कि क्लाइमेट चेंज की वजह से यह हीटवेव पहले से ज्यादा खतरनाक हो गई. Photo: AFP
वैज्ञानिकों के मुताबिक, 2 से 11 जुलाई के बीच यूरोप के 12 बड़े शहरों में गर्मी से करीब 2,305 लोगों की मौत हुई. इनमें से करीब 1,500 लोगों की मौत के पीछे क्लाइमेट चेंज बड़ी वजह रहा. यह स्टडी इंपीरियल कॉलेज लंदन के ग्रांथम इंस्टीट्यूट और लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के वैज्ञानिकों ने की है. Photo: AFP
स्टडी के मुताबिक,क्लाइमेट चेंज की वजह से इन शहरों का तापमान 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया. इससे गर्मी पहले के मुकाबले ज्यादा खतरनाक हो गई. Photo: AP
वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर ग्लोबल वार्मिंग नहीं होती, तो इतनी बड़ी संख्या में लोगों की जान नहीं जाती. इस रिसर्च में लंदन, पेरिस, मैड्रिड, मिलान, रोम, एथेंस, लिस्बन, बार्सिलोना, बुडापेस्ट, ज़ाग्रेब, फ्रैंकफर्ट और सस्सारी समेत 12 शहरों को शामिल किया गया. Photo: AP
इस दौरान यूरोप के कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया. कई देशों ने लोगों के लिए हेल्थ अलर्ट जारी किए. कुछ जगह स्कूल बंद किए गए और दोपहर में बाहर काम करने से बचने की सलाह दी गई. कई इलाकों में जंगलों में आग लगने की घटनाएं भी बढ़ीं. Photo: AP
वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस बार यूरोप में हीट डोम बना था. यानी एक ऐसा हाई प्रेशर सिस्टम, जिसने गर्म हवा को कई दिनों तक एक ही जगह रोके रखा. इसके साथ उत्तर अफ्रीका से और गर्म हवा भी यूरोप पहुंचती रही. इसी वजह से लगातार कई दिनों तक तेज गर्मी पड़ी. Photo: Reuters
स्टडी में कहा गया है कि क्लाइमेट चेंज की वजह से तापमान 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक और बढ़ गया. इसी वजह से हीटवेव का असर भी ज्यादा खतरनाक हो गया. रिसर्च के मुताबिक, गर्मी से हुई कुल मौतों में 88 फीसदी लोग 65 साल या उससे ज्यादा उम्र के थे. Photo: AP
वैज्ञानिकों का कहना है कि ज्यादा उम्र के लोगों और पहले से बीमार लोगों के लिए तेज गर्मी सबसे बड़ा खतरा होती है. उनका शरीर ज्यादा तापमान को आसानी से नहीं झेल पाता. Photo: AP
स्टडी के अनुसार, इटली के मिलान में क्लाइमेट चेंज की वजह से सबसे ज्यादा 317 लोगों की मौत हुई. वहीं स्पेन की राजधानी मैड्रिड में गर्मी से हुई 90 फीसदी से ज्यादा मौतों के पीछे क्लाइमेट चेंज को बड़ी वजह माना गया. Photo: AP
वैज्ञानिकों का कहना है कि पिछले 20 साल में गर्मियों के दौरान यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला इलाका बन गया है. अगर ग्रीनहाउस गैसों का इमिशनऔर ईंधन का इस्तेमाल कम नहीं हुआ, तो आने वाले समय में ऐसी हीटवेव और ज्यादा बार आएंगी. उनकी अवधि भी बढ़ेगी और उनका असर भी पहले से ज्यादा होगा. Photo: AP
रिपोर्ट में शहरों में ज्यादा पेड़ लगाने, कूलिंग सेंटर्स बढ़ाने, हीट वॉर्निंग सिस्टम मजबूत करने और इमारतों को इस तरह बनाने की सलाह दी गई है, ताकि उनमें गर्मी कम लगे. Photo: Reuters
वैज्ञानिकों का कहना है कि क्लाइमेट चेंज अब सिर्फ मौसम का नहीं, बल्कि लोगों की जान का भी बड़ा खतरा बन गया है. अगर ग्रीनहाउस गैसों का इमिशन कम नहीं किया गया, तो आने वाले सालों में ऐसी हीटवेव और ज्यादा खतरनाक हो सकती हैं. Photo: Reuters