घर के मुख्य द्वार को लेकर लोगों में बहुत भ्रांतियां हैं. कुछ लोग मानते हैं कि दक्षिण दिशा में मुख्य द्वार नुकसान ही देगा और उत्तर व पूर्व दिशा का प्रवेश द्वार बहुत अच्छा होगा. जबकि सच यह है कि चारों दिशाओं (पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण) के प्रवेश द्वार अच्छे हैं. बशर्ते वह सही पद पर बने हो. जबकि गलत पद पर बना चारों दिशाओं का दरवाजा नुकसान ही कराएगा. इसी तरह लोगों के मन में मुख्य द्वार को लेकर और भी कई तरह की भ्रांतियां रहती हैं. आइए वास्तु के अनुसार, दरवाजे के सही नियम जानते हैं.
मुख्य द्वार से जुड़ी भ्रांतियां
1. मुख्य द्वार की दिशा के अलावा और भी बहुत सी भ्रांतियां हैं, जिनके कारण व्यक्ति हमेशा परेशान रहता है. यदि घर का मुख्य द्वार एक दरवाजे का है तो यह जरूरी नहीं वह आपके सीधे हाथ पर ही खुले. दरवाजा किस तरफ खुल रहा है, इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं होता है. यदि सीधे हाथ की ओर दरवाजा खुल रहा है तो अच्छा है, लेकिन उल्टे हाथ ही ओर खुलने का अर्थ नकारात्मक होना नहीं है.
2. दरवाजे का आकार बहुत छोटा या बहुत बड़ा नहीं होना चाहिए. मुख्य द्वार के बाहर स्वास्तिक बनाने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है. इसलिए मुख्य द्वार पर हेशा स्वास्तिक बना कर रखें.
3. कचरे का डब्बा या जुते चप्पल या फिर कबाड़ के सामान से मुख्य द्वार से आने वाली सकारात्मक ऊर्जा बाधित होती है. अपने मुख्य द्वार को साफ सुधरा और व्यवस्थित रखें.
4. मुख्य द्वार का दरवाजा लकड़ी का हो तो सबसे बेहतर है. अन्यथा किसी भी मैटल का बनवा सकते हैं. परन्तु उसका रंग दिशा के नुसार ही रखें. जैसे जल तत्व की दिशा उत्तर में नीले, हरे व सफेद रंग, पूर्व में हरा, भूरा रंग, दक्षिण में लाल, हरा, भूरा व पीला रंग, पश्चिम में पीला, गोल्डन, सफेद व स्लेटी रंग का दरवाजा बनाना शुभ है.
5. दरवाजे के बाहर डालने वाले मैट भी दिशा के अनुसार ही हो तो बहुत अच्छा है. मुख्य द्वार के बाहर रात में रोशनी अवश्य होनी चाहिए. सुबह के समय चल अवश्य छिड़कें.
6. खिड़कियां को लेकर भी लोगों में बहुत भ्रांतियां हैं, खिड़कियां किसी भी दिशा में किसी भी संख्या हो, इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता. उत्तर और पूर्व में सुबह की धूप ने के कारण खिड़कियों का होना अच्छा है. इसका मतलब यह नहीं कि दक्षिण और पश्चिम दिशा की खिड़कियां नकारात्मक प्रभाव देंगी.