Yogini Ekadashi: आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी'न केवल आत्म-शुद्धि का दिन है, बल्कि यह भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने का भी उत्तम अवसर है. इस दिन किए गए व्रत और पूजन से व्यक्ति को न केवल सांसारिक कष्टों से मुक्ति मिलती है, बल्कि मोक्ष भी निलता है. व्रत का पूर्ण फल प्राप्त हो, इसके लिए नियमों का पालन करना जितना आवश्यक है, उतने ही महत्वपूर्ण हैं वे उपाय जो आपके जीवन की बाधाओं को दूर कर सकते हैं.
व्रत में भूलकर भी न करें ये 4 गलतियां
तुलसी पूजन में सावधानी: एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ें और न ही पौधे में जल चढ़ाएं. मान्यता है कि तुलसी माता इस दिन भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं.
सात्विकता का रखें विशेष ध्यान: व्रत के दौरान प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा के सेवन से बचें. इसके अलावा, चावल का सेवन भी इस दिन वर्जित माना गया है.
नमक का परहेज: एकादशी के दिन नमक के प्रयोग से बचने का विधान है. यदि आप फलाहार कर रहे हैं, तो सेंधा नमक का ही सीमित उपयोग करें.
वाणी पर संयम: इस दिन क्रोध, विवाद, चुगली या किसी के प्रति अपशब्द बोलने से बचें. मन में 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का निरंतर जाप करें.
जीवन में सुख-समृद्धि लाने के लिए विशेष उपाय
यदि आप योगिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो इन उपायों को अवश्य अपनाएं.
धन लाभ के लिए: एकादशी की शाम को भगवान विष्णु के सामने गाय के घी का दीपक जलाएं, उसमें थोड़ी सी केसर डाल दें. इसके बाद 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का 108 बार जाप करें. इससे आर्थिक तंगी दूर होती है.
पारिवारिक कलह मिटाने के लिए: यदि परिवार में तनाव रहता है, तो योगिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की संयुक्त पूजा करें और उन्हें खीर का भोग लगाए. इस भोग को प्रसाद के रूप में पूरे परिवार को दें.
संकटों से मुक्ति के लिए: योगिनी एकादशी के दिन श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें. माना जाता है कि इससे जीवन के बड़े से बड़े संकट टल जाते हैं.
सुख-शांति के लिए: भगवान विष्णु को पीतांबर (पीले वस्त्र) अर्पित करें या पीले फल/फूल चढ़ाएं. इससे जीवन में सकारात्मकता और शांति बनी रहती है.
योगिनी एकादशी तिथि (2026)
प्रारंभ: 10 जुलाई, 2026, सुबह 08:16 बजे
समापन: 11 जुलाई, 2026, सुबह 05:22 बजे
व्रत की तिथि: 10 जुलाई, 2026