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Sawan Shivratri 2026: 11 या 12 अगस्त, शिवरात्रि कब है? कन्फ्यूजन हुआ दूर, पता चल गई सही डेट

सावन शिवरात्रि सावन कृष्ण चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है. द्रिक पंचांग के अनुसार, इस बार चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त को सुबह 04:54 बजे शुरू होगी और 12 अगस्त को देर रात 1:52 बजे समाप्त होगी. इस दिन रात्रि के चारों प्रहर भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. ऐसे में श्रद्धालुओं को यह अवसर सिर्फ 11 अगस्त को ही मिल पाएगा. इसलिए सावन माह की शिवरात्रि 11 अगस्त को मनाना ही उचित होगा.

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सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिवरात्रि का त्योहार मनाया जाता है. (Photo: Pexels)
सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिवरात्रि का त्योहार मनाया जाता है. (Photo: Pexels)

इस साल सावन का महीना 30 जुलाई से लेकर 28 अगस्त तक रहने वाला है. सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिवरात्रि का त्योहार मनाया जाता है. इस दिन भगवान शिव के मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं. बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिवलिंग का जलाभिषेक करेंगे. सावन शिवरात्रि के दिन महादेव के भक्त उपवास करते हैं और पूरी श्रद्धा से उनकी पूजा-अर्चना करते हैं. इस साल सावन शिवरात्रि की तारीख को लेकर लोग बहुत कन्फ्यूज हैं. आइए जानते हैं कि सावन शिवरात्रि की सही तारीख क्या है.

सावन शिवरात्रि 2026 कब है?
सावन शिवरात्रि सावन कृष्ण चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है. द्रिक पंचांग के अनुसार, इस बार चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त को सुबह 04:54 बजे शुरू होगी और 12 अगस्त को देर रात 1:52 बजे समाप्त होगी. इस दिन रात्रि के चारों प्रहर भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. ऐसे में श्रद्धालुओं को यह अवसर सिर्फ 11 अगस्त को ही मिल पाएगा. इसलिए सावन माह की शिवरात्रि 11 अगस्त को मनाना ही उचित होगा.

चार प्रहर की पूजा का समय
प्रथम प्रहर की पूजा- शाम 07:04 बजे से रात 09:45 बजे तक
द्वितीय प्रहर की पूजा- रात 09:45 बजे से रात 12:26 बजे तक
तृतीय प्रहर की पूजा- रात 12:26 बजे से सुबह 03:07 बजे तक
चतुर्थ प्रहर की पूजा- सुबह 03:07 बजे से सुबह 05:49 बजे तक

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सावन में पड़ेंगे चार सोमवार
पहला सावन सोमवार- 3 अगस्त
दूसरा सावन सोमवार- 10 अगस्त
तीसरा सावन सोमवार- 17 अगस्त
चौथा सावन सोमवार- 24 अगस्त

सावन शिवरात्रि की पूजन विधि
सावन शिवरात्र के दिन श्रद्धापूर्वक भगवान शिव की पूजा करने से मनचाही मुराद पूरी हो जाती है. इस दिन सुबह जल्दी उठकर व्रत और पूजा का संकल्प लें. साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें और एक चौकी पर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें. पहले घर में पूजा करें और फिर शिव मंदिर जाकर शिवलिंग का जलाभिषे करें. इस दौरान श्रद्धालु शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र, धतूरा और भांग भी अर्पित करते हैं. 

इसके बाद भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप या शिव चालीसा का पाठ करना भी उत्तम माना जाता है. फिर शाम को संध्याकल से लेकर अगले दिन सुबह तक चार प्रहर की पूजा की जाती है. इसमें भगवान शिव की विधिवत पूजा, रात्रि जागरण और महादेव के मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है. इसके बाद सामर्थ्य के अनुसार गरीबों, जरूरतमंदों को दान दे सकते हैं.

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