सावन का महीना केवल भगवान शिव की आराधना का समय ही नहीं, बल्कि पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करने का अवसर भी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस महीने विवाहित बेटियों का मायके आना बेहद शुभ माना जाता है. कहा जाता है कि इससे बेटी और उसके मायके के बीच स्नेह बना रहता है और परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. जिन परिवारों और घरों में इस परंपरा को निभाया जाता है, वहां बेटियों के सौभाग्य से हमेशा परिवार की उन्नति होती है.
सावन में मायके आने का महत्व
मान्यता है कि विवाह के बाद पहले सावन में बेटी का मायके आना बहुत शुभ होता है. ऐसा माना जाता है कि इससे बेटी को मानसिक और भावनात्मक सुकून मिलता है और परिवार के सदस्यों के बीच संबंध प्रगाढ़ होते हैं. परिवार की उन्नति होती है. घर में खुशहाली आती है. अक्सर देखा जाता है कि शादी के बाद बेटियों के ससुराल जाने से मायके में बहुत सूनापन आ जाता है. इसलिए कहते हैं कि सावन में उसके घर लौटने से सुख-संपन्नता और खुशहाली भी लौट आती है. वैसे तो इस परंपरा को नव विवाहित बेटियों के लिए खास माना जाता है. लेकिन जिन महिलाओं की शादी को काफी समय हो चुका है, वो भी इस परंपरा को निभा सकती हैं.
सावन में बेटी स्वागत कैसे करें?
सावन के नव विवाहित बेटी के मायके आने पर उसका भव्य स्वागत करना चाहिए. पहले दहलीज पर उसकी आरती करें. माथे पर रोली का तिलक लगाकर उस पर अक्षत लगाएं. फिर मिठाई या सावन के विशेष पकवान जैसे- घेवर, मालपुआ, खीर आदि खिलाकर उसका मुंह मीठा कराएं. इस दौरान बेटी के हाथों से एक तुलसी का पौधा भी अपने घर-आंगन में लगवाना बहुत शुभ माना जाता है. इसके बाद बेटी को श्रृंगार सामग्री या कोई अच्छा सा उपहार दे सकते हैं.
कब से कब तक रहेगा सावन?
हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ पूर्णिमा के अगले ही दिन से श्रावण मास की शुरुआत हो जाती है. इस साल श्रावण मास की शुरुआत 30 जुलाई (गुरुवार) से हो रही है, जिसका समापन 28 अगस्त (शुक्रवार) को रक्षाबंधन के दिन होगा. इस बार सावन के महीने में भक्तों को भगवान शिव की उपासना करने के लिए पूरे 4 सोमवार मिलेंगे, जिसे बेहद शुभ संयोग माना जा रहा है.
सावन के सोमवार
पहला सोमवार: 3 अगस्त 2026
दूसरा सोमवार: 10 अगस्त 2026
तीसरा सोमवार: 17 अगस्त 2026
चौथा सोमवार: 24 अगस्त 2026
सावन के प्रमुख त्योहार
30 जुलाई : सावन मास का आरंभ
3 अगस्त : पहली सोमवारी
2 अगस्त : संकष्टी गणेश चतुर्थी
5 अगस्त : शीतला सप्तमी
6 अगस्त : मंगला गौरी व्रत
9 अगस्त : कामदा एकादशी
10 अगस्त : दूसरी सोमवारी
12 अगस्त : हरियाली अमावस्या
15 अगस्त : हरियाली तीज
17 अगस्त : नाग पंचमी व तीसरी सोमवारी
23 अगस्त : पुत्रदा एकादशी
24 अगस्त : चौथी व अंतिम सोमवारी
28 अगस्त : सावन पूर्णिमा एवं रक्षाबंधन