राजस्थान के सरिस्का के घने जंगलों में स्थित पांडुपोल हनुमान मंदिर में इन दिनों मेला लगा हुआ है, जहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां हनुमान जी ने पांडवों के अज्ञातवास के दौरान भीम का घमंड तोड़ा था. इस घटना का उल्लेख महाभारत सहित कई पुराणों में वर्णित है. यहां आज भी हनुमान जी की लेटी हुई प्रतिमा मौजूद है. यह मेला साल में एक बार लगता है. इस दौरान मंदिर को खास फूलों से सजाया जाता है. इस तीन दिवसीय मेले में कई विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं.
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत काल में अज्ञातवास के दौरान पांडव राजस्थान के अलवर आए थे. इस दौरान सरिस्का के जंगल स्थित क्षेत्र में भीम का अहंकार तोड़ने के लिए हनुमान जी इसी स्थान पर प्रकट हुए थे. कहते हैं कि यहां भीम ने अपनी गदा से पहाड़ तोड़कर रास्ता भी बनाया था, जिसे पांडुपोल के नाम से जाना जाता है. यहां हनुमान जी की लेटे हुए चयन मुद्रा में प्रतिमा भी स्थापित है.
13 सितंबर को शुरू हुए इस मेले 16 सितंबर यानी आज समापन हो रहा है. बीते तीन दिन से यहां कई खास कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया. मेले में लोगों को आने-जाने के लिए रोडवेज की तरफ से 150 से ज्यादा बसें लगाई गई थीं. मेले के दौरान राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश हरियाणा दिल्ली गुजरात मध्य प्रदेश महाराष्ट्र सहित देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु हनुमान जी के दर्शन के लिए यहां आते हैं और यहां विधि विधान से पूजा करते हैं.
रोट और चूरमे का भोग
मंदिर की पुजारी ने बताया कि मेले के दौरान सुबह और शाम तीन टाइम हनुमान जी की आरती होती है और उन्हें भोग लगाया जाता है. हनुमान जी को चूरमे और रोट के प्रसाद का भोग लगाया जाता है. ऐसी मान्यता है कि यही भोग हनुमान जी को अत्यंत प्रिय है. पांडुपोल हनुमान मंदिर के मेले के दौरान जिला कलेक्टर द्वारा जिले में अवकाश घोषित किया जाता है. इस मौके पर लोग घरों में ज्योत जलाकर प्रसाद चढ़ाते हैं और हनुमान जी की पूजा अर्चना करते हैं.