इंसान के शरीर से प्राण निकलते ही वो संसार के हर बंधन से मुक्त हो जाता है. आत्मा परलोक की तरफ रुख कर जाती है और शरीर यहीं पृथ्वी लोक में नश्वर हो जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि मृत्यु के बाद व्यक्ति की आत्मा परलोक जाने से पहले एक बार अपने परिवार के बीच जरूर आती है. गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु नजदीक आने पर व्यक्ति अपने परिवार के स्नेह और मोह के कारण दुख के साथ प्राण त्यागता है. यही वजह है कि मृत्यु के बाद आत्मा एक बार परिवार के बीच जरूरी आती है.
गरुड़ पुराण कहता है कि मृत्यु के बाद यमदूत जीवात्मा को यमलोक ले जाते हैं और वहां जाकर आत्मा को उसके जीवन का लेखा-जोखा दिखाते हैं. उसके जीवन में किए गए पाप-पुण्यों का आकलन किया जाता है. कर्मों के हिसाब से यह तय किया जाता है कि आत्मा नर्क लोक जाएगी या स्वर्ग लोक.
हालांकि मृत्यु के 24 घंटे के भीतर जीवात्मा वापस अपने परिवार के बीच उसी घर में जाती है, जहां उसने अपने शरीर का त्याग किया था. यहीं से उसके बाद के 13 दिन का एक महत्वपूर्ण चरण शुरू होता है. जीवात्मा करीब 13 दिन तक अपने परिवार के बीच या आस-पास ही रहती है. वह अपने परिवार के सदस्यों, दोस्तों और रिश्तेदारों को शोक मनाते हुए देखती है. कई बार लोगों को उसकी उपस्थिति का आभास भी होता है. लेकिन ज्यादातर लोग इस बात को भ्रम समझकर नजरअंदाज कर देते हैं.
क्यों किया जाता है पिंडदान?
मृत्यु के बाद मृतक की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया जाता है. मान्यता है कि पिंडदान से मृतक के लिए प्रेत शरीर के निर्माण में सहायता होती है. शरीर निर्माण के बाद जीवात्मा को अत्यधिक भूख लगती है. इसलिए मृतक की भूख को शांत करने के लिए 10वें दिन पिंडदान किया जाता है. 11वें और 12वें दिन भी मृतक के लिए भोजन आदि देने का वर्णन है. इन दिनों में दीप, अन्न, जल और वस्त्र आदि दिए जाने की बात कही गई है.
इसके बाद पिंडदान से तृप्त हो चुकी जीवात्मा की यमलोक की यात्रा आरंभ होती है. मान्यता है कि यमलोक की यात्रा कर्मों के हिसाब से तय होती है. जितने ज्यादा पाप किए हैं, यह मार्ग उतना ही कठिन होता है. और जितने ज्यादा पुण्य होंगे, मार्ग उतना ही सरल और सुखद होगा. तभी तो कहा जाता है कि अच्छे-बुरे कर्मों का फल मृत्यु से पहले ही नहीं, मृत्यु के बाद भी भोगना पड़ता है.