इस बार दीपावली पर सूर्य, मंगल और शुक्र तीनों ग्रह अपनी नीच की राशि में मौजूद रहेंगे. सूर्य तुला, मंगल कर्क और शुक्र कन्या राशि में विराजमान होंगे. वहीं दूसरी ओर धन, ऐश्वर्य और भौतिक सुख-सुविधाओं का कारक शुक्र वक्री अवस्था में भी रहेगा. दीपावली के इस ग्रह संयोग का आम व्यक्ति के जीवन पर विशेष प्रभाव दिखाई दे सकता है. आइए जानते हैं कि ग्रहों का यह दुर्लभ संयोग लोगों पर कैसा असर डालेगा.
खर्च-बचत के बीच असंतुलन
शुक्र धन, विलासिता, वाहन, आभूषण, सुख-सुविधाओं और भौतिक संपन्नता का कारक है. कन्या राशि में नीच और वक्री शुक्र की स्थिति आर्थिक मामलों में पुनर्विचार और असंतुलन को दर्शा रही है. आम लोगों पर इसका प्रभाव यह माना जा सकता है कि लोग अपनी जरूरतों और इच्छाओं के बीच संतुलन बनाने में कठिनाई महसूस कर सकते हैं. त्योहारों पर खरीदारी करते समय बजट से अधिक खर्च करने, दिखावे के लिए महंगी वस्तुएं खरीदने और गैर-जरूरी खर्च बढ़ने के प्रति सावधान रहें. पुराने लेन-देन और आर्थिक योजनाओं की समीक्षा करना भी महत्वपूर्ण रहेगा.
नौकरी-कारोबार में सतर्कता
सूर्य नौकरी, प्रशासन, सरकार, प्रतिष्ठा और नेतृत्व के कारक ग्रह है. तुला राशि में नीच सूर्य होने से कार्यस्थल पर अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच तालमेल की कमी, निर्णय लेने में असमंजस और अपनी योग्यता साबित करने के लिए अधिक प्रयास करने जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं. सरकारी कामकाज में लगे लोगों को भी धैर्य और संयम से काम लेने की आवश्यकता रह सकती है.
ज्योतिष में मंगल को साहस, ऊर्जा, भूमि, संपत्ति और पराक्रम का कारक ग्रह माना गया है. कर्क राशि में नीच मंगल की स्थिति जल्दबाजी में फैसले लेने, छोटी बातों पर गुस्सा करने और पारिवारिक विवाद बढ़ने की प्रवृत्ति बढ़ा सकती है. जमीन-जायदाद, वाहन और संपत्ति से जुड़े मामलों में भावनाओं के बजाय व्यावहारिक सोच से निर्णय लेना बेहतर रहेगा.
पारिवारिक जीवन में संयम की जरूरत
तीनों ग्रहों की स्थिति का एक महत्वपूर्ण पहलू पारिवारिक जीवन भी है. शुक्र दांपत्य सुख और प्रेम संबंधों का कारक है. जबकि मंगल ऊर्जा, साहस, क्रोध और आक्रामकता से जुड़ा है. ऐसे में छोटी बातों पर मतभेद, खर्चों को लेकर पति-पत्नी में असहमति और रिश्तों में अपेक्षाओं का दबाव बढ़ सकता है. वहीं सूर्य की नीच स्थिति आत्मसम्मान और अहंकार से जुड़े विषयों को संवेदनशील बना सकती है.
नीचभंग से मिल सकती है राहत
शुक्र बुध की राशि में नीच का होता है. गोचर में सुक्र बुध की रासि में और बुध का शुक्र की राशि में गोचर होने से शुक्र के नीच भंग की स्थिति है. नीचभंग की परिस्थितियां बनने पर संबंधित ग्रह के नकारात्मक प्रभाव में कमी और सकारात्मक परिणाम मिल सकते है. परन्तु शुक्र की अपनी नींच राशि में गोचर करने से सूर्य के नकारात्मक प्रभावों में वृद्धि होगी, क्योंकि सूर्य तुला यानि शुक्र की राशि में नीच अवस्था में है और खुद शुक्र का भी नीच हो जाना सूर्य के नकारात्मक प्रभाव में वृद्धि करेगा. 16 नवम्बर को सूर्य के अपने मित्र मंगल की राशि में प्रवेश करने पर सूर्य के नकारात्मक प्रभाव ठीक होगा.