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Laxmi Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi: 'ऊं जय लक्ष्मी माता...' दिवाली पर जरूर गाएं मां लक्ष्मी की ये आरती, प्रसन्न होंगी देवी

Laxmi Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi: दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा के बाद आरती का विशेष महत्व है. धार्मिक मान्यता है कि आरती के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है.

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दिवाली पर जरूर करें मां लक्ष्मी की आरती (Photo: ITG)
दिवाली पर जरूर करें मां लक्ष्मी की आरती (Photo: ITG)

Laxmi Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi: दीपावली का त्योहार इस साल 8 नवंबर, रविवार को मनाया जा रहा है. हिंदू धर्म में इस पर्व का विशेष महत्व है. इस दिन घरों को दीपों से सजाया जाता है और शाम को परिवार के साथ मिलकर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली का संबंध भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने से भी जुड़ा है. कहा जाता है कि 14 साल का वनवास पूरा करने के बाद जब प्रभु श्रीराम माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या पहुंचे थे, तब नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था.

वहीं, पौराणिक कथाओं में दिवाली को समुद्र मंथन से भी जोड़ा जाता है. मान्यता है कि इसी दिन समुद्र मंथन के दौरान माता लक्ष्मी प्रकट हुई थीं. यही वजह है कि दिवाली की रात मां लक्ष्मी की पूजा को बेहद शुभ माना जाता है. इस दिन भक्त पूरे विधि-विधान से लक्ष्मी-गणेश का पूजन करते हैं. घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं.

दिवाली पर प्रदोष काल में शुभ मुहूर्त के अनुसार लक्ष्मी पूजन किया जाता है. पूजा के बाद माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की आरती उतारी जाती है. धार्मिक मान्यता है कि आरती के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है. ऐसे में आरती करते समय उसके शब्दों का सही उच्चारण करना और पूरी श्रद्धा से गाना जरूरी माना गया है. अगर आप भी दिवाली पर मां लक्ष्मी की आरती करना चाहते हैं, तो यहां पढ़ें उनकी पूरी आरती...

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श्री लक्ष्मी माता की आरती | Laxmi Ji Ki Aarti in Hindi

ओम जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।

तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥

उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
मैया तुम ही जग-माता।।

सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥

दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।
मैया सुख सम्पत्ति दाता॥

जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥

तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
मैया तुम ही शुभदाता॥

कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥

जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।
मैया सब सद्गुण आता॥

सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
मैया वस्त्र न कोई पाता॥

खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥

शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता।
मैया क्षीरोदधि-जाता॥

रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥

महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता।
मैया जो कोई जन गाता॥

उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥

ऊं जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता। ऊं जय लक्ष्मी माता।।

दोहा

महालक्ष्मी नमस्तुभ्यम्, नमस्तुभ्यम् सुरेश्वरि। हरिप्रिये नमस्तुभ्यम्, नमस्तुभ्यम् दयानिधे।।
पद्मालये नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं च सर्वदे। सर्व भूत हितार्थाय, वसु सृष्टिं सदा कुरुं।।

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