हर साल भादो कृष्ण एकादशी तिथि को अजा एकादशी का व्रत रखा जाता है. इस साल अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर यानी कल रखा जाएगा. अजा एकादशी को सनातन परंपरा में विशेष फलदायी माना गया है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से जाने-अनजाने में किए गए पाप कर्मों से मुक्ति मिलती है. ऐसी मान्यता है कि अजा एकादशी का व्रत और पूजा विधि-विधान से करने पर अश्वमेध यज्ञ और एक हजार गौदान के समान पुण्य फल प्राप्त हो सकता है. आइए इसका शुभ मुहूर्त और पूजन विधि जानते हैं.
स्नान और दान का विशेष महत्व
अजा एकादशी पर स्नान, ध्यान और दान को पुण्यकारी माना गया है. इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार सात्विक वस्तुओं का दान किया जा सकता है. जरूरतमंद व्यक्ति को दान देने की परंपरा बताई गई है. अजा एकादशी पर स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के लिए अन्नदान, आर्थिक समस्या के लिए वस्त्र, जूते या छाते का दान करने की मान्यता है. शीघ्र विवाह की कामना के लिए केसर, केला या हल्दी का दान कर सकते हैं. वहीं, विवाद या मुकदमे से राहत के लिए गुड़ या मिठाई का दान शुभ माना गया है.
अजा एकादशी 2026 का शुभ मुहूर्त
स्नान-दान का मुहूर्त (ब्रह्म मुहूर्त): सुबह 5:49 से 6:32 बजे तक
संध्या काल मुहूर्त: सुबह 6:10 से 7:16 बजे तक
दोपहर की पूजा का मुहूर्त (अभिजित मुहूर्त): दोपहर 1:22 से 2:14 बजे तक
शाम की पूजा का मुहूर्त (विजय मुहूर्त): शाम करीब 04:00 बजे से शाम 4:51 बजे तक
अजा एकादशी की पूजा विधि
अजा एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें और घर की साफ-सफाई करें. इसके बाद स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें. स्नान के पानी में गंगाजल मिलाना शुभ माना जाता है. इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके एक चौकी स्थापित करें और उस पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर रखें. भगवान विष्णु को पीले वस्त्र, पीले फूल और तुलसी दल अर्पित करें. इसके बाद धूप, दीप, चंदन और नैवेद्य अर्पित करें.
पूजा के दौरान भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी कर सकते हैं. अंत में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी से परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और मंगल की कामना करें.
श्रीहरि के इन मंत्रों का करें जाप
1. ॐ उपेन्द्राय नमः
2. ॐ नमो नारायणाय
3. मंगलम भगवान विष्णु, मंगलम गरुड़ध्वजः। मंगलम पुण्डरीकाक्ष, मंगलाय तनोहरिः।