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सरस्वती जी की आरती

सरस्वती जी की आरती

जय सरस्वती माता आरती मां सरस्वती की एक प्राचीन और अत्यंत लोकप्रिय आरती है. श्रद्धा और भक्ति के साथ इसका नियमित पाठ करने से देवी सरस्वती की विशेष अनुकंपा प्राप्त होती है. बसंत पंचमी के पावन अवसर पर प्रातः और सायंकाल इस आरती का गायन करने से बुद्धि, ज्ञान और विद्या में वृद्धि होती है.

सरस्वती जी की आरती
सरस्वती जी की आरती

ॐ जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता। 
सद्‍गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥

 

चंद्रवदनि पद्मासिनी, ध्रुति मंगलकारी। 
सोहें शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी ॥ जय…..

 

बाएं कर में वीणा, दाएं कर में माला। 
शीश मुकुट मणी सोहें, गल मोतियन माला ॥ जय…..

 

देवी शरण जो आएं, उनका उद्धार किया। 
पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया ॥ जय…..

 

विद्या ज्ञान प्रदायिनी, ज्ञान प्रकाश भरो। 
मोह, अज्ञान, तिमिर का जग से नाश करो ॥ जय…..

 

धूप, दीप, फल, मेवा मां स्वीकार करो। 
ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो ॥ जय…..

 

मां सरस्वती की आरती जो कोई जन गावें। 
हितकारी, सुखकारी, ज्ञान भक्ती पावें ॥ जय…..

 

जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता। 
सद्‍गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥ जय…

 

-------समाप्त-------

समाप्त

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