तीन महीने से रणथंभौर नेशनल पार्क के दरवाजे पर्यटकों के लिए बंद थे. जंगल में सन्नाटा था और पर्यटक इंतजार कर रहे थे कि आखिर कब फिर से सफारी शुरू होगी. 1 अक्टूबर को वो इंतजार खत्म हुआ. रणथंभौर के दरवाजे खुले तो पहले ही दिन माहौल किसी त्योहार जैसा नजर आया. सवाई माधोपुर के गणेश धाम स्थित मुख्य प्रवेश द्वार पर पर्यटकों का राजस्थानी अंदाज में स्वागत किया गया. कहीं तिलक लगाया जा रहा था, कहीं माला पहनाई जा रही थी और कहीं लोक कलाकार राजस्थानी नृत्य की प्रस्तुति दे रहे थे.
गाजे-बाजे और लोक संगीत के बीच सफारी वाहन जंगल की ओर रवाना हुए. मतलब तीन महीने बाद जंगल खुला तो स्वागत भी उसी अंदाज में हुआ, जिसके लिए राजस्थान जाना जाता है. गणेश धाम पर रंगोली बनाई गई थी. लोक कलाकारों ने राजस्थानी लोक नृत्य की प्रस्तुतियां दीं. वन विभाग की टीम ने देशी और विदेशी पर्यटकों का पारंपरिक तरीके से अभिनंदन किया. इसके बाद अधिकारियों ने पर्यटक वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रणथंभौर की सफारी के लिए रवाना किया.
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इस मौके पर सवाई माधोपुर के जिला कलेक्टर कानाराम, रणथंभौर के मुख्य वन संरक्षक शारदा प्रताप सिंह, उपवन संरक्षक मानस सिंह और उपवन संरक्षक पर्यटन संजीव शर्मा मौजूद रहे. तीन महीने बाद जंगल खुला तो पहले दिन कितने लोग पहुंचे? वन विभाग के मुताबिक, पहले ही दिन सैकड़ों की संख्या में देशी और विदेशी पर्यटक रणथंभौर पहुंचे. बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे भी जंगल सफारी के लिए पहुंचे. लंबे अंतराल के बाद सफारी शुरू होने को लेकर पर्यटकों में खासा उत्साह नजर आया.

किसी को जंगल की हरियाली देखनी थी, किसी को रणथंभौर का प्राकृतिक सौंदर्य आकर्षित कर रहा था और कई पर्यटक इस उम्मीद से पहुंचे थे कि शायद जंगल में बाघ का दीदार हो जाए, क्योंकि रणथंभौर की सफारी का रोमांच सिर्फ जंगल घूमने तक सीमित नहीं है. यहां हर सफारी के साथ एक उम्मीद भी चलती है कि पता नहीं अगले मोड़ पर क्या नजर आ जाए. कहीं हिरणों का झुंड मिल सकता है, कहीं दूसरे वन्यजीव दिखाई दे सकते हैं और जंगल का सबसे बड़ा आकर्षण यानी बाघ भी नजर आ सकता है. हालांकि जंगल में वन्यजीवों का दीदार तय नहीं होता. इसी अनिश्चितता की वजह से सफारी का रोमांच बना रहता है.
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पर्यटन सत्र की शुरुआत के मौके पर मुख्य वन संरक्षक शारदा प्रताप सिंह और जिला कलेक्टर कानाराम ने भी पर्यटकों के उत्साह को लेकर बात करते हुए कहा कि इस बार रणथंभौर घूमने को लेकर पर्यटकों में अच्छा रुझान देखने को मिल रहा है. अधिकारियों ने कहा कि पर्यटन संचालन वन क्षेत्र के निर्धारित नियमों के मुताबिक ही किया जाएगा. पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ जंगल के नियमों का पालन कराने पर भी जोर रहेगा. यानी जंगल घूमने जाइए, लेकिन जंगल के नियमों के साथ.
तीन महीने के अंतराल के बाद रणथंभौर का नया पर्यटन सत्र शुरू हो गया है. गणेश धाम के मुख्य द्वार पर हुए स्वागत समारोह ने इसकी शुरुआत को खास बना दिया. पहले दिन बड़ी संख्या में पर्यटकों की मौजूदगी ने बता दिया कि लोग जंगल के दोबारा खुलने का इंतजार कर रहे थे. अब आने वाले दिनों में रणथंभौर की पगडंडियों पर सफारी वाहन दौड़ेंगे, पर्यटक कैमरे लेकर जंगल की तरफ निकलेंगे और हर सफारी के साथ वही सवाल रहेगा- आज जंगल में क्या दिखेगा?