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राजस्थान बनेगा रोजगार का केंद्र? बीजेपी के दावों पर कांग्रेस ने उठाए सवाल

राजस्थान राज्य वित्त आयोग के चेयरमैन डॉ. अरुण चतुर्वेदी ने भाजपा सरकार के कार्यकाल में नौकरियां देने, निवेश समझौतों को जमीन पर उतारने और प्रदेश को विकास की दिशा में आगे बढ़ाने का दावा किया.

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राजस्थान में रोजगार पर भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने (Photo-ITG)
राजस्थान में रोजगार पर भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने (Photo-ITG)

पंचायत आजतक राजस्थान के सत्र ‘रोजगार सेंटर बनेगा राजस्थान?’ में प्रदेश की आर्थिक स्थिति और विकास की रफ्तार पर राजस्थान राज्य वित्त आयोग के चेयरमैन डॉ. अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि राजस्थान विकासशील राज्यों की श्रेणी में आगे बढ़ रहा है और अब प्रदेश को विकसित बनाने की दिशा में काम हो रहा है. उन्होंने कहा कि राजस्थान के सामने लंबे समय से पानी और बिजली की उपलब्धता बड़ी चुनौती रही है. 

प्रदेश देश की करीब 10 फीसदी आबादी की जरूरतें पूरी करता है, जबकि उसके पास देश के कुल जल संसाधनों का लगभग एक फीसदी हिस्सा है. चतुर्वेदी के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों में हुए समझौतों और सरकार की नीतियों से पानी और बिजली के मामले में आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रगति हुई है.

हर साल एक लाख नौकरियों का लक्ष्य

राजस्थान में रोजगार की स्थिति पर बात करते हुए डॉ. अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि रोजगार को सरकारी और निजी क्षेत्र, दोनों के नजरिये से देखना चाहिए. उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में हर साल एक लाख सरकारी नौकरियां देने का वादा किया था. चतुर्वेदी के मुताबिक, सरकार अब तक 1.83 लाख सरकारी नियुक्तियां दे चुकी है, जबकि करीब एक लाख अन्य नियुक्तियां प्रक्रिया में हैं. उन्होंने कहा कि भर्ती परीक्षाओं और नियुक्तियों से जुड़े लंबित मामलों को पूरा करने की दिशा में भी काम किया गया है.

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उन्होंने निवेश के मुद्दे पर कहा कि राजस्थान में आयोजित राइजिंग राजस्थान समिट के दौरान करीब 35 लाख करोड़ रुपये के निवेश समझौते हुए थे. इनमें से लगभग 9 लाख करोड़ रुपये के समझौतों को जमीन पर उतारने की दिशा में प्रगति हुई है. उनके अनुसार, इन परियोजनाओं के शुरू होने से उद्योगों का विस्तार होगा और अलग-अलग क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.

हालांकि, उन्होंने रोजगार के क्षेत्र में सुधार को एक प्रक्रिया बताते हुए उम्मीद जताई कि आने वाले समय में प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और बेरोजगारी की दर में कमी आएगी.
 
कृष्णा पूनिया ने उठाए सवाल

कांग्रेस नेता कृष्णा पूनिया ने सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि निवेश समझौतों की कुल राशि बताना पर्याप्त नहीं है. सरकार को यह भी बताना चाहिए कि कितने उद्योग वास्तव में शुरू हुए और उनसे कितने लोगों को रोजगार मिला. उन्होंने कहा कि सरकार रोजगार की बात करती है, लेकिन यह स्पष्ट होना चाहिए कि निवेश के नाम पर किए गए वादों का युवाओं को कितना फायदा पहुंचा है. पूनिया ने राजस्थान की रिफाइनरी का उदाहरण देते हुए इसकी लागत बढ़ने और जल्दबाजी में शुरू करने के तरीके पर भी सवाल उठाए. उन्होंने रिफाइनरी में आग लगने की घटना का जिक्र करते हुए सरकार से जवाब मांगा.

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पूनिया ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि अगर राजस्थान को विकासशील प्रदेश के रूप में आगे बढ़ने का दावा किया जा रहा है, तो सरकार को यह भी बताना चाहिए कि प्रदेश में अपराध और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर क्या प्रगति हुई है.

बेरोजगारी के आंकड़ों पर भी आमने-सामने आए दोनों नेता

जुलाई 2023 से जून 2024 के बीच राजस्थान की बेरोजगारी दर करीब 4.7 फीसदी रहने के आंकड़े का जिक्र किया गया. इस पर चतुर्वेदी ने कहा कि रोजगार की स्थिति को समझने के लिए सरकारी नौकरियों के साथ निजी क्षेत्र में पैदा हो रहे अवसरों को भी देखना होगा. इसके जवाब में पूनिया ने पिछली कांग्रेस सरकार और मौजूदा भाजपा सरकार के कार्यकाल की तुलना करने की मांग की. उन्होंने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि उसके आने के बाद रोजगार के क्षेत्र में क्या बदलाव आया है.

जब चतुर्वेदी ने कांग्रेस सरकार के समय भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक का मुद्दा उठाया, तो पूनिया ने कहा कि पिछली सरकार के समय जिन भर्तियों की वित्तीय स्वीकृतियां जारी हो चुकी थीं, उनमें से कुछ नियुक्तियां भाजपा सरकार आने के बाद हुईं. उन्होंने भाजपा नेताओं पर भर्ती परीक्षाओं के मुद्दे को राजनीतिक आरोपों के लिए इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया.

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पेपर लीक पर भाजपा का पलटवार, कांग्रेस ने उठाए भर्ती प्रक्रिया पर सवाल

भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर चर्चा के दौरान डॉ. अरुण चतुर्वेदी ने दावा किया कि अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल में हुई 17 परीक्षाओं में पेपर लीक हुए थे. उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा सरकार बनने के बाद 200 से अधिक परीक्षाएं आयोजित की गईं और उनके मुताबिक, किसी परीक्षा का पेपर लीक नहीं हुआ.

चतुर्वेदी ने कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ नहीं होना चाहिए. उन्होंने भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और योग्य अभ्यर्थियों को अवसर देने की जरूरत पर जोर दिया.  कृष्णा पूनिया ने भर्ती और चयन प्रक्रिया से जुड़े कुछ मामलों का उल्लेख करते हुए भाजपा नेताओं के आरोपों का विरोध किया. उन्होंने एक नेता के परिवार के सदस्यों के चयन को लेकर उठाए गए सवालों के जवाब में कहा कि संबंधित अभ्यर्थियों में से एक का चयन शादी से पहले हुआ था और वह अपनी योग्यता के आधार पर चयनित हुई थीं.

पूनिया ने कहा कि किसी अभ्यर्थी की उपलब्धि को केवल उसके पारिवारिक संबंधों के आधार पर संदेह के घेरे में रखना उचित नहीं है. उन्होंने अपने क्षेत्र में शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में युवाओं की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया.

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युवाओं के प्रदर्शन और सरकार की जवाबदेही पर बहस
 
युवाओं के प्रदर्शन और अपनी मांगें उठाने के अधिकार पर भी चर्चा हुई. कृष्णा पूनिया ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराना नागरिकों का अधिकार है. उन्होंने दिल्ली में युवाओं के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि अनुशासित और गांधीवादी तरीके से अपनी बात रखना सराहनीय है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विरोध प्रदर्शनों को लेकर सख्त रवैया अपना रही है और विपक्ष को अपनी बात रखने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने चुनावी पारदर्शिता से जुड़े सवालों का भी जिक्र किया और कहा कि राहुल गांधी ने इस मुद्दे को लगातार उठाया है.

भाजपा की ओर से इन आरोपों के जवाब में चतुर्वेदी ने राजस्थान में कानून-व्यवस्था और भर्ती परीक्षाओं के मुद्दे पर कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का हवाला दिया. दोनों नेताओं के बीच इस दौरान आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी रहा.

डबल इंजन सरकार से राजस्थान को क्या फायदा?

केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार होने से राजस्थान को मिलने वाले लाभ पर भी सवाल उठे. डॉ. अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि केंद्र से मिलने वाली राशि तय मानकों के आधार पर दी जाती है, लेकिन केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय से विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है.

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उन्होंने पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी), जयपुर मेट्रो, एलिवेटेड रोड, बिजली परियोजनाओं और रिफाइनरी का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा सरकार के दौरान केंद्र के साथ समन्वय बेहतर हुआ है. उनके मुताबिक, मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे भी प्रदेश के लिए संसाधन और परियोजनाएं लाने में मददगार रहे हैं.

कृष्णा पूनिया ने इस दलील पर सवाल उठाते हुए कहा कि परियोजनाओं और निवेश के दावों का वास्तविक लाभ जनता तक पहुंचना चाहिए. उनके अनुसार, सरकार को केवल समझौतों और खर्च का ब्योरा देने के बजाय रोजगार, विकास और लोगों की सुरक्षा पर ठोस परिणाम बताने चाहिए.

पंचायत चुनाव को लेकर भाजपा की तैयारी पर क्या बोले अरुण चतुर्वेदी?

पंचायत चुनाव के संदर्भ में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की सक्रियता और संकल्प पत्र जारी करने को लेकर भी सवाल पूछा गया. चतुर्वेदी ने कहा कि भाजपा एक कैडर आधारित संगठन है और पार्टी साल के 365 दिन संगठनात्मक गतिविधियों में जुटी रहती है. उन्होंने कहा कि पार्टी निकाय और पंचायत चुनावों को भी गंभीरता से लेती है. ऐसे चुनावों में बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका होती है और मुख्यमंत्री से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक सभी कार्यकर्ता के रूप में चुनावी अभियान में जुटते हैं.

भाजपा सरकार अपने संकल्प पत्र में किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में काम कर रही है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी का प्रयास है कि जनता से किए गए वादों को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाए.

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