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बैंगन का भरता, हाथ की रोटी और हरी मिर्च... नाना पाटेकर की ये यादें धौलपुर में रहेंगी जिंदा

नाना पाटेकर के निधन से धौलपुर में भी शोक की लहर है. मई 2026 में वह 'शक्तिशालिनी' की शूटिंग के लिए चंबल के बीहड़ों में पहुंचे थे. स्थानीय लोगों और लाइन प्रोड्यूसर ने उनके साथ बिताए दिनों को याद किया. सादा भोजन पसंद करने वाले नाना आम लोगों के बीच बैठते, हंसी-मजाक करते और बिना किसी अभिमान के उनके साथ समय बिताते थे.

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धौलपुर के लोगों की आंखें नम.(Photo: ITG)
धौलपुर के लोगों की आंखें नम.(Photo: ITG)

नाना पाटेकर के निधन की खबर ने फिल्मी दुनिया के साथ-साथ राजस्थान के धौलपुर जिले के लोगों की आंखें भी नम कर दी हैं. 75 साल की उम्र में उनके जाने से सिनेमा जगत में शोक की लहर है. अपने दमदार अभिनय, रोबदार आवाज और बेबाक अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले नाना पाटेकर के धौलपुर से भी खास जुड़ी यादें हैं. उनका निधन गोवा स्थित आवास पर कार्डियक अरेस्ट के बाद हुआ है.

नाना पाटेकर मई 2026 में अपनी फिल्म 'शक्तिशालिनी' की शूटिंग के सिलसिले में धौलपुर पहुंचे थे. जिले के रहने वाले लाइन प्रोड्यूसर पप्पू कंसाना के मुताबिक, नाना पाटेकर अपनी पूरी टीम के साथ 11 मई से 16 मई तक धौलपुर में रुके थे. इस दौरान उन्होंने चंबल के बीहड़ों की अनूठी सुंदरता को करीब से देखा और फिल्म के कई महत्वपूर्ण दृश्यों की शूटिंग की.

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चंबल के कठिन रास्तों और बीहड़ों की खास भौगोलिक बनावट के बीच नाना पाटेकर की मौजूदगी ने स्थानीय लोगों को खासा प्रभावित किया था. शूटिंग देखने के लिए भी लोगों में जबरदस्त उत्साह था. फिल्म के लिए चंबल क्षेत्र में रहस्यमयी भूत बंगला और डरावनी गुफा का सेट भी तैयार किया गया था. 'शक्तिशालिनी' में नाना पाटेकर के साथ अन्य कलाकारों ने भी यहां अहम हिस्सों की शूटिंग की थी.

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बड़े स्टार होकर भी नहीं था जरा भी अभिमान

लाइन प्रोड्यूसर पप्पू कंसाना ने नाना पाटेकर के साथ बिताए उन दिनों को याद करते हुए कहा कि इतने बड़े मुकाम पर पहुंचने के बावजूद उनके भीतर अहंकार या अभिमान नाम की कोई चीज नहीं थी. वह आम लोगों के बीच बैठते थे, उनके सुख-दुख में शामिल होते थे और बिल्कुल सामान्य तरीके से लोगों के साथ वक्त बिताते थे.

धौलपुर​

पप्पू कंसाना के मुताबिक, नाना पाटेकर का रहन-सहन बेहद सादा था. शूटिंग के दौरान उन्हें घर का सामान्य खाना बहुत पसंद आता था. हाथ की बनी रोटी, चटनी, हरी मिर्च और बैंगन का भरता उनकी पसंदीदा चीजों में शामिल था. उन्होंने कई बार पप्पू कंसाना के घर से अपने लिए खाना भी मंगवाया था.

शक्तिशालिनी में भूमिका निभाने वाले स्थानीय कलाकारों ने भी नाना पाटेकर को जमीन से जुड़ा हुआ इंसान बताया. उनका कहना है कि वह लोगों के बीच बैठकर हंसी-मजाक करते थे और साथ में भोजन भी करते थे. स्थानीय कलाकारों के मुताबिक, इतने बड़े अभिनेता होने के बावजूद उनके व्यवहार में जरा भी घमंड नहीं था.

भारी आवाज और मशहूर डायलॉग की याद

धौलपुर के लोगों के बीच नाना पाटेकर की याद सिर्फ उनकी शूटिंग तक सीमित नहीं है. उनकी भारी और रोबदार आवाज आज भी फैंस के जेहन में बसी हुई है. पप्पू कंसाना ने उनके खास अंदाज को याद करते हुए उनकी चर्चित फिल्म का मशहूर डायलॉग भी दोहराया, "एक मच्छर, साला एक मच्छर आदमी को...".

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धौलपुर​

नाना पाटेकर के निधन से धौलपुर के सिने प्रेमियों को भी गहरा सदमा लगा है. चंबल के बीहड़ों में मई में बिताए उनके दिन अब स्थानीय लोगों के लिए यादों का हिस्सा बन गए हैं. शूटिंग के दौरान आम लोगों के साथ उनका सहज व्यवहार और सादगी उन लोगों को लंबे समय तक याद रहेगी, जिन्होंने उन्हें करीब से देखा था.

आज नाना पाटेकर भले ही भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन धौलपुर के चंबल बीहड़ों से जुड़ी उनकी यादें हमेशा जीवित रहेंगी. स्थानीय लोगों के बीच बैठने, उनके साथ हंसी-मजाक करने और घर के सादे भोजन का आनंद लेने वाले इस महान कलाकार को धौलपुर के लोगों ने नम आंखों से श्रद्धांजलि दी है.

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