scorecardresearch
 

यौन शोषण मामलों की सुनवाई के लिए बढ़ेंगी फास्ट ट्रैक कोर्ट, मोदी कैबिनेट ने दी मंजूरी

केंद्र सरकार ने रेप और बाल यौन शोषण मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट योजना को मार्च 2031 तक बढ़ाने की मंजूरी दी है. योजना के तहत विशेष अदालतों की संख्या 779 से बढ़ाकर 850 की जाएगी और 3,788 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.

Advertisement
X
विशेष अदालतों की संख्या 779 से बढ़ाकर 850 की जाएंगी
विशेष अदालतों की संख्या 779 से बढ़ाकर 850 की जाएंगी

केंद्र सरकार ने महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों में तेजी से न्याय सुनिश्चित करने के लिए बड़ा फैसला लिया है. केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को रेप और बाल यौन शोषण से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाली फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) योजना को अगले पांच साल तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही देश में ऐसी विशेष अदालतों की संख्या 779 से बढ़ाकर 850 करने का फैसला किया गया है. योजना अब मार्च 2031 तक लागू रहेगी.

केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सरकार महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अत्याचार के मामलों से सख्ती से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि इसके लिए मौजूदा कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के साथ जरूरत के मुताबिक नए कानून बनाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है.

3,788 करोड़ रुपये से अधिक होंगे खर्च

सरकार की ओर से जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, इस योजना पर कुल 3,788.04 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इसमें केंद्र सरकार निर्भया फंड के जरिए 2,353.15 करोड़ रुपये देगी, जबकि राज्य सरकारें और केंद्रशासित प्रदेश 1,434.89 करोड़ रुपये का योगदान करेंगे. योजना के तहत प्रत्येक फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट में एक समर्पित न्यायिक अधिकारी, एक विशेष लोक अभियोजक और छह सहायक कर्मचारी तैनात किए जाएंगे. इसका उद्देश्य रेप और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई और निपटारे की प्रक्रिया को तेज करना है.

Advertisement

अब तक 4.02 लाख से ज्यादा मामलों का निपटारा

फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट योजना की शुरुआत 2 अक्टूबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद की गई थी. वर्तमान में यह योजना देश के 29 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लागू है.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, योजना शुरू होने के बाद से इन विशेष अदालतों ने रेप और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम, 2012 से जुड़े 4.02 लाख से अधिक मामलों का निपटारा किया है.

अब सरकार ने इन अदालतों की संख्या 779 से बढ़ाकर 850 करने का फैसला किया है. यानी योजना के विस्तार के तहत 71 अतिरिक्त फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट बनाई जाएंगी. जिन जिलों में रेप और पॉक्सो के लंबित मामलों की संख्या अधिक है, उन्हें भी योजना में शामिल किया जा सकेगा.

पीड़ितों और बच्चों के लिए अनुकूल माहौल बनाने पर जोर

इस योजना के तहत अदालतों में पीड़ितों और गवाहों के लिए सुरक्षित तथा संवेदनशील वातावरण तैयार करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा. इसके लिए संवेदनशील गवाहों के बयान दर्ज करने वाले विशेष केंद्र और बच्चों के अनुकूल अदालती सुविधाएं विकसित की जाएंगी. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यौन अपराधों के पीड़ित बिना किसी अतिरिक्त मानसिक परेशानी के गरिमा और सम्मान के साथ अपनी गवाही दे सकें.

Advertisement

ऑनलाइन डैशबोर्ड से होगी अदालतों की निगरानी

केंद्रीय कानून मंत्रालय का न्याय विभाग राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासन के साथ मिलकर योजना को लागू करेगा. इसके अलावा अदालतों के कामकाज और मामलों के निपटारे की निगरानी के लिए ऑनलाइन डैशबोर्ड का इस्तेमाल किया जाएगा. नियमित प्रगति समीक्षा और हाई कोर्ट तथा राज्य सरकारों के साथ विचार-विमर्श के जरिए योजना की प्रभावशीलता का आकलन किया जाएगा. सरकार का कहना है कि इस फैसले से रेप और बाल यौन शोषण के लंबित मामलों के जल्द निपटारे में मदद मिलेगी और पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाने की प्रक्रिया मजबूत होगी.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement