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जयपुर की ऐतिहासिक पहचान पर मंडराया खतरा! अवैध निर्माण और कब्जों से छिन सकता है UNESCO का दर्जा

जिन खूबसूरत ऐतिहासिक इमारतों से जयपुर की पहचान है, आज उन्हीं इमारतों और उनकी पहचान पर खतरा मंडरा रहा है. जयपुर हाईकोर्ट ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते सही कदम नहीं उठाए गए तो इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है.

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जयपुर की ऐतिहासिक इमारत खतरे में है (Photo-Reuters)
जयपुर की ऐतिहासिक इमारत खतरे में है (Photo-Reuters)

जयपुर की पहचान उसके महलों, हवेलियों, और गुलाबी रंग की इमारतों के साथ ही उसकी ऐतिहासिक बनावट से भी है, जो कि जयपुर को दुनिया के बाकी शहरों से खास बनाती है. लेकिन अब यह पहचान खतरे में है. राजस्थान हाईकोर्ट ने चेतावनी दी है कि अगर अवैध निर्माण, कब्जों और बिना इजाजत किए जा रहे बदलावों पर जल्द रोक नहीं लगी, तो जयपुर की वॉल्ड सिटी से UNESCO का वर्ल्ड हेरिटेज दर्जा छिन सकता है.

हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि दिसंबर से पहले जरूरी सुधार नहीं किए गए तो शहर की ऐतिहासिक पहचान को बड़ा नुकसान पहुंच सकता है. अदालत ने अधिकारियों से समय रहते ठोस कदम उठाने को कहा है. जयपुर की वॉल्ड सिटी को साल 2019 में UNESCO की वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल किया गया था.

यह दर्जा शहर की ऐतिहासिक इमारतों, खास वास्तुकला और व्यवस्थित बसावट को देखते हुए मिला था. लेकिन अब यहां पुराने मकानों को तोड़ने, अवैध निर्माण और नियमों के खिलाफ बदलाव की शिकायतें सामने आई हैं. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में बताया कि UNESCO ने 2023 और 2025 में भी जयपुर की विरासत को बचाने को लेकर चिंता जताई थी.

रिपोर्ट में ऐतिहासिक मकानों को गिराने और संरक्षण के नियमों को ठीक से लागू नहीं करने जैसी बातें सामने आई थीं. अदालत ने कहा कि अगर यही हालात बने रहे तो जयपुर की उस वास्तुकला को नुकसान पहुंचेगा, जिसकी वजह से उसे विश्व धरोहर का दर्जा मिला था. 

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दो हफ्ते में सर्वे, अधिकारियों से मांगा जवाब

जस्टिस प्रमिल कुमार माथुर ने 26 सितंबर को यह आदेश दिया. अदालत ने जयपुर विकास प्राधिकरण और नगर निगमों को वॉल्ड सिटी में हो रहे अवैध और अनियंत्रित निर्माण का सर्वे कर दो हफ्ते में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है.

यह भी पढ़ें: जयपुर की गलियों में छिपा है भूलभुलैया सीढ़ियों वाला रहस्यमयी कुंड! महलों से अलग है इसकी कहानी

अधिकारियों से यह भी पूछा गया है कि विरासत को बचाने के लिए क्या नियम हैं और उनका कितना पालन हो रहा है. निर्माण की ऊंचाई, जमीन के इस्तेमाल, आसपास के सुरक्षित क्षेत्रों और इमारतों की मंजूरी देने से पहले विरासत पर पड़ने वाले असर की जांच को लेकर भी जवाब मांगा गया है.

कोर्ट ने तत्काल और लंबे समय के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार करने को कहा है, ताकि UNESCO की अंतिम रिपोर्ट आने से पहले जरूरी कदम उठाए जा सकें. हाईकोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि एक बार विरासत खो गई तो उसे दोबारा बनाया नहीं जा सकता. ऐसे में जयपुर की ऐतिहासिक इमारतों को बचाना सिर्फ सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है. अब निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर हैं.

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