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'फर्जी' वेब सीरीज देख खड़ा किया जाली नोटों का साम्राज्य, पांच राज्यों में फैला नेटवर्क, 6 गिरफ्तार

जाली नोट छापने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए राजस्थान पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. बताया जा रहा है कि गिरोह के कुछ सदस्य वेब सीरीज ‘फर्जी’ से प्रेरित हुए थे. इस मामले की कड़ियां राजस्थान से निकलकर उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और छत्तीसगढ़ तक पहुंच गईं.

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पुलिस जांच के मुताबिक, गिरोह के कुछ सदस्य वेब सीरीज ‘फर्जी’ से प्रेरित हुए. (Photo: ITG)
पुलिस जांच के मुताबिक, गिरोह के कुछ सदस्य वेब सीरीज ‘फर्जी’ से प्रेरित हुए. (Photo: ITG)

राजस्थान की डूंगरपुर पुलिस ने ‘ऑपरेशन नोटफ्लिक्स’ के तहत जाली नोट छापने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. मशहूर वेब सीरीज 'फर्जी' से प्रेरित होकर गिरोह ने रील और स्क्रीन की कहानी को हकीकत में उतारने की कोशिश की और नकली नोटों का एक बड़ा नेटवर्क खड़ा कर दिया. इस मामले में यूट्यूब की मदद लेने की बात भी सामने आई है.

हालांकि, अपराध की इस कहानी का क्लाइमेक्स पुलिस ने लिख दिया. अब पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि जाली नोटों का यह खेल कितनी दूर तक फैला और बाजार में कितनी नकली मुद्रा खपाई गई.

पुलिस जांच के मुताबिक, गिरोह के कुछ सदस्य वेब सीरीज ‘फर्जी’ से प्रेरित हुए और नकली नोट तैयार करने की योजना पर काम करने लगे. आरोप है कि इस नेटवर्क में डिजिटल फाइलों और विशेष कागज की व्यवस्था के लिए ऑनलाइन माध्यमों का इस्तेमाल किया गया. देखते ही देखते इस मामले की कड़ियां राजस्थान से निकलकर उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और छत्तीसगढ़ तक पहुंच गईं. 

इस पूरे मामले की शुरुआत 29 सितंबर को हुई, जब डूंगरपुर के माडा स्कूल ग्राउंड से पुलिस ने भावेश खटीक और नयन जोशी को 4 लाख 95 हजार 500 रुपये की जाली मुद्रा के साथ गिरफ्तार किया. 

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शुरुआती कार्रवाई के बाद पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ की और जांच आगे बढ़ाई. इसके बाद गिरोह के कथित नेटवर्क, उसके सदस्यों और अलग-अलग राज्यों में मौजूद कड़ियों का खुलासा होने लगा.

पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार के मुताबिक मामले का मुख्य आरोपी रवि कुमार कार्रवाई की भनक लगने के बाद फरार हो गया था. वह लगातार अपने ठिकाने और मोबाइल नंबर बदल रहा था, ताकि पुलिस की पकड़ से दूर रह सके. लेकिन करीब 1300 किलोमीटर दूर पंजाब के लुधियाना रेलवे स्टेशन से उसे गिरफ्तार कर लिया गया. 

पुलिस जांच में हरियाणा के अंबाला निवासी आनंद राजपूत की भूमिका भी सामने आई. पुलिस के अनुसार, आनंद ने ही वेब सीरीज से प्रेरित होकर नकली नोट छापने का विचार विकसित किया था. मामले में फोटोशॉप और यूट्यूब की मदद लेने की बात भी सामने आई है. 

वहीं, उत्तर प्रदेश के कानपुर से मोहम्मद आरिफ को गिरफ्तार किया गया. उस पर टेलीग्राम के ‘अंकित पेपर सेलर’ चैनल के जरिए कागज उपलब्ध कराने का आरोप है. छत्तीसगढ़ के दुर्ग से पकड़े गए तरुण मालेकर पर 500 रुपये के नोट से संबंधित डिजिटल फाइल उपलब्ध कराने का आरोप है. डूंगरपुर पुलिस ने इस मामले में कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इनमें उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ निवासी रवि कुमार, हरियाणा के अंबाला कैंट निवासी आनंद राजपूत, कानपुर निवासी मोहम्मद आरिफ, छत्तीसगढ़ के दुर्ग निवासी तरुण मालेकर और डूंगरपुर निवासी भावेश खटीक और नयन शामिल हैं.

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