राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत मोदी सरकार पर 'भ्रष्टाचार के नए मॉडल' और हितों के टकराव का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि हाल की घटनाओं से पता चलता है कि राजनेताओं और नौकरशाहों को खास तरजीह दी जा रही है.
एक मीडिया रिपोर्ट का जिक्र करते हुए गहलोत ने कहा कि ये आरोप गंभीर हैं. रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि अजमेर से सांसद और केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को उनके ही मंत्रालय की एक योजना के तहत सब्सिडी मिली. इस योजना को मंजूरी देने वाले बोर्ड में वे खुद पदेन उपाध्यक्ष हैं.
गहलोत ने कहा, "मोदी सरकार के तहत भ्रष्टाचार के नए मॉडल और 'हितों के टकराव' का एक और बड़ा मामला सामने आया है. इसमें एक केंद्रीय मंत्री और केंद्र सरकार में कार्यरत एक IAS अधिकारी पर आरोप लगे हैं."
उन्होंने आरोप लगाया, "इसे आप क्या कहेंगे जब कृषि राज्य मंत्री खुद अपने ही मंत्रालय की योजना के तहत अपने खेत के लिए लगभग एक करोड़ रुपये की सब्सिडी मंजूर करवाते हैं?
एक तरफ, आम किसान को फायदा पाने के लिए दफ्तर-दफ्तर भटकना पड़ता है, और दूसरी तरफ, मंत्रियों और चहेते अधिकारियों को करोड़ों रुपये का सरकारी फायदा मिलता है."
गहलोत ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री से जुड़े कथित घोटालों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाए.
कांग्रेस नेता ने कहा, "जो व्यक्ति 'न खाऊंगा, न खाने दूंगा' का नारा देता था, वह आज अपने ही मंत्रियों की इस खुली गड़बड़ी पर चुप क्यों है? देश की जनता इस दोहरे मापदंड को देख रही है."