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अस्पताल पहुंचने से पहले एंबुलेंस बनी डिलीवरी रूम... दो प्रसूताओं ने रास्ते में बच्चों को दिया जन्म

राजस्थान के अलवर जिले में प्रतापगढ़ सीएचसी से रेफर की गई दो गर्भवती महिलाओं का प्रसव अस्पताल पहुंचने से पहले ही 108 एंबुलेंस में कराना पड़ा. दोनों मामलों में एंबुलेंस कर्मचारियों ने रास्ते में प्रसव कराया. घटना के बाद स्थानीय स्वास्थ्य सुविधाओं और रेफरल सिस्टम पर सवाल उठ रहे हैं.

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अलवर से जयपुर के लिए किया गया था रेफर. (Photo: ITG)
अलवर से जयपुर के लिए किया गया था रेफर. (Photo: ITG)

राजस्थान में अलवर के अस्पताल से दो प्रेग्नेंट महिलाओं को रेफर किया गया था. इस दौरान अस्पताल पहुंचने से पहले ही एंबुलेंस में प्रसव हो गया. दोनों महिलाओं को गंभीर हालत में जयपुर रेफर किया गया था, लेकिन रास्ते में ही प्रसव पीड़ा बढ़ने पर एंबुलेंस कर्मियों ने सड़क किनारे वाहन रोककर डिलीवरी कराई.

मामला अलवर जिले के प्रतापगढ़ क्षेत्र का है. पहला मामला थानागाजी के पड़ाकछापली गांव का है. यहां 33 साल की महिला प्रसव के लिए सीएचसी में भर्ती हुई थी. हालत को देखते हुए महिला को जयपुर के गणगौरी अस्पताल रेफर कर दिया गया. लेकिन जयपुर पहुंचने से पहले ही प्रसव पीड़ा तेज हो गई. गणगौरी अस्पताल से करीब 20 किलोमीटर पहले सड़वा मोड़ के पास एंबुलेंस को सड़क किनारे रोकना पड़ा.

इसके बाद एंबुलेंस में मौजूद ईएमटी अमित कुमार सैनी ने प्रसव कराया. इस दौरान पायलट मनोज कुमार शर्मा ने मदद की. महिला ने एक बेटी को जन्म दिया. यह उनकी सातवीं संतान है. पहले महिला की छह बेटियां हैं.

यह भी पढ़ें: पेट दर्द हुआ तो जांच में प्रेग्नेंट निकली अनमैरिड लड़की... अस्पताल में हो गई डिलीवरी, नवजात को ले जाने से इनकार

ऐसा ही एक और मामला सामने आया. गुवाड़ा गुगली की रहने वाली 30 साल की महिला को भी प्रसव के लिए सीएचसी प्रतापगढ़ लाया गया था. यहां से बड़े अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया. जयपुर ले जाते समय अस्पताल पहुंचने से करीब 30 किलोमीटर पहले भानपुर मोड़ के पास महिला को तेज प्रसव पीड़ा होने लगी.

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हालात ऐसे बने कि एंबुलेंस में ही डिलीवरी करानी पड़ी. महिला ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया. यह उनकी सातवीं डिलीवरी थी. उनके पहले पांच बेटियां और एक बेटा है. इन मामलों को लेकर ग्रामीणों का आरोप है कि प्रतापगढ़ सीएचसी में मरीजों को समुचित इलाज देने के बजाय अक्सर बड़े अस्पतालों के लिए रेफर कर दिया जाता है.

जहां से रेफर किया गया, वहां की डॉक्टर ने क्या कहा?

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रसूताओं को इस तरह लंबी दूरी तक भेजना जोखिम भरा हो सकता है. हालांकि सीएचसी प्रतापगढ़ की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मोहिनी बलाई ने अस्पताल में संसाधनों की कमी की बात कही है. उनका कहना है कि प्रसूति वार्ड में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं. ऐसे में कई मामलों में सामान्य डिलीवरी कराना भी मुश्किल हो जाता है और गंभीर प्रेग्नेंट महिलाओं को बेहतर सुविधाओं वाले बड़े अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है. 

वहीं स्थानीय लोगों ने अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि मरीजों का इलाज करने के बजाय उन्हें रेफर कर दिया जाता है. इससे गर्भवती महिलाओं को लंबा सफर तय करना पड़ता है और कई बार रास्ते में ही आपात स्थिति पैदा हो जाती है.

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